२१. ‘एक्झोडस्’ – मोझेस की मृत्यु

मोझेस को अपनी ग़लती ध्यान में आ गयी और उसने अपनी ग़लती का तथा ईश्‍वर ने उसके लिए दी हुई सज़ा का भी बिना किसी तक़रार के स्वीकार कर दिया। आरॉन को भी, उसने प्राणिमूर्तिपूजन में हिस्सा लिया इसलिए यही सज़ा ईश्‍वर ने बतायी थी कि वह भी कॅनान की भूमि पर कदम नहीं रख सकेगा।

जब आरॉन की मृत्यु की घड़ी नज़दीक आयी, तब ईश्‍वर ने मोझेस, आरॉन तथा आरॉनपुत्र एलाझार को माऊंट होर पर बुलाया। पिछले चालीस सालों से सभी सुखदुखों में अपना साथ देनेवाले अपने बड़े भाई के वियोग की कल्पना से मोझेस गदगद हो उठा था। पर्वतशिखर पर पहुँचने के बाद ईश्‍वर के कहेनुसार वहॉं की एक गुङ्गा में जाकर मोझेस ने सीने पर पत्थर रखकर आरॉन के बदन पर होनेवाले ‘सर्वोच्च धर्मोपदेशक’ के सभी धर्मचिह्न उतरवाकर उन्हें आरॉनपुत्र एलाझार के बदन पर पहनाये। ज्यूधर्मियों का अगला सर्वोच्च धर्मोपदेशक एलाझार ही होनेवाला था। यह विधि हो जाते ही ईश्‍वर ने आरॉन को शान्ति से लेटने को कहा। उसके बाद आरॉन की मृत्यु हुई और उसकी आत्मा को ईश्‍वर अपने साथ स्वर्ग ले गये, ऐसा वर्णन इस कथा में आता है। मृत्यु के समय आरॉन की उम्र १२३ साल थी।

Ten Commandments

ज्यूधर्मियों को आरॉन की मृत्यु का बहुत बड़ा दुख हुआ था और वे लगभग महीने भर उसका शोक मना रहे थे।

माऊंट होर से ये ज्यूधर्मीय कॅनान प्रांत से सटकर होनेवाले एडॉम, ऍमॉन एवं मोआब इन प्रान्तों के नज़दीक आये। लेकिन इन प्रांतों से शान्ति से होकर जाने की ज्यूधर्मिों की विनति को यहॉं के राजाओं ने ठुकरा दिया और ज्यूधर्मियों से संघर्ष करने के लिए अपनी अपनी सेनाओं को सुसज्जित रखा। लेकिन इन राजाओं से युद्ध करने की इजाज़त ईश्‍वर ने ज्यूधर्मियों को नहीं दी। अतः अब कॅनान में पहुँचने के लिए ज्यूधर्मियों को इन प्रदेशों को टालकर जाने के लिए बहुत बड़ा फ़ेरा लगाना पड़नेवाला था।

उसके बाद इन ज्यूधर्मियों का पाला ऍमोरी प्रांत के राजा सिहॉन से पड़ा। मोझेस ने उसे सन्देश भेजकर – ‘हमें केवल आपके प्रदेश से हो गुज़रने के लिए रास्ता चाहिए। हम केवल मुख्य राजमार्ग का इस्तेमाल करेंगे। रास्ते में हमारी ओर से आपके निवासियों को कोई तक़ली़फ़ नहीं होगी। यहॉं तक कि हमें आवश्यक होनेवाला अनाजपानी भी हम स्थानीय निवासियों से ख़रीद ही लेंगे और यदि अनजाने में हमसे उनका कुछ नुकसान हुआ, तो उसका हरजाना भी हम देंगे’ ऐसी तहे दिल से विनति की। उसे सिहॉन ने ठुकरा दिया। इतना ही नहीं, बल्कि उसने अपनी सारी सेना लेकर ज्यूधर्मियों का रास्ता रोक दिया। इस कारण उसके साथ लड़ने के सिवाय ज्यूधर्मियों के पास और कोई चारा ही नहीं था। सिहॉन की सेना को पूरी तरह परास्त करके ज्यूधर्मियों ने उस पूरे प्रदेश पर कब्ज़ा कर लिया। वही हाल अगले बशन प्रांत के राजा ओग की सेना का हुआ और बशन प्रांत भी ज्यूधर्मियों के कब्जे में आ गया। ज्यूधर्मियों का एक एक कदम कॅनान प्रांत की दिशा में पड़ रहा था।

