परमहंस-१३४

परमहंस-१३४

ऐसे कई हफ़्तें बीत गये, लेकिन रामकृष्णजी की बीमारी कम हो ही नहीं रही थी। लेकिन इस व्याधि से जर्जर हो चुके होने के बावजूद भी रामकृष्णजी का मन आनन्दमय ही था। मुख्य बात, अब वे अधिक ही तेजःपुंज दिखायी देने लगे थे। उनकी कांति अधिक से अधिक प्रकाशमान् होती चली जा रही है, ऐसा […]

Read More »

नेताजी-१९०

नेताजी-१९०

२३ अप्रैल को मादागास्कर के पास पहुँच चुकी सुभाषबाबू की पनडुबी ख़राब मौसम के कारण ख़ौलते हुए सागर का सामना करते करते २६ अप्रैल की शाम को, मादागास्कर की नैऋत्य दिशा में लगभग ४०० मील की दूरी पर नियोजित जगह पहुँच गयी। थोड़ी ही देर में, उनकी प्रतीक्षा कर रही जापानी पनडुबी भी पेरिस्कोप में […]

Read More »

परमहंस-१३३

परमहंस-१३३

इसी बीच दुर्गापूजा उत्सव नज़दीक आया। वैसे तो यह उत्सव यानी दक्षिणेश्‍वर में रामकृष्णजी के शिष्यों के लिए मंगल पर्व ही होता था। क्योंकि यह देवीमाता का उत्सव होने के कारण रामकृष्णजी भी उसमें दिल से सम्मिलित होते थे। इस उत्सव के उपलक्ष्य में जो सत्संग होता था, उसके दौरान रामकृष्ण भावसमाधि को प्राप्त होने […]

Read More »

क्रान्तिगाथा-८२

क्रान्तिगाथा-८२

‘झंड़ा सत्याग्रह’ यानी ‘फ्लॅग मार्च’ यह अँग्रेज़ों का विरोध करने की एक अनोखी कोशिश थी। १९२३ में नागपुर और जबलपुर में प्रमुख रूप से एवं सेंट्रल प्रोव्हिन्स में कुछ स्थानों पर इस झंड़ा सत्याग्रह का आयोजन किया गया था। झंड़ा सत्याग्रहियों के द्वारा फिर जगह जगह भारत का ध्वज लहराने की कोशिशें की गयी। यहाँ […]

Read More »

नेताजी-१८९

नेताजी-१८९

आख़िर सुभाषबाबू का जर्मनी से पनडुबी का स़फर शुरू तो हो गया। पनडुबी में कदम रखने से पहले अबिद के दिल में पनडुबी के स़फर के प्रति महसूस हो रहा ‘थ्रिल’ पनडुबी की भीतरी अव्यवस्था को देखकर कुछ मुरझा सा गया था। लेकिन इस स़फर के महत्त्व को जानने के बाद उसका दिल फिर झूम […]

Read More »

परमहंस-१३२

परमहंस-१३२

श्यामापुकूर में अब रामकृष्णजी के रहने का तथा सेवाशुश्रुषा का प्रबंध अब सुचारू रूप से हो गया था और चूँकि शारदादेवी भी वहाँ रहने के लिए आयी थीं, परहेज़ के खाने की समस्या भी हल हो गयी थी। लेकिन रामकृष्णजी की बीमारी सुधरने का नाम ही नहीं ले रही थी। पैसों का भी सवाल था। […]

Read More »

नेताजी-१८८

नेताजी-१८८

आदिमाता चण्डिका का स्मरण करते हुए सुभाषबाबू ने अबिद के साथ कील बंदर पर स्थित पनडुबी में कदम रखा। वेर्नर म्युसेनबर्ग इस, पनडुबी के ज़िन्दादिल कॅप्टन ने उनका स्वागत किया। बाहर से चमकीली लम्बी सी मछली की तरह दिखायी दे रही पनडुबी में प्रवेश करते ही जो नज़ारा दिखायी दिया, उससे अबिद के उत्साह पर […]

Read More »

परमहंस-१३१

परमहंस-१३१

कोलकाता के श्यामापुकुर स्ट्रीट स्थित मक़ान में रामकृष्णजी निवास के लिए आये थे। नीचली मंज़िल पर एक बड़ा दीवानखाना और एक मध्यम आकार का कमरा और ऊपरि मंज़िल पर दो एकदम छोटे कमरें, ऐसा इस जगह का स्वरूप था। नीचली मंज़िल पर के उस मध्यम आकार के कमरे को रामकृष्णजी निवासस्थान के रूप में इस्तेमाल […]

Read More »

क्रान्तिगाथा-८१

क्रान्तिगाथा-८१

दिसंबर १९२५ की सुबह लाहोर से चलनेवाली एक ट्रेन में एक पुरुष एक स्त्री और एक छोटा बच्चा इस तरह एक परिवार चढ़ गया और उनका नौकर भी तीसरी क्षेणी के रेल डिब्बे में चढ़ गया। कुछ विशिष्ट स्टेशनों में गाड़ी बदली करते हुए यह परिवार हावड़ा पहुँच गया। लेकिन उनका नौकर पहले ही, बनारस […]

Read More »

नेताजी-१८७

नेताजी-१८७

एमिली से भावपूर्ण विदा लेकर दिल पर पत्थर रखते हुए सुभाषबाबू ने घर के बाहर कदम रखा। बर्लिन से सुभाषबाबू को लेकर कील बंदरगाह की ओर जानेवाली रेलगाड़ी एक रात पहले ही कील पहुँच चुकी थी। उनके साथ केपलर, वेर्थ ये जर्मन दोस्त तथा नंबियारजी भी थे। अबिद को अलग से ही ठेंठ कील बंदरगाह […]

Read More »
1 2 3 52