नेताजी-१४०

नेताजी-१४०

लाख कोशिशें करने के बावजूद भी रशिया के दरवाज़ें नहीं खुल रहे हैं, यह देखकर परेशान हुए सुभाषबाबू ने रशिया जाने का प्लॅन रद करके जर्मनी के दरवाज़े पर दस्तक देने की बात तय कर ली। और ताज्जुब की बात यह थी कि जिस दिन वे जर्मन एम्बसी में जाकर कोशिश करने की ठानकर निकल […]

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नेताजी- १३९

नेताजी- १३९

आख़िर काबूल की रशियन एम्बसी की इमारत से रूबरू हो जाने के बाद उस रात सुभाषबाबू चैन की नीन्द सोये। लेकिन उससे पहले उन्होंने अपने मक़सद एवं अगली योजना के बारे में सुस्पष्ट जानकारी देनेवाला एक खत रशियन उच्चायुक्त को देने के लिए रात को ही लिखकर तैयार रख दिया था। सुबह जल्दी उठकर वे […]

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नेताजी- १३८

नेताजी- १३८

इस तरह गत दस दिनों से पहाड़ी इला़के में पहाड़ जितनी मुसीबतें उठाते हुए, कड़ी धूप में लगातार पैदल चलना, खानपान की असुविधा, बर्फ़बारी इन जैसी विभिन्न भयानक मुश्किलों का सामना करते हुए आख़िर सुभाषबाबू काबूल पहुँच गये। उनकी मुहिम के अगले पड़ाव की शुरुआत यहीं से होनेवाली थी। बुदखाक से तांगा पकड़कर सुभाषबाबू भगतराम […]

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नेताजी- १३७

नेताजी- १३७

शुरुआत तो अच्छी हो गयी थी। सुभाषबाबू एल्गिन रोडस्थित घर से अचानक ग़ायब हो चुके हैं और इससे परिवारवालों को गहरा सदमा पहुँचा है, यह ‘ख़बर’ अनौपचारिक रूप से अब पूरे कोलकाता को ज्ञात हुई थी। अब आशंका थी, पुलीस की प्रतिक्रिया की! पुलीस जब इस वाक़ये के बारे में जान गयी, तब वह आगबबूला […]

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नेताजी- १३६

नेताजी- १३६

२४ तारीख़ की दोपहर से सुभाषबाबू और भगतराम ने ट्रक स्थित चाय के बक़्सों पर बैठकर अपनी अगली यात्रा का आरंभ किया। ट्रक ढूँढ़ने के चक्कर में दोपहर का खाना तक न खाने के कारण अब पेट में चूहें दौड़ने लगे थे। बीच रास्ते में ही बारीकोट में ड्रायव्हर ने चाय पीने के लिए गाड़ी […]

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नेताजी-१३५

नेताजी-१३५

प्रार्थनास्थल में रात बिताकर अब सुभाषबाबू का अगला सफ़र खच्चर पर से शुरू हो गया। उस वीरान मुल्क़ में खच्चर का ही सहारा था। गत दिन एक घण्टे में एकाद मील इस ‘गति’ से मार्गक्रमणा हुई थी। लेकिन अब एक घण्टे में ३-४ मील ऐसी ऱफ़्तार आ चुकी थी। लेकिन थोड़ी देर में समतल ज़मीन […]

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नेताजी- १३४

नेताजी- १३४

कड़ी धूप में काफ़ी दूरी पैदल ही तय करने के कारण अब सुभाषबाबू बहुत ही थक चुके थे। अब उनके पैरों में दर्द भी होने लगा था। मग़र तब भी एक अभूतपूर्व ज़िद के कारण जैसे तैसे पैर खींचते हुए उस वीरान पहाड़ी इला़के में से वे आगे गुज़र रहे थे। एक तो पहले ही […]

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नेताजी- १३३

नेताजी- १३३

अब इसके बाद सरहद स्थित पहाड़ी टोलियों के प्रदेश में ‘भगतराम तलवार’ मेरे साथ जायेगा, यह सुनकर सुभाषबाबू ने मियाँसाहब की ओर प्रश्‍नसूचक नज़रिये से देखा। शुरुआत में मियाँसाहब जब कोलकाता आये थे, तब उनके मुँह से ‘भगतराम तलवार’ यह नाम पहली बार सुनते ही यह कोई तगड़ा, हट्टाकट्टा मनुष्य रहेगा, ऐसी उनकी धारणा बन […]

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नेताजी- १३२

नेताजी- १३२

धनबाद के नज़दीक के गोमोह स्टेशन पर सुभाषबाबू को अलविदा करके और वे ‘दिल्ली-कालका मेल’ में चढ़ गये हैं यह देखने के बाद शिशिर, अशोकनाथ और उसकी पत्नी दिल पर पत्थर रखकर घर की ओर रवाना हुए। गाड़ी में सभी चूप थे। लेकिन घर पहुँचने पर सोते समय शिशिर और अशोकनाथ देर रात तक ‘रंगाकाकाबाबू’ […]

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नेताजी- १३१

नेताजी- १३१

इस तरह पहरा देनेवाले गुप्तचरों को चकमा देकर १६ जनवरी १९४१ की देर रात घर से निकले सुभाषबाबू की गाड़ी १७ तारीख़ की सुबह साढ़े-आठ बजे बराड़ी पहुँच गयी। इस मुहिम के पहले पड़ाव को यशस्वी रूप में पार करने के बाद अब सुभाषबाबू का मन इस मुहिम के दूसरे पड़ाव के बारे में सोच […]

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