श्रीनगर भाग-७

श्रीनगर भाग-७

गत कईं ह़फ़्तों से हम श्रीनगर की सैर कर रहे हैं। अब श्रीनगर से इतना लगाव हो चुका है कि यहाँ से लौटने का मन ही नहीं करता। लेकिन कभी न कभी तो अलविदा कहने की घड़ी आने ही वाली है। उससे पहले हम श्रीनगर के आसपास के कुछ खूबसूरत स्थलों की भी सैर करते […]

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श्रीनगर भाग-६

श्रीनगर  भाग-६

श्रीनगर की पहाड़ियों की चोटियों पर जब सूरज की सुनहरी किरनें खेलने लग जाती हैं, तब धीरे धीरे श्रीनगर पुन: अपनी दैनिक गतिविधियाँ शुरू करता है। हमारे भारतवर्ष के हर एक प्रान्त की अपनी एक अलग पहचान है और श्रीनगर भी इससे अछूता नहीं है। प्रत्येक प्रान्त की भौगोलिक स्थिति के अनुसार वहाँ के लोगों […]

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श्रीनगर भाग-५

श्रीनगर भाग-५

बेजोड़ खूबसूरती की मिसाल रहनेवाले मुग़ल गार्डन्स को देखते देखते थक चुके पैरों को थोड़ा सा आराम अवश्य मिला होगा। तो आइए, अब आगे बढ़ते हैं, हमारे श्रीनगर के इस सफ़र में। ‘शालिमार’ और ‘निशात’ इन दो प्रमुख मुग़ल गार्डन्स को देखने के बाद अब इसी शृंखला के तीसरे बग़ीचे में चलते हैं। यह बग़ीचा […]

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श्रीनगर भाग-४

श्रीनगर भाग-४

से तो हर एक ऋतु में श्रीनगर का रूप अपने आप में कुछ अनोखा सा ही होता है। मग़र फिर भी सबसे सुन्दर होता है, यहाँ का वसंत ॠतु! क्योंकि ऋतुराज वसंत के आगमन के साथ यहाँ की सृष्टी नयी नवेली दुलहन की तरह सजती है। बहार के आ जाते ही यहाँ की हर एक […]

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श्रीनगर भाग-३

श्रीनगर भाग-३

दल सरोवर के जल पर जब उगते हुए सूरज की स्वर्णिम किरनें अपनी प्रभा बिखेर देती हैं, तब धीरे धीरे दल के साथ साथ श्रीनगर भी जागने लगता है। दल सरोवर की हाऊसबोट में रुके सैलानियों के लिए इस नज़ारे को देखना यह एक अविस्मरणीय बात होती है। संपूर्ण श्रीनगर की सैर करने के लिए […]

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श्रीनगर भाग-२

श्रीनगर भाग-२

हर साल हमारे देश में वसंतपंचमी का त्योहार मनाया जाता है। वसंत ऋतु के आगमन के साथ साथ श्रीनगर में शुरू हो जाता है, अनोखे रंगों और गन्धों का एक महोत्सव! बढ़ते हुए तपमान के साथ साथ पर्वतों की चोटियों पर जमी बरफ़ पिघलने लगेगी, कोहरा भी घटता जायेगा और श्रीनगर की बरफ़ की चादर […]

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श्रीनगर भाग-१

श्रीनगर भाग-१

पहाड़ों की बरफ़ीली चोटियाँ जहाँ काफ़ी दूर से भी आसानी से दिखायी देती हैं, हमेशा की तरह ही झेलम अपनी ऱफ्तार से और अपनी ही धुन में जहाँ बहती रहती है। उस जगह का नाम है, श्रीनगर। वैसे देखा जाये तो कई सदियों से झेलम बह रही है। श्रीनगर उसके दोनो किनारों पर बस गया […]

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तिरुपति भाग-३

तिरुपति भाग-३

तिरुचानूर में देवी पद्मावती के दर्शन कर अब हम चले हैं, भगवान व्यंकटेशजी के दर्शन करने। देखिए! बातों बातों में हम सप्तगिरि पर्वत चढ़कर मंदिर के महाद्वार तक आ भी गये। आइए, मंदिर की वास्तुरचना को देखते देखते आगे बढ़ते हैं। आप तिरुपतिजी के मंदिर में कभी भी आइए, भाविकों की लंबी कतारें आपको यहाँ […]

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तिरुपति भाग-२

तिरुपति भाग-२

उत्तिष्ठ उत्तिष्ठ गोविन्द उत्तिष्ठ गरुडध्वज। उत्तिष्ठ कमलाकान्त त्रैलोक्यं मफलं कुरु॥ ‘सुप्रभातम्’ इस स्तोत्र के साथ प्रात: भगवान व्यंकटेश को जगाते हैं और यहीं से सप्तगिरि की दिनचर्या शुरू होती है। प्रात:समय से ही तिरुपतिजी के दर्शन करने के लिए भाविकों की भीड़ उमड़ पड़ती है और जैसे जैसे दिन आगे बढ़ते रहता है, वैसे वैसे […]

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तिरुपति भाग-१

तिरुपति भाग-१

श्रीवेंकटाद्रिश्रृंगाय मंगलाभरणांघ्रये। मंगलानां निवासाय श्रीनिवासाय मंगलम्॥ रास्ते से गुज़रते हुए कहीं से ‘व्यमटेशमंगल स्तोत्र’ (व्यंकटेशमंगल स्तोत्र) की यह पंक्ति सुनायी दी और सप्तगिरिनिवासी भगवान व्यंकटेश का स्मरण हुआ। ‘व्यंकटेशजी’ यानि कि ‘तिरुपति’ बसे हैं, एक पर्वत पर। व्यंकटेश का यह मंदिरस्थल और पर्वत की तलहटी स्थित गाँव इन दोनों को एकत्रित रूप में ‘तिरुपति’ कहा […]

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