कोल्हापुर भाग-५

कोल्हापुर भाग-५

ऐसी प्रख्यात पंचगंगा। आली कृष्णेचिया संगा। प्रयागाहुनि असे चांगा। संगमस्थान मनोहर॥ श्रीगुरुचरित्र के १८ वें अध्याय मे वर्णित पंचगंगा-कृष्णा संगम का यह मनोहर स्थान कोल्हापुर शहर से महज़ एक घंटे की दूरी पर है। यह पवित्र क्षेत्र ‘नरसोबाची वाडी’ इस नाम से जाना जाता है। सद्गुरु श्रीदत्तात्रेय के अवतार के रूप में जाने जानेवाले ‘श्रीनरसिंहसरस्वती’जी […]

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कोल्हापुर भाग-४

कोल्हापुर भाग-४

कोल्हापुर जानेवाले यात्री जिस तरह महालक्ष्मी के दर्शन अवश्य करते ही हैं, उसी तरह रंकाळा झील की सैर भी करते ही हैं। पुराने समय में कोल्हापुर में कईं छोटी बड़ी झीलें थीं; लेकिन समय के साथ साथ उनमें से कुछ झीलों का अस्तित्व मिट गया, वहीं कुछ अब भी अस्तित्व में हैं। झील कहते ही […]

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कोल्हापुर भाग-३

कोल्हापुर भाग-३

छत्रपति शिवाजी महाराज के वास्तव्य से पावन हुआ पन्हाळगढ़! कहा जाता है कि शिवाजी महाराज का इस गढ़ पर सब से अधिक अवधि तक वास्तव्य रहा है। सिद्दी जोहर को चकमा देकर शिवाजी महाराज विशाळगढ़ गये और उसके बाद पन्हाळगढ़ पर दुश्मन ने कब्ज़ा कर लिया। उसके कुछ समय पश्‍चात् शिवाजी महाराज ने पन्हाळगढ़ को […]

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कोल्हापुर भाग-२

कोल्हापुर भाग-२

कोल्हापुर में यानि कि करवीर क्षेत्र में भाविकों का श्रद्धास्थान रहनेवालीं जगज्जननी ही महालक्ष्मी अर्थात् अंबाबाई इन नामों के साथ प्रतिष्ठित हैं। महालक्ष्मी के इस मंदिर का निर्माण ‘कर्णदेव’ नाम के किसी सुभेदार ने ७वीं या ८वीं शताब्दी में हेमाडपंतीय रचनाशैली द्वारा किया था, ऐसा कहा जाता है। आगे चलकर कोल्हापुर पर जब शिलाहारों का […]

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कोल्हापुर भाग-१

कोल्हापुर भाग-१

जब गरमी काफ़ी बढ़ने लगती है, तब मुंबई में रास्ते से गुजरते हुए गन्ने का रस बेचनेवाली दुकानों के अस्तित्व का एहसास होता है। दर असल ये दुकानें साल भर वहीं पर रहती हैं; लेकिन माथे पर सूर्यभगवान जब तेज़ अग्निज्वालाओं को प्रक्षेपित करने लगते हैं, तब हमें इन दुकानों का एहसास होने लगता है। […]

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कोची भाग-४

कोची भाग-४

वाद्यों के सूर गूँज रहे हैं। श्रीराम-रावण के बीच के युद्ध की अब फ़ैसले की घड़ी क़रीब आ चुकी है। सारे दर्शक उस दृश्य को देखने में मग्न हो चुके हैं। कोई भी किसी के साथ बात नहीं कर रहा है। रंगमंच पर नृत्य करनेवाले नर्तक भी संवाद नहीं कह रहे हैं। यह सुनकर आप […]

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कोची भाग -३

कोची भाग -३

सूरज के उगते ही फ़ोर्ट कोची के किनारे पर चहलपहल शुरू हो जाती है। नये दिन की शुरुआत के साथ ही नये उत्साह के साथ फ़िशिंग नेट्स् समुद्र में डाले जाते हैं और मत्स्यप्रेमियों के आहार को उनतक पहुँचाया जाता है। १४वीं सदी में बाँधीं गयी ये फ़िशिंग नेट्स् आज भी अच्छी स्थिति में काम […]

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कोची भाग-२

कोची भाग-२

कोची की यानि कि कोचीन की सरज़मीन पर सुव्यवस्थित रूप से अपने हाथ पैर फैलानेवाले पुर्तग़ालियों ने धीरे धीरे कोची की हुकूमत पर कब्ज़ा करना शुरू किया। वैसे कोची का राजवंश सत्ता की बाग़डोर सँभाल तो रहा था; लेकिन असल में सत्ता का सूत्र तो पुर्तग़ालियों के हाथ में था। कोची के शासकों के साथ […]

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कोची भाग-१

कोची भाग-१

दुनिया में भारतवर्ष की अपनी कुछ विशेषताएँ हैं। उनमें से एक है, मसालें, जिनमें काली मिर्च, लौंग, दालचिनी, तेजपात आदि का समावेश होता है। हमारे प्रतिदिन के भोजन में इनमें से किसी न किसी पदार्थ का इस्तेमाल हम मसाले के रूप में करते ही हैं। पुराने समय से भारतीय इनका उपयोग कर रहे हैं। मसालों […]

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श्रीनगर भाग-७

श्रीनगर भाग-७

गत कईं ह़फ़्तों से हम श्रीनगर की सैर कर रहे हैं। अब श्रीनगर से इतना लगाव हो चुका है कि यहाँ से लौटने का मन ही नहीं करता। लेकिन कभी न कभी तो अलविदा कहने की घड़ी आने ही वाली है। उससे पहले हम श्रीनगर के आसपास के कुछ खूबसूरत स्थलों की भी सैर करते […]

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