नेताजी-१७३

नेताजी-१७३

सुभाषबाबू यहाँ बर्लिन में ‘आज़ाद हिन्द सेना’ की भर्ती के लिए दिलोजान से कोशिशें कर रहे थे और वहाँ महायुद्ध के अतिपूर्वीय नये मोरचे पर मानो उनकी भावी कृतियोजना को फ़लित बनाने के लिए ज़मीन ही जोती जा रही थी! ७ दिसम्बर १९४१ को अमरीका के पर्ल हार्बर स्थित शक्तिशाली नौसेना अड्डे को जापान ने […]

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नेताजी-१७२

नेताजी-१७२

अ‍ॅनाबर्ग शिविर के भारतीय युद्धबन्दियों के दिल जीतकर, वहाँ की ‘आज़ाद हिन्द सेना’ भर्ती की प्रक्रिया शुरू करवाकर सुभाषबाबू सन्तोषपूर्वक बर्लिन लौट आये। २५ दिसम्बर को १५ लोगों की पहली टुकड़ी को सैनिक़ी प्रशिक्षण के लिए फ़्रॅंकेनबर्ग भेजा गया था। उन्हें क़सरत और युद्ध-अभ्यास के साथ ही, अत्याधुनिक शस्त्र-अस्त्रों को चलाना, आक्रमण एवं बचाव की […]

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नेताजी- १७१

नेताजी- १७१

अ‍ॅनाबर्ग शिविर के युद्धबन्दियों के सामने सुभाषबाबू द्वारा इतनी तड़प के साथ ‘आज़ाद हिन्द सेना’ की संकल्पना सुस्पष्ट करने के बावजूद भी युद्धबन्दियों से मिला प्रतिसाद तो ठण्डा ही था। लेकिन ‘ज़िद’ (‘नेव्हर से डाय स्पिरिट’) इस शब्द की साक्षात् मूर्ति ही रहनेवाले सुभाषबाबू हार न मानते हुए अपने ध्येय के साथ अटल रहकर कोशिशों […]

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नेताजी- १७०

नेताजी- १७०

अ‍ॅनाबर्ग का शिविर बर्लिन से लगभग डेढ़सौ मील दूर था। उसमें ख़ासकर जर्मन सेनानी रोमेल की सेनाओं द्वारा अफ्रिका की मुहिम में परास्त किये गये अँग्रेज़ी फ़ौज़ के युद्धबन्दियों को रखा गया था। हालाँकि उनमें अधिकतर अँग्रेज़ों के लिए जंग लड़नेवाले भारतीय सैनिक ही थे, मग़र फिर भी ‘अफ़सर’ दर्जे के युरोपीय भी काफ़ी संख्या […]

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नेताजी- १६९

नेताजी- १६९

सुभाषबाबू अ‍ॅनाबर्ग के सैनिक़ी शिविर में भारतीय युद्धबन्दियों से बात करने आयें, यह सन्देश उनके द्वारा वहाँ भेजे गये प्रतिनिधियों ने भेजा तो था, लेकिन सुभाषबाबू फ़िलहाल ‘आज़ाद हिन्द रेडिओ’ के प्रसारण की तैयारी में जुटे हुए थे। ७ जनवरी १९४२ से प्रसारण शुरू हुआ। एक खास ध्वनिलहर जर्मन सरकार ने ‘आज़ाद हिन्द रेडिओ’ के […]

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नेताजी – १६८

नेताजी – १६८

अमरीका के पर्ल हार्बर स्थित नौसैनिक़ी अड्डे को टहसनहस करके जापान के विश्‍वयुद्ध में उतर जाने से सुभाषबाबू को जल्द से जल्द ‘आज़ाद हिन्द सेना’ की स्थापना करने की ज़रूरत महसूस होने लगी और इस सेना के लिए मनुष्यबल को एकत्रित करने पर ध्यान देना उन्होंने तय किया। जर्मन फ़ौजों के कब्ज़े में आ चुकीं […]

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नेताजी-१६७

नेताजी-१६७

६ नवम्बर १९४१ की ‘आज़ाद हिन्द केन्द्र’ की मीटिंग में कई बातें तय की गयीं। ‘जय हिंद’ यह अभिवादन (‘सॅल्युटेशन’) तो पहले ही तय किया गया था। मुख्य रूप से, केन्द्र का नाम ‘आज़ाद हिन्द केन्द्र’, आकाशवाणी केन्द्र का नाम ‘आज़ाद हिन्द रेडिओ’ और भविष्य में गठित की जानेवाली सेना का नाम भी ‘आज़ाद हिन्द […]

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नेताजी-१६६

नेताजी-१६६

सुभाषबाबू द्वारा बुलायी गयी, बर्लिन स्थित भारतीयों की मीटिंग में ताईजी को देखकर उपस्थितों की जिज्ञासा अब चरमसीमा पर पहुँच चुकी थी कि ये ‘ओरलेन्दो मेझोता’ कौन हैं? इतने में मुकुंदलाल व्यासजी बाहर आये। कुछ लोग उन्हें भी जानते थे। पहले ताईजी और फिर ये व्यास….ज़रूर कोई न कोई बात है, यह सभी सोच रहे […]

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नेताजी- १६५

नेताजी- १६५

सुभाषबाबू का विदेश सचिव केपलर के साथ हुआ झगड़ा, यह हालाँकि कोई अच्छी घटना नहीं थी, लेकिन उसकी गूँजों ने तो थोड़ाबहुत अच्छा काम कर दिया। सुभाषबाबू बहुत ही नाराज़ हैं, इस बात को जानने के बाद रिबेनट्रॉप ने स्वयं इस मामले पर ध्यान देना शुरू किया। एक के बाद एक इस तरह ‘एस्प्लनेड’, ‘एक्सलसियर’, […]

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नेताजी-१६४

नेताजी-१६४

सुभाषबाबू बर्लिन लौटे, वह ग़ुस्से में ही। पहले ही २२ जून १९४१ को जर्मनी ने रशिया पर आक्रमण किया था, जिससे कि उनकी योजनाओं को मानो बारूद ही लग गया था। साथ ही, बर्लिन पहुँचते ही, मुसोलिनी मुझसे न मिलें इसलिए हिटलर द्वारा किये गये कारस्तानों की जानकारी भी उन्हें मिली। वे ख़ौलकर फौरन विदेश […]

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