परमहंस-१४१

परमहंस-१४१

१८८६ साल धीरे धीरे आगे बढ़ने लगा – मई….जून…जुलाई! रामकृष्णजी की तबियत में कोई सुधार नहीं था, उल्टी वह ढ़हती ही जा रही थी। उनके इस भौतिक अवतार की समाप्ति नज़दीक आ रही होने का एहसास उनके शिष्यों को हो रहा था। रामकृष्णजी के वियोग की कल्पना हे वे सभी हालाँकि एकान्त में रो पड़ते […]

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क्रान्तिगाथा-८६

क्रान्तिगाथा-८६

दक्षिणी भारत के युवाओं को भारतीय स्वतन्त्रता के लिए सक्रिय करने में सुब्रह्मण्य भारती, व्ही. ओ. चिदंबरम् पिल्लै और सुब्रह्मण्य शिवा का बहुत बड़ा योगदान रहा है। दक्षिणी भारत के देशभक्तों में गर्व से लिया जानेवाला एक और नाम है-पट्टाभि सीतारामय्या का। आंध्र प्रदेश में १८८० में इनका जन्म हुआ। मद्रास ख्रिश्‍चन कॉलेज में से […]

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परमहंस-१४०

परमहंस-१४०

इस प्रकार आनेवाले समय के लिए रामकृष्ण संप्रदाय की नींव रामकृष्णजी के जीवन के इस आख़िरी पर्व काशीपुर के वास्तव्य के दौरान रखी गयी। लेकिन रामकृष्णजी का स्वास्थ्य दिनबदिन बिगड़ता ही जा रहा था। बीच में हो थोड़ासा सुकून मिलता था, कि उनके शिष्यवर्ग की उम्मीदें फिर से जाग जातीं थीं; लेकिन यह सुकून अल्प […]

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परमहंस-१३९

परमहंस-१३९

रामकृष्णजी के काशीपुरस्थित वास्तव्य में भविष्यकालीन रामकृष्ण संप्रदाय की नींव रखी गयी। आध्यात्मिक प्रगति करने की एकमेव चाह होनेवाले उनके कुछ पटशिष्य, जिनके मन का रूझान संन्यस्तवृत्ति की ओर था, ऐसे शिष्यों के माध्यम से यह नींव रखी गयी। उनमें से कुछ पटशिष्य – नरेंद्र – आगे चलकर ‘स्वामी विवेकानंद’ नाम से विख्यात। राखाल – […]

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क्रान्तिगाथा-८५

क्रान्तिगाथा-८५

रेल, तार, डाक जैसी अनेक सुविधाएँ भारत में उपलब्ध हो गयीं। लेकिन उनके शुरू होने की वजह बन गये थे अँग्रेज़। जब भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में ‘स्वदेशी’ का आन्दोलन ज़ोर शोर पर था; तब भारत में अनेक स्थित्यन्तरण हुए थे। स्वदेशी का पुरस्कार करते हुए अनेक भारतीयोंने अपने भारतवासी भाईयों के लिए कुछ सुविधाओं की […]

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परमहंस-१३८

परमहंस-१३८

काशीपुरस्थित घर में स्थलांतरित होने के बाद भी रामकृष्णजी की बीमारी बढ़ती ही चली गयी। अब उनका शरीर यानी महज़ अस्थिपंजर शेष बचा था। लेकिन उनकी मानसिक स्थिति तो अधिक से अधिक आनंदित होती चली जा रही थी, मानो जैसे बुझने से पहले दीये की ज्योति बड़ी हो जाती है, वैसा ही कुछ हुआ था। […]

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नेताजी-१९४

नेताजी-१९४

जापानी प्रधानमन्त्री हिडेकी टोजो की अपॉइन्टमेन्ट मिलने तक हाथ पर हाथ धरे न बैठे रहते हुए सुभाषबाबू ने जापान सरकार के विदेशमन्त्री मामोरू शिगेमित्सु, सेनाप्रमुख जनरल सुगियामा जैसे अतिमहत्त्वपूर्ण अ़फ़सरों के साथ प्राथमिक स्तर की बातचीत शुरू कर दी। इस बातचीत में राशबाबू से मिल हुए परामर्श उनके लिए का़फ़ी फ़ायदेमन्द साबित हुए। सुभाषबाबू कितने […]

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परमहंस-१३७

परमहंस-१३७

इस नये काशीपूरस्थित विशाल फार्महाऊस में अब रामकृष्णजी और उनके शिष्यगण धीरे धीरे नये माहौल से परिचित हो रहे थे। यहाँ पहली मंज़िल पर होनेवाले बड़े हॉल में रामकृष्णजी के निवास का प्रबंध किया गया था और वे वहीं पर, आये हुए भक्तों से मिलते थे। उससे सटे एक छोटे कमरे में, उस उस दिन […]

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क्रान्तिगाथा-८४

क्रान्तिगाथा-८४

भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति तक का जो संघर्षमय काल था, उस काल में भारतीय जनमानस में चेतना को जगाने का काम कई देशभक्तिपर घोषणाओं और गीतों ने किया। ‘वंदे मातरम्’ जैसी देशभक्तिपर घोषणाएँ, ‘जन गण मन’ जैसे देशभक्तिपर गीत हर एक भारतीय को देश के लिए कुछ करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे। तमिलनाडु […]

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नेताजी-१९३

नेताजी-१९३

८ फ़रवरी १९४३ को कील बन्दरगाह से जर्मन पनडुबी द्वारा शुरू हुआ सुभाषबाबू का जलप्रवास, २३ अप्रैल को मादागास्कर के नजिक जर्मन पनडुबी में से जापानी पनडुबी में स्थानांतरित होने के बाद कुछ ही दिनों में, यानी ६ मई १९४३ को साबांग बन्दरगाह पर समाप्त हो गया। साबांग बन्दरगाह पर, बर्लिन स्थित जापानी सेना के […]

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