इन दोनों प्रांतों में हरेभरे घास के मैदान (चरागाह) बड़े पैमाने पर होने के कारण ये दोनों पशुपालन के लिए प्रदेश बेहतरीन थे। अत एव इस्रायल की ‘बारह ज्ञातियों’ में, पशुओं के सबसे बड़े झुँड़ों की मालिक़ियत रहनेवाले रुबेन और गॅड इन ज्ञातियों के प्रमुखों ने, ‘क्या हमें ये प्रांत निवास के लिए मिल सकते हैं’ ऐसा मोझेस से पूछा। तब – ‘बाक़ी के ज्यूधर्मीय जब कॅनान पर कब्ज़ा करने के लिए दुश्मनों से लड़ रहे होंगे, तब तुम लोग क्या यहॉं पर आराम से बैठकर मज़े लोगे?’ ऐसी मोझेस ने उन्हें खरी खरी सुनायी। उसपर उन्होंने – ‘हम तो आपके कन्धे से कन्धा लगाकर ही लड़ेंगे। यहॉं केवल बीवीबच्चों को एवं प्राणियों को झुँड़ों को रहने दो। हम हमारा लक्ष्य हासिल होने तक यहॉं कदम भी नहीं रखेंगे’ ऐसा आश्‍वासन, ज्यूधर्मियों के अग्रसर योद्धा रहनेवाले इन दो ज्ञातियों के प्रमुखों द्वारा दिया जाने के बाद मोझेस ने उन्हें उन प्रांतों को अपने पास रखने की अनुमति दी और उन्होंने अपना वचन निभाया भी।

इस तरह ऍमोरी तथा बशन प्रांतों के राजा परास्त होने का समाचार सुनकर उनके पड़ोस के मोआब एवं मिडियन प्रदेशों के राजाओं के दिलों में घबराहट होने लगी। दरअसल इन दो राजाओं की एक-दूसरे से पीढ़िजाद दुश्मनी थी। लेकिन ‘समान शत्रु’ इस आधार पर ये दोनों एक हो गये और येनकेनप्रकारेण, यहॉं तक कि काली विद्याओं का इस्तेमाल करके भी ज्यूधर्मियों को परास्त करने की कोशिश की, ऐसा वर्णन इस कथा में आता है। लेकिन उनके द्वारा इसके लिए बुलाये गये माहिर जादुगार ने उन्हें स्पष्ट रूप में बताया कि ‘ज्यूधर्मियों ईश्‍वर के संरक्षण में हैं, इसलिए मैं कुछ भी नहीं कर सकूँगा।’ लेकिन जादुगार ने उन्हें – धोख़े सेे, शाही खाना-सुंदर स्त्रियाएँ इनका इस्तेमाल कर ज्यूधर्मियों को फ़ॅंसाने की सलाह दी। उन्होंने वैसा करने के बाद कुछ ज्यूधर्मीय उनके जाल में फ़ॅंसे भी। लेकिन अब आरॉन के बाद सर्वोच्च धर्मोपदेशक बने एलाझार के बेटे पिन्हॅस ने, इस साज़िश में शामिल हुए ज्यूधर्मियों में से एक नेता को मार दिया। उसके बाद ही इस साज़िश का शिकार हो रहे अन्य ज्यूधर्मियों के दिल में ख़ौ़फ़ पैदा होकर वे अगले पतन से बच गये। इस साज़िश के कारण गुस्सा हुए ईश्‍वर ने मोझेस को इन दो प्रांतों के खिला़फ़ युद्ध घोषित करने का आदेश दिया। उसके बाद मोझेस की सेना ने इन दो प्रांतों के राजा, सभी राजकुमार, सेना और वह जादुगारस इन सब को मारकर उन प्रदेशों पर कब्ज़ा कर लिया।

अब ये लोग जॉर्डन की सीमा तक पहुँच गये थे। यहॉं से कुछ ही दूरी पर ‘प्रॉमिस्ड लँड’ की शुरुआत हो रही थी। यहॉं ईश्‍वर ने ज्यूधर्मियों की गिनती करने को कहा; तब २० साल से अधिक उम्र होनेवाले ज्यूधर्मीय पुरुषों की गिनती पुनः ६ लाख ही हुई। उनके अलावा उनके परिवार थे। लेकिन अब पुरानी – ईश्‍वर पर अविश्‍वास दर्शानेवाली पूरी पीढ़ी ने रेगिस्तान के चालीस सालों के प्रवास के दौरान उम्र के हिसाब से इस दुनिया से विदा ली थी।

….और अब मोझेस की घड़ी नज़दीक आ रही थी!

