मथुरा भाग-६

मथुरा भाग-६

शरद ऋतु की पूनम की चाँदनी रात। पूर्णिमा के कारण चन्द्रबिंब भी पूर्ण है, सुहानी चाँदनी से मन प्रफुल्लित है, यमुना अपनी ही मस्ती में बह रही है। ऐसे में अचानक कहीं से मुरली की धुन से माहौल सुनहरा हो जाता है और उस अभिमन्त्रित वातावरण में श्रीकृष्ण और गोपिकाओं का रासनृत्य शुरु हो जाता […]

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मथुरा भाग-५

मथुरा भाग-५

धुआँधार बारिश हो रही थी। मानों जैसे उसने न रुकने का प्रण ही कर लिया हो! एक-दो नहीं, बल्कि कुल सात दिन तक वहाँ लगातार बारिश हो रही थी। मग़र फिर भी गोकुलवासी, उनकी गौएँ तथा अन्य सभी मवेशी आदि सुरक्षित थे। क्योंकि वे श्रीकृष्ण की छत्रछाया में थे और उनके सिर पर छत्र था […]

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मथुरा भाग-४

मथुरा भाग-४

श्रीकृष्ण! परमात्मा का भारतभूमि में हुआ एक मानवीय अवतार! कालियामर्दन करनेवाले गोपालकृष्ण, गोपसखाओं के साथ खेलनेवाले बालकृष्ण, कंसमर्दन करनेवाले श्रीकृष्ण, रुक्मिणीहरण करनेवाले श्रीकृष्ण, बुद्धिमान, राजनीतिज्ञ श्रीकृष्ण, महायोद्धा श्रीकृष्ण, रणभूमि में पार्थ से भगवद्गीता कहनेवाले श्रीकृष्ण इस तरह कई रूपों में श्रीकृष्ण भक्तविश्‍व को मोहित करते हैं। मथुरा तथा उसके आसपास के इलाके में हज़ारों वर्षों […]

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मथुरा भाग-३

मथुरा भाग-३

श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारि। हे नाथ नारायण वासुदेव॥ कृष्णभक्ति के रंग में रंगी मथुरा का सफ़र हमने बस शुरू ही किया था कि कृष्णजन्माष्टमी आ गयी। हज़ारों वर्ष पूर्व परमात्मा ने इसी मथुरा नगरी में ‘श्रीकृष्ण’ नाम धारण करके जन्म लिया था। मथुरा में कृष्णजन्माष्टमी का उत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। आइए, तो फिर […]

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मथुरा भाग-२

मथुरा भाग-२

मानवजीवन में संघर्ष हमेशा ही अटल रहा है। मानव जब आदिम काल में जी रहा था, तब भी जीवन की दैनिक ज़रूरतों को पूरा करने के लिए तथा स्वयं के अस्तित्व को बचाने के लिए उसे संघर्ष तो करना ही पड़ता था। समय की धारा में आगे बढ़ते हुए वह सभ्यता और नागरी जीवन जीने […]

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मथुरा भाग-१

मथुरा भाग-१

बचपन में नानी से सुनी कहानियों में परमात्मा के श्रीराम और श्रीकृष्ण इन अवतारों की ढ़ेर सारी कहानियाँ सुनी थीं। श्रीराम के साथ अयोध्या का और श्रीकृष्ण के साथ गोकुल, मथुरा और वृंदावन इनका उल्लेख रहता ही था। श्रीकृष्ण की कथाओं में मथुरा का उल्लेख पहले आता था; क्योंकि वह था श्रीकृष्ण का जन्मस्थान। बाद […]

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जुनागढ़ भाग-८

जुनागढ़ भाग-८

सोमनाथ के दर्शन करके फिर जुनागढ़ लौटते हुए रास्ते में दो महत्त्वपूर्ण स्थानों के दर्शन करना ज़रूरी है। ये दोनों स्थान जुड़े हुए हैं, भगवान श्रीकृष्ण के साथ। दर असल ये दोनों स्थान भगवान श्रीकृष्ण की अवतार समाप्त करने की लीला के साथ जुड़े हुए हैं। महाभारत के युद्ध की समाप्ति के बाद भगवान श्रीकृष्ण […]

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जुनागढ़ भाग-७

जुनागढ़ भाग-७

सोमनाथ के अतीत का गवाह है, सोमनाथ मंदिर के सामने फैला हुआ अथाह सागर। हर बार उसने सोमनाथ मंदिर के पतन एवं पुनर्निर्माण को देखा है और ऐसा सात बार हुआ है। कहा जाता है कि सोमनाथ मन्दिर के सामने का यह समुद्र ठेंठ अंटार्क्टिका तक फैला हुआ है। यानि सोमनाथ का समुद्री तट और […]

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जुनागढ़ भाग-६

जुनागढ़ भाग-६

आज हम जिस सोमनाथ मंदिर के दर्शन करते हैं, वह सातवीं बार बनाया गया मन्दिर है। ऐसा कहा जाता है यानि पुराण कहते हैं कि चंद्र (चाँद) ने यहाँ पर सर्वप्रथम स्वर्ण से बने सोमनाथ मंदिर का निर्माण किया था। रामायण के कालखंड में यहाँ पर चाँदी से बने मंदिर का निर्माण किया गया। श्रीकृष्ण […]

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जुनागढ़ भाग-५

जुनागढ़ भाग-५

एक बहुत ही सुन्दर मराठी गीत है – ‘जिथे सागरा धरणी मिळते। तिथे तुझी मी वाट पहाते।’ (जहाँ सागर और धरती का मिलन होता है, वहाँ (सागरकिनारे मैं तुमसे मिलने के लिए) तुम्हारी राह देख रही हूँ।) हमारे देश को विशाल सागरतीर प्राप्त हुआ है और इसीलिए भारत में सागर और धरती के मिलने के […]

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