नेताजी-१६६

नेताजी-१६६

सुभाषबाबू द्वारा बुलायी गयी, बर्लिन स्थित भारतीयों की मीटिंग में ताईजी को देखकर उपस्थितों की जिज्ञासा अब चरमसीमा पर पहुँच चुकी थी कि ये ‘ओरलेन्दो मेझोता’ कौन हैं? इतने में मुकुंदलाल व्यासजी बाहर आये। कुछ लोग उन्हें भी जानते थे। पहले ताईजी और फिर