उसके बाद ईश्‍वर ने मोझेस को अबारिम पर्वत पर बुलाया और पर्वतशिखर पर से सभी दिशाओं में दिख रहे कॅनान के प्रदेश का अवलोकन करने के लिए उसे कहा। जिस ‘प्रॉमिस्ड लँड’ को ज्यूधर्मियों को ले जाना, यह गत चालीस वर्षों से उसका ध्यास रहा था, उस ‘प्रॉमिस्ड लँड’ को मोझेस ने जी भरकर देख लिया। ‘प्रॉमिस्ड लँड’ में मैं जा न सकूँगा, इसका एहसास होकर वह गदगद हो गया था। लेकिन अपने हाथों हुई ग़लती भी उसे मंज़ूर थी और उसके लिए ईश्‍वर ने सुनायी सज़ा भी!

उस समय उसने ईश्‍वर से अपने उत्तराधिकारी का नाम पूछा; तब ज्यूधर्मियों को कॅनान प्रांत में लाये जानेवाले उनके नेता के रूप में अब मैंने मोझेस के सहकर्मी जोशुआ का चयन किया है ऐसा ईश्‍वर ने उसे बताया।

इतने साल ईश्‍वर का कृपाप्राप्त रहने के कारण स्वाभाविक रूप से मोझेस को प्राप्त हुईं कुछ दैवी शक्तियों को ईश्‍वर ने उसे, सर्वोच्च धर्मोपदेशक एलाझार की मौजूदगी में, जोशुआ को हस्तांतरित करने के लिए कहा। मोझेस ने थोड़ा भी गुस्सा न करते हुए ईश्‍वर ने बतायी विधि की।

अपने जाने की घड़ी नज़दीक आती जा रही है, यह सूचना मोझेस को ईश्‍वर से मिलने के बाद मोझेस ने पुनः एक बार संपूर्ण ‘टोराह’ आख़िरी बार ज्यूधर्मियों को विशद किया और हमेशा ईश्‍वर के इस क़ानून के दायरे में रहने के लिए कहा। इस दौर में मोझेस ने संपूर्ण ‘टोराह’ के पॉंच खंड लिखे, जो इसके लिए ख़ास बनाये गये ‘आर्क ऑफ़ कॉवेनन्ट’ में ‘टेन कमांडमेंट्स’ के पत्थर की टॅबलेट्स के पास सम्मानपूर्वक रखे गये।

उसके बाद मोझेस ने सभी ज्यूधर्मियों के सामने भाषण कर सारी परिस्थिति समझाकर बतायी। अपने हाथों हुई ग़लती भी उसने तहे दिल से विशद की। ज्यूधर्मीय बार बार ईश्‍वर के प्रति जो अविश्‍वास दिखा रहे हैं, उसको लेकर उसने उन्हें खरी खरी सुनायी और अपने सर्वशक्तिमान ईश्‍वर की ऊँगली हमेशा पकड़े रखना, ऐसा उन्हें अनुरोधपूर्वक कहा। ज्यूधर्मिय गदगद हो उठे थे। उनमें से कुछ रो भी रहे थे।

जैसे ही मोझेस के जाने की घड़ी आ गयी, ईश्‍वर ने उसे नेबो पर्वत पर आने के लिए कहा। पर्वतशिखर पर से दिख रही ‘प्रॉमिस्ड लँड’ को मोझेस ने एक आख़िरी बार जी भरकर देख लिया। उसके बाद मोझेस ने सन्तोषपूर्वक प्राण त्याग दिये। ईश्‍वर स्वयं उसकी आत्मा को स्वर्ग ले गये, ऐसा वर्णन बायबल में आता है। मृत्यु के समय मोझेस की उम्र १२० साल थी।

इस प्रकार एक पर्व ख़त्म हुआ था! ज्यूधर्मियों को इजिप्त की ग़ुलामी में से बाहर निकालने के लिए ईश्‍वर का साधन साबित हुए मोझेस की मृत्यु ने, ज्यूधर्मियों के इतिहास का पहला धार्मिक खंड समाप्त हुआ था और ज्यूधर्मीय ईश्‍वर ने उन्हें अभिवचन देकर बहाल की हुई ‘प्रॉमिस्ड लँड’ में कदम रखने के लिए सिद्ध हो चुके थे।  (क्रमश:)

– शुलमिथ पेणकर-निगरेकर