कोझिकोड भाग-४

कोझिकोड भाग-४

केरल की भूमि को कुदरत ने भरपूर सुन्दरता प्रदान की है। घने हरे जंगल और नीला जल इनका तो इस भूमि के साथ अटूट रिश्ता है। ऐसी इस केरल की भूमि में प्राचीन समय में कुछ ऐसी सांस्कृतिक धरोहरों का निर्माण हुआ कि आज वे सांस्कृतिक धरोहरें सारे भारतवर्ष का गौरवस्थान बन गयी हैं। इनमें […]

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कोझिकोड भाग-३

कोझिकोड भाग-३

‘व्यापारीयों की लगातार हो रही आवाजाही, माल ले आने-जानेवालें देश-विदेशों के कई जहाज़’ ऐसा ही कुछ स्वरूप था, पुराने कोझिकोड का यानि कोळिकोड या कालिकत का। समय के साथ साथ कोझिकोड का चेहरा भी बदलने लगा और आज का कालिकत आधुनिक युग के स्पर्श से भी अछूता नहीं रहा। आज यह बंदरगाह एक शहर के […]

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कोझिकोड भाग-२

कोझिकोड भाग-२

कोझिकोड-कोळिकोड-कालिकत यह शहर दर असल एक ‘बंदरगाह’ के रूप में कई सदियों से विकसित होता रहा। बंदरगाह होने के कारण यहाँपर ज़ाहिर है कि व्यापारियों की निरन्तर आवाजाही लगी रहती थी। फिर व्यापार करने आये लोगों के मन में यहाँ राज करने का यानि इस प्रदेश पर कब्ज़ा करने का लालच पनपने लगा और अपने […]

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कोझिकोड भाग-१

कोझिकोड भाग-१

मलयाळम् भाषा सीखते हुए कई विशेषतापूर्ण बातें समझ में आ रही थीं, ख़ास कर उस भाषा के शब्दों का उच्चारण। अब यही देखिए ना, हम जिस ‘कोझिकोड’ नाम के केरल राज्य स्थित शहर की ओर प्रस्थान कर रहे हैं, उस शहर को ‘कोळिकोड’ इस नाम से जाना जाता है। यानि ‘कोझिकोड’ और ‘कोळिकोड’ ये दोनों […]

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सावन्तवाडी भाग-५

सावन्तवाडी भाग-५

सिन्धुदुर्ग की सैर करते हुए हम सिन्धुदुर्ग की कई बातों को देख चुके हैं, जिनमें कुछ कुदरती करिश्में भी शामिल थे। अब एक महत्त्वपूर्ण बात देखते हैं। लेकिन उसे देखना यहँ कहने से उसके बारे में जानकारी हासिल करना यह कहना मुनासिब है। क्योंकि यह करना ही आसान हैं। सिन्धुदुर्ग में महादेवजी का एक मन्दिर […]

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सावन्तवाडी भाग-४

सावन्तवाडी भाग-४

मालवण के किनारे पर हम जिसकी प्रतीक्षा कर रहे थे, वह बोट हमें समुद्र में दिखायी दे रही ‘उस’ वास्तु की ओर ले जाने के लिए तैयार है। चलिए, तो फिर अब और देर न लगाते हुए बोट में सवार हो जाते हैं। सागरी जल को चीरते हुए, सप् सप् आवाज़ करते हुए तेज़ी से […]

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सावन्तवाडी भाग-३

सावन्तवाडी भाग-३

सावन्तवाडी से चंद कुछ ही किलोमीटर्स की दूरी पर हमारी मुलाक़ात होती है, साफ़ सुथरे सागरकिनारे से। नीला गहरा सागर, स़फेद रेत, मनचाही शान्तिके साथ ही यहाँ के कई किनारों पर सरो के पेड़ों के बन भी है। यह इलाक़ा किसी चित्र में दिखायी देनेवाले नज़ारे जैसा ख़ूबसूरत दिखायी देता है। इसी सावन्तवाडी से दूसरे […]

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सावन्तवाडी भाग-२

सावन्तवाडी भाग-२

बहुत ही आह्लाददायक तरोताज़ा आबोहवा, मन को सुकून दिलानेवाली शान्ति, चारों ओर दिखायी देनेवाली हरियाली, बीच बीच में दिखायी देनेवाले खपरैले घर, गले में बँधी हुई घण्टा की मधुर ध्वनि के साथ बैलगाड़ी खींचनेवाले बैल इस तरह सफ़र करते हुए पिछले ह़फ़्ते ही हम कुदरती सुन्दरता से परिपूर्ण रहनेवाले सावन्तवाडी में दाखिल हो चुके हैं। […]

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सावन्तवाडी भाग-१

सावन्तवाडी भाग-१

बचपन में मई की छुट्टियों में हमारी स्कूल के अधिकतर छात्र अपने गाँव जाते थे। उनमें भी कोकण जानेवाले छात्रों की संख्या अधिक रहती थी और वैसे भी कोकण से तो मेरा परिचय पहले से ही था। कोकण कहते ही आज भी याद आती है, लाल मिट्टी उड़ाते हुए जा रही एस्. टी. की लाल-पीले […]

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दिल्ली भाग-९

दिल्ली भाग-९

खिलौने, हर मानव के बचपन का एक अविभाज्य अंग। हर एक मनुष्य के बचपन का एक कोना तरह तरह के खिलौनों की यादों से भरा रहता है। उसमें भी लड़कों और लड़कियों के खिलौने अलग अलग रहते हैं और लड़कियाँ फिर चाहे वे किसी भी देश की, कोई भी भाषा बोलनेवाली हों; लेकिन उनके पास […]

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