नेताजी-१५७

नेताजी-१५७

सुभाषबाबू के बर्लिन आने के बाद उनकी ख़ातिरदारी करने की ज़िम्मेदारी जिन्हें सौंपी गयी थी, वे डॉ. धवन आगे चलकर अपने कामकाज़ में व्यस्त हो गये। सुभाषबाबू को भी अपने बढ़ते हुए काम का व्यवस्थापन करने के लिए किसी फुल-टाईम सहायक की ज़रूरत महसूस होने लगी थी और इस काम के लिए, जर्मनी में पढ़ […]

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नेताजी-१५६

नेताजी-१५६

हिटलर की ख़ास मर्ज़ी रहनेवाले उनके सहकर्मी विलियम केपलर के कहने पर सुभाषबाबू ने, जर्मन सरकार से उन्हें क्या अपेक्षाएँ हैं, इस विषय में एक १४-पन्नोंवाला निवेदन लिखित स्वरूप में उन्हें दिया। उसमें – ‘इस द्वितीय महायुद्ध में इंग्लैंड़ की निर्णायक हार होना, यह जर्मनी एवं भारत का समान उद्दिष्ट रहने के कारण इन दोनों […]

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नेताजी- १५५

नेताजी- १५५

पिछली द़फ़ा जब सुभाषबाबू बर्लिन आये थे, उस समय का बर्लिन और इस समय का बर्लिन इनके वातावरण में भी फ़र्क़ था। उस समय का, जीवन का आनन्द मनमुक्त रूप से लेनेवाले बर्लिन की जगह अब युद्ध की छाया से ग्रस्त और त्रस्त बर्लिन ने ले ली थी। अब सुभाषबाबू जहाँ भी देखते, उन्हें हिटलर […]

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नेताजी-१५४

नेताजी-१५४

सुभाषबाबू को मॉस्को से बर्लिन ले आनेवाले विशेष हवाई जहाज़ का इन्तज़ाम हो जाने के बाद ३ अप्रैल को सुभाषबाबू बर्लिन पहुँचे। तक़रीबन २ महीने ११ दिनों की भागदौड़ करके रोमहर्षक एवं हैरत अंगेज़ घटनाओं से भरा प्रवास करते हुए, आशा-निराशा का झूला झूलते हुए, एक दुर्दम्य लगन के बल पर और अपनी ध्येयपूर्ति के […]

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नेताजी-१५३

नेताजी-१५३

सुभाषबाबू को ले जानेवाली गाड़ी तेज़ी से दौड़ रही थी। अब हिन्दुकुश पर्वतपंक्तियाँ शुरू हो चुकी थीं। बीच में ही आड़े-टेढ़े मोड़ों सा रास्ता, बीच में ही मीलों दूर तक फ़ैले हुए पठारों में से गुज़रनेवाला सरहरा रास्ता ऐसे मार्ग से गाड़ी रशिया की सीमा की ओर दौड़ रही थी। सदियों से अफ़ग़ानिस्तान यह पूर्वीय […]

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नेताजी-१५२

नेताजी-१५२

उत्तमचन्द के परिवार को भावपूर्ण रूप से अलविदा कहकर सुभाषबाबू गाड़ी में बैठ गये। उस रात कारोनी ने सुभाषबाबू के क़रिबी लोगों के लिए एक छोटीसी दावत रखी थी। भगतराम तथा उत्तमचन्द भी उसमें शरीक रहनेवाले थे। इसलिए वे भी सुभाषबाबू के साथ गाड़ी में बैठ गये। खाने के बाद उत्तमचन्द कलेजे पर पत्थर रखकर […]

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नेताजी-१५१

नेताजी-१५१

कारोनी के साथ हुई मीटिंग के बाद वक़्त न गँवाते हुए सुभाषबाबू धीरे धीरे युरोप के वास्तव्य की तैयारियाँ कर ही रहे थे। जर्मन एम्बसी में जाने से पहले, शरदबाबू को देने के लिए अपनी खुद की बंगाली लिखावट में लिखी हुई चिठ्ठी और अपने सहकर्मी शार्दूल कवीश्‍वर इन्हें देने के लिए ‘फॉरवर्ड ब्लॉक’ के […]

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नेताजी-१५०

नेताजी-१५०

कारोनी के साथ सुभाषबाबू की चर्चा का़फ़ी हद तक सफ़ल हुई और सुभाषबाबू खुशी से उत्तमचन्द के घर लौट आये। अब उनके मन पर का बोझ का़फ़ी कम हो चुका था और वे युरोपीय भेस में काबूल में खरीदारी वगैरा के लिए घुम-फ़िरने भी लगे थे। कुछ भी नया सन्देश आनेपर, हर दो-तीन दिन बाद […]

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नेताजी- १४९

नेताजी- १४९

सुभाषबाबू के दिमाग में से साकार हो रही योजना को सुनते हुए कारोनी को तो वे रशियन राज्यक्रान्ति के प्रणेता रहनेवाले लेनिन के समान ही प्रतीत होने लगे थे। इस प्रचण्ड हिमालय जितने महत्कार्य को दुर्दम्य आत्मविश्‍वास के साथ एकाकी रूप में करने जा रहे इस आदमी को मुझसे जितनी हो सके उतनी सहायता मैं […]

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नेताजी-१४८

नेताजी-१४८

निर्धारित समय पर ठीक सात बजे सुभाषबाबू भगतराम के साथ इटालियन एम्बसी के दरवाज़े पर पहुँच गये। कारोनी का सेक्रेटरी आन्झालोती वहाँ पर उन्हीं की राह देख रहा था। वह उन्हें कारोनी के पास ले गया। सुभाषबाबू ने पहले भारतीय ढ़ंग से नमस्कार किया और फ़िर पश्चिमी स्टाईल में हार्दिकता से ‘शेकहँड’ किया! कारोनी उनकी […]

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