तिरुचिरापल्ली भाग-५

तिरुचिरापल्ली भाग-५

जिस गर्भगृह में शेषशायी भगवान विष्णु यानि ‘श्रीरंगनाथजी’ विराजमान हैं, उसका विमान स्वर्ण से बना हुआ है। श्रीरंगनाथजी के गर्भगृह के बारे में यह भी कहा जाता है कि इसका स्वर्ण से बना विमान यह ॐकार का प्रतीक है। इस विमान पर जो चार कलश हैं, वे चार वेदों के प्रतीक हैं और मंदिर के […]

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तिरुचिरापल्ली भाग-४

तिरुचिरापल्ली भाग-४

‘श्रीरंगम्’ द्वीप पर ही बसने का तय कर चुके महाविष्णु यहाँ शेषशायी स्वरूप में विराजमान हुए और उसके बाद श्रीरंगनाथजी का मंदिर साकार हुआ और उसका विस्तार होता ही रहा। यहाँ के सात प्राकार (चहारदीवारी) और उनमें से सबसे भीतरी सातवें प्राकार में बसा यह श्रीरंगनाथजी का मंदिर, इन सब का निर्माण एक रात में […]

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तिरुचिरापल्ली भाग-३

तिरुचिरापल्ली भाग-३

‘रॉक फोर्ट’ के माथे पर से दूर दिखायी देनेवाले ‘श्रीरंगम्’ के गोपुर हमें बुला रहे हैं। आइए, तो चलते हैं ‘श्रीरंगम्’ और इस सफ़र में ही हम ‘श्रीरंगम्’ की जानकारी प्राप्त करेंगें। ‘श्रीरंगम्’ यह एक छोटा सा द्वीप है। आज के तिरुचिरापल्ली का वह एक हिस्सा बन गया है। त्रिचि शहर से यानि तिरुचिरापल्ली शहर […]

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तिरुचिरापल्ली भाग-२

तिरुचिरापल्ली भाग-२

तिरुचिरापल्ली के इतिहास तथा वर्तमान में ‘रॉक फोर्ट’ का अपना एक महत्त्वपूर्ण स्थान है। रॉक फोर्ट की उम्र कई करोड़ों वर्षों की है, ऐसा कहा जाता है। इसीलिए त्रिची की इस भूमि का रॉक फोर्ट यह एक अभिन्न हिस्सा ही है। चलिए, तो इसी रॉक फोर्ट के साथ त्रिची के इतिहास के सफ़र को जारी […]

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तिरुचिरापल्ली भाग-१

तिरुचिरापल्ली भाग-१

गाँव हो या शहर, वहाँ लोग और विभिन्न वास्तुएँ रहती ही हैं। लेकिन कुछ शहरों या गाँवों को उनकी अपनी एक ख़ास पहचान देनेवाली कुछ विशेषताएँ होती हैं। ये विशेषताएँ उन गाँवों या शहरों के साथ जन्म लेती हैं या कभी उसके बाद भी; लेकिन ये विशेषताएँ उन गाँवों या शहरों के साथ उनके भूतकाल […]

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मथुरा भाग-६

मथुरा भाग-६

शरद ऋतु की पूनम की चाँदनी रात। पूर्णिमा के कारण चन्द्रबिंब भी पूर्ण है, सुहानी चाँदनी से मन प्रफुल्लित है, यमुना अपनी ही मस्ती में बह रही है। ऐसे में अचानक कहीं से मुरली की धुन से माहौल सुनहरा हो जाता है और उस अभिमन्त्रित वातावरण में श्रीकृष्ण और गोपिकाओं का रासनृत्य शुरु हो जाता […]

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मथुरा भाग-५

मथुरा भाग-५

धुआँधार बारिश हो रही थी। मानों जैसे उसने न रुकने का प्रण ही कर लिया हो! एक-दो नहीं, बल्कि कुल सात दिन तक वहाँ लगातार बारिश हो रही थी। मग़र फिर भी गोकुलवासी, उनकी गौएँ तथा अन्य सभी मवेशी आदि सुरक्षित थे। क्योंकि वे श्रीकृष्ण की छत्रछाया में थे और उनके सिर पर छत्र था […]

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मथुरा भाग-४

मथुरा भाग-४

श्रीकृष्ण! परमात्मा का भारतभूमि में हुआ एक मानवीय अवतार! कालियामर्दन करनेवाले गोपालकृष्ण, गोपसखाओं के साथ खेलनेवाले बालकृष्ण, कंसमर्दन करनेवाले श्रीकृष्ण, रुक्मिणीहरण करनेवाले श्रीकृष्ण, बुद्धिमान, राजनीतिज्ञ श्रीकृष्ण, महायोद्धा श्रीकृष्ण, रणभूमि में पार्थ से भगवद्गीता कहनेवाले श्रीकृष्ण इस तरह कई रूपों में श्रीकृष्ण भक्तविश्‍व को मोहित करते हैं। मथुरा तथा उसके आसपास के इलाके में हज़ारों वर्षों […]

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मथुरा भाग-३

मथुरा भाग-३

श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारि। हे नाथ नारायण वासुदेव॥ कृष्णभक्ति के रंग में रंगी मथुरा का सफ़र हमने बस शुरू ही किया था कि कृष्णजन्माष्टमी आ गयी। हज़ारों वर्ष पूर्व परमात्मा ने इसी मथुरा नगरी में ‘श्रीकृष्ण’ नाम धारण करके जन्म लिया था। मथुरा में कृष्णजन्माष्टमी का उत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। आइए, तो फिर […]

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मथुरा भाग-२

मथुरा भाग-२

मानवजीवन में संघर्ष हमेशा ही अटल रहा है। मानव जब आदिम काल में जी रहा था, तब भी जीवन की दैनिक ज़रूरतों को पूरा करने के लिए तथा स्वयं के अस्तित्व को बचाने के लिए उसे संघर्ष तो करना ही पड़ता था। समय की धारा में आगे बढ़ते हुए वह सभ्यता और नागरी जीवन जीने […]

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