नेताजी-१९०

नेताजी-१९०

२३ अप्रैल को मादागास्कर के पास पहुँच चुकी सुभाषबाबू की पनडुबी ख़राब मौसम के कारण ख़ौलते हुए सागर का सामना करते करते २६ अप्रैल की शाम को, मादागास्कर की नैऋत्य दिशा में लगभग ४०० मील की दूरी पर नियोजित जगह पहुँच गयी। थोड़ी ही देर में, उनकी प्रतीक्षा कर रही जापानी पनडुबी भी पेरिस्कोप में […]

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नेताजी-१८९

नेताजी-१८९

आख़िर सुभाषबाबू का जर्मनी से पनडुबी का स़फर शुरू तो हो गया। पनडुबी में कदम रखने से पहले अबिद के दिल में पनडुबी के स़फर के प्रति महसूस हो रहा ‘थ्रिल’ पनडुबी की भीतरी अव्यवस्था को देखकर कुछ मुरझा सा गया था। लेकिन इस स़फर के महत्त्व को जानने के बाद उसका दिल फिर झूम […]

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नेताजी-१८८

नेताजी-१८८

आदिमाता चण्डिका का स्मरण करते हुए सुभाषबाबू ने अबिद के साथ कील बंदर पर स्थित पनडुबी में कदम रखा। वेर्नर म्युसेनबर्ग इस, पनडुबी के ज़िन्दादिल कॅप्टन ने उनका स्वागत किया। बाहर से चमकीली लम्बी सी मछली की तरह दिखायी दे रही पनडुबी में प्रवेश करते ही जो नज़ारा दिखायी दिया, उससे अबिद के उत्साह पर […]

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नेताजी-१८७

नेताजी-१८७

एमिली से भावपूर्ण विदा लेकर दिल पर पत्थर रखते हुए सुभाषबाबू ने घर के बाहर कदम रखा। बर्लिन से सुभाषबाबू को लेकर कील बंदरगाह की ओर जानेवाली रेलगाड़ी एक रात पहले ही कील पहुँच चुकी थी। उनके साथ केपलर, वेर्थ ये जर्मन दोस्त तथा नंबियारजी भी थे। अबिद को अलग से ही ठेंठ कील बंदरगाह […]

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नेताजी-१८६

नेताजी-१८६

८ फरवरी १९४३ यह सुभाषबाबू का पूर्व की ओर प्रस्थान करने का दिन जैसे जैसे क़रीब आने लगा, वैसे वैसे उनकी तैयारियाँ भी ज़ोर-शोर से शुरू हो गयीं। इसी दौरान २३ जनवरी को उनका जन्मदिन उनके दोस्तों ने उन्हीं के बंगले में सादगी से मनाया। पिछला जन्मदिन उन्होंने अ़ङ्गगानिस्तान में खच्चर और ट्रक की सवारी […]

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नेताजी-१८५

नेताजी-१८५

एमिली और अनिता के साथ सन १९४२ का ख्रिसमस व्यतीत करके सुभाषबाबू व्हिएन्ना से बर्लिन लौट आये। नन्हीं सी अनिता के साथ गुज़ारे हुए वे दिन तो सुभाषबाबू के छोटे से गृहस्थाश्रमी जीवन के सर्वोच्च आनन्द का एक हिस्सा थे। उसकी बाललीलाओं को निहारने में उनका वक़्त कैसे बीत जाता था, इसका उन्हें पता ही […]

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नेताजी- १८४

नेताजी- १८४

जापान ले जानेवाली पनडुबी का इन्तज़ार करते समय सुभाषबाबू हाथ पर हाथ धरे बैठे नहीं थे। अन्य मार्गों के बारे में जानकारी प्राप्त करने की उनकी कोशिशें जारी ही थीं। साथ ही, अनिश्चितता के ढलते हुए उस समय के साथ उनके मन में एमिली के बारे में फ़िक्र भी बढ़ ही रही थी। उसके प्रसूत […]

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नेताजी-१८३

नेताजी-१८३

विश्‍वयुद्ध के रंग हर घड़ी बदल रहे थे और उसके अनुसार सम्बन्धितों के पैंतरें भी। सुभाषबाबू वहाँ बर्लिन में, जर्मनी से जापान जाने के लिए पणडुबी की व्यवस्था कब होती है, इसके इन्तज़ार में थे और उसी समय भारत में कई घटनाएँ हो रही थीं। २७ अप्रैल को इलाहाबाद में हुई काँग्रेस कार्यकारिणी की बैठक […]

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नेताजी-१८२

नेताजी-१८२

हिटलर के साथ सुभाषबाबू की मीटिंग खत्म हो गयी। जर्मनी में कदम रखते समय हिटलर से उन्हें जो अपेक्षाएँ थीं, उनमें से कुछ पूरी हो चुकी थीं, तो कुछ अधूरी ही रह गयी थीं। अँग्रेज़ों की वहशी हुकूमत के ख़िला़फ़ हिटलर से सहायता माँगने जाते हुए, मैं एक तानाशाह की गुफ़ा में कदम रख रहा […]

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नेताजी- १८१

नेताजी- १८१

सुभाषबाबू की हिटलर के साथ हो रही बातचीत धीरे धीरे आगे बढ़ रही थी। लगभग तेरह महीनों के इन्तज़ार के बाद हुई इस प्रत्यक्ष मुलाक़ात में, वे हिटलर के साथ जो कुछ बात कर रहे थे, उन सभी मुद्दों में उनका पाला निराशा से ही पड़ रहा था। फिलहाल रुसी मुहिम में व्यस्त रहनेवाले हिटलर […]

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