परमहंस-१२६

परमहंस-१२६

रामकृष्णजी द्वारा दक्षिणेश्‍वर से शुरू किया गया भक्तिप्रसार का कार्य अब तेज़ रफ़्तार से आगे बढ़ रहा था। रामकृष्णजी ने चुने हुए संन्यस्त भक्तों का पहला समूह रामकृष्णजी की सीख को भक्तों तक पहुँचाने का काम जोशपूर्वक कर रहा था और उस माध्यम से वृद्धिंगत होते जा रहा ‘रामकृष्ण-संप्रदाय’ अब सुचारू आकार धारण कर रहा […]

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परमहंस-१२५

परमहंस-१२५

रामकृष्णजी की स्त्रीभक्त अब रामकृष्णजी ने गोपालर माँ को धीरे धीरे शारदादेवी की सेवा में भी प्रविष्ट कर दिया। दक्षिणेश्‍वर आने पर, रामकृष्णजी के दर्शन करने के बाद शारदादेवी के कमरे में जाकर वे उनकी सेवा में लगी रहती थीं। उनका बहुत ही पसंदीदा काम – प्रेमपूर्वक अपनी जपमाला खींचते रहना चालू ही थी। लेकिन […]

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क्रान्तिगाथा-७८

क्रान्तिगाथा-७८

काकोरी योजना में रामप्रसाद बिस्मिल के साथ सम्मिलित रहनेवाले अशफ़ाक उल्ला खान को अँग्रेज़ सरकार ने जब इस योजना में शामिल होने का आरोप रखकर फाँसी दी, तब उनकी उम्र थी महज़ २७ साल। रामप्रसाद बिस्मिल के व्यक्तित्व का बहुत बड़ा प्रभाव अशफ़ाक उल्ला खान के जीवन पर था और हक़ीकत में इन दोनों की […]

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परमहंस-१२४

परमहंस-१२४

रामकृष्णजी की स्त्री-भक्त अघोरमणीदेवी बहुत ही सीधासादा जीवन जीतीं थीं। उनके दिवंगत पति के परिवारवालों से पतिनिधन के बाद उन्हें कुछ रक़म मिली थी, जिसका निवेश कर उसके ज़रिये जो प्रतिमाह ५-६ रुपये ब्याज आता था, उसपर वे अपने पूरे महीने का गुज़ारा कर लेती थीं। अघोरमणीदेवी ‘बालकृष्ण’ तो अपना आराध्य बनायें, यह मार्गदर्शन भी […]

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समय की करवट (भाग ७६) – भाई-भाई में दरार

समय की करवट (भाग ७६) – भाई-भाई में दरार

‘समय की करवट’ बदलने पर क्या स्थित्यंतर होते हैं, इसका अध्ययन करते हुए हम आगे बढ़ रहे हैं। इसमें फिलहाल हम, १९९० के दशक के, पूर्व एवं पश्चिम जर्मनियों के एकत्रीकरण के बाद, बुज़ुर्ग अमरिकी राजनयिक हेन्री किसिंजर ने जो यह निम्नलिखित वक्तव्य किया था, उसके आधार पर दुनिया की गतिविधियों का अध्ययन कर रहे […]

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नेताजी- १८०

नेताजी- १८०

२९ मई, १९४२। सुभाषबाबू की हिटलर के साथ होनेवाली उस ऐतिहासिक मुलाक़ात की घड़ी क़रीब आ रही थी। शाम को ठीक ४ बजे, आदिमाता चण्डिका का स्मरण करके सुभाषबाबू ने रास्टेनबर्ग स्थित हिटलर के सेना मुख्यालय के उसके व्यक्तिगत अध्ययन कक्ष में प्रवेश किया। उनके साथ जर्मन विदेशमन्त्री रिबेनट्रॉप, अ‍ॅडम ट्रॉट आदि कुछ गिने-चुने ही […]

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परमहंस-१२३

परमहंस-१२३

रामकृष्णजी की स्त्रीभक्त ‘योगिन माँ’ की तरह ही रामकृष्ण-परिवार में विख्यात होनेवालीं दुसरीं स्त्रीभक्त यानी ‘गोलप माँ’। रामकृष्णसंप्रदाय स्थापन होने के शुरुआती दिनों में उसे ठीक से आकार देने का काम जिन्होंने निष्ठापूर्वक किया, उनमें से एक गोलप माँ थीं। ‘अन्नपूर्णा देवी’ उर्फ ‘गोलप सुंदरी देवी’ ऐसे पूर्वनाम होनेवालीं गोलप माँ रामकृष्णजी के पास आयीं, […]

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क्रान्तिगाथा-७७

क्रान्तिगाथा-७७

९ अगस्त १९२५ का दिन। सहारनपुर से लखनौ की तरफ़ जा रही ८ डाऊन ट्रेन काकोरी स्टेशन के पास आते ही अचानक से रूक गयी। शायद किसी ने चेन खींच ली होगी। ट्रेन रूक गयी और कुछ ही देर में बहुत कुछ घटित हुटा। अलग अलग जगह से इकट्ठा किया गया पैसा, जो अँग्रेज़ सरकार […]

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नेताजी-१७९

नेताजी-१७९

आख़िर सुभाषबाबू ने जर्मनी में कदम रखने के दिन से जिस उद्देश्य के लिए दिनरात एक करके मेहनत की थी, वह लक्ष्य उनके सामने आ गया था – तेरह महीनों के लंबे इन्तज़ार के बाद हिटलर ने उनसे मिलने की बात को क़बूल कर लिया और मुलाक़ात का दिन मुक़र्रर किया गया था – २९ […]

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परमहंस-१२२

परमहंस-१२२

रामकृष्णजी कीं स्त्रीभक्त रामकृष्णजी की निष्ठावान स्त्रीभक्तों में ‘योगिन (जोगिन) माँ’ तथा ‘गोलप माँ’ इन नामों से आगे चलकर विख्यात हुईं अग्रसर स्त्रीभक्त थीं। इनमें से ‘योगिन माँ’ (मूल नाम ‘योगींद्रमोहिनी मित्रा’) ये अमीर परिवार से थीं। लेकिन बहुत पैसा होने के बावजूद भी घर में पति की व्यसनाधीनता के कारण सुखशांति नहीं थी। घर […]

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