कांगड़ा भाग-८

कांगड़ा भाग-८

हिमाचल की ज़मीन पर कदम रखनेवाले हर इन्सान का मन यहाँ की कुदरती सुन्दरता मोह ही लेती है। जहाँ देखे वहाँ रंगो की बहार। नीले आसमान के तले, सफ़ेद बर्फ़ का ताज पहने हुए पर्वत और हर पर्वत का अपना एक अलग रंग, पर्वतों के चारों ओर फैला हुआ हरा रंग और उस हरे रंग […]

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कांगड़ा भाग-७

कांगड़ा भाग-७

कांगड़ा की संस्कृति एवं कला पर एक नज़र डालने की बात हम गत लेख के अन्त में ही तय कर चुके हैं, लेकिन पहले कांगड़ा के दो महत्त्वपूर्ण मंदिरों के दर्शन करके फिर उस सफ़र पर चलते हैं। कांगड़ा के इला़के के अन्य दो महत्त्वपूर्ण मंदिर हैं – ‘बैजनाथ मंदिर’ और ‘चामुण्डा देवी का मंदिर’। […]

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कांगड़ा भाग-६

कांगड़ा भाग-६

पठाणकोट से छुटनेवाली छोटीसी टॉय ट्रेन हमें कुदरती ख़ूबसूरती की झलक दिखाते आगे ले जाती है। पठाणकोट से निकलनेवाली यह मीटरगेज पर से चलनेवाली छोटी सी ट्रेन हमें ठेंठ जोगिंदरनगर तक ले जाती है। यानि पंजाब प्रांत से शुरु हुआ हमारा सफ़र हिमाचल प्रदेश में जाकर ख़त्म होता है। कई छोटी बड़ी नदियों, खाइयों, गाँवों […]

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कांगड़ा भाग-५

कांगड़ा भाग-५

चारों ओर नज़र फेरने पर दिखायी देती हैं, ऊँचीं ऊँचीं पहाड़ियाँ और बर्फ़ से आच्छादित उनकी चोटियाँ, ख़ास कर सुबह तो इन चोटियों पर जमी हुई बर्फ़ साफ़ साफ़ दिखायी देती है। जिस तरह इन पहाड़ियों की चोटियों पर बर्फ़ रहती है, उसी तरह उनके बदन पर छायी हुई है, पेड़ पौधों की हरियाली। हिमालय […]

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कांगड़ा भाग-४

कांगड़ा भाग-४

कांगड़ा क़िले की सैर करके थके हुए पैरों को काफ़ी आराम दे चुके। अब बाकी का क़िला देखने के लिए निकल पड़ते है। पुराने ज़माने से यह क़िला आक्रमकों का सबसे पहला लक्ष रहा है और कांगड़ा का इतिहास इस बात का गवाह है। कांगड़ा के पूरे इतिहास में हमने इस क़िले पर हुए कई […]

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कांगड़ा भाग-३

कांगड़ा भाग-३

गाड़ी के मुड़कर आगे बढते ही, दूर से कुछ धुँधली सी दिखायी देनेवाली वह वास्तु अब साफ़ साफ़ दिखायी दे रही है। दूर दूर तक फैली हुई चहारदीवारी और कुछ ऊँची वास्तुएँ ये दो बातें हमें बड़ी ही आसानी से दिखायी दे रही हैं। गत लेख के अन्त में जैसा कहा था, वैसे हम अब […]

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कांगड़ा भाग-२

कांगड़ा भाग-२

कांगड़ा की कुदरती सुन्दरता आज भी सैलानियों के मन को मोह लेती है। लेकिन अतीत में एक दौर ऐसा भी गुज़रा है, जब विभिन्न शासकों को कांगड़ा के वैभव ने मोह लिया था। कांगड़ा के वैभव का यह आकर्षण इतना ज़बरदस्त था कि उस वजह से कांगड़ा प्रदेश को कई बार आक्रमणों के घाव भी […]

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कांगड़ा भाग-१

कांगड़ा भाग-१

अप्रैल-मई में प्राय: हम सब कुछ दिन आराम करने के लिए कहीं बाहरगाँव जाने की योजना बनाते हैं, तो कुछ लोग अपने गाँव जाते हैं। संक्षेप में, मई की छुट्टियाँ और मनचाहा सफ़र इनका अटूट रिश्ता प्राय: हमारे मन में रहता ही है। हमारे भारत में तो इतनी भौगोलिक विविधता है कि उत्तर दिशा में […]

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कोझिकोड भाग-५

कोझिकोड भाग-५

  सात वर्ष की आयु में कलरि में यानि कि ‘कलरिपयट्टु’ का प्रशिक्षण देनेवाली पाठशाला में दाखिल होनेवाला छात्र सबसे पहले दाहिना कदम भीतर रखकर प्रवेश करता था, ऐसा पढने में आता है। अब ज़ाहिर है कि वह छात्र कलरि में किसी पवित्र दिन या नये सत्र के आरम्भ में दाखिल होता था। कलरि में […]

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कोझिकोड भाग-४

कोझिकोड भाग-४

केरल की भूमि को कुदरत ने भरपूर सुन्दरता प्रदान की है। घने हरे जंगल और नीला जल इनका तो इस भूमि के साथ अटूट रिश्ता है। ऐसी इस केरल की भूमि में प्राचीन समय में कुछ ऐसी सांस्कृतिक धरोहरों का निर्माण हुआ कि आज वे सांस्कृतिक धरोहरें सारे भारतवर्ष का गौरवस्थान बन गयी हैं। इनमें […]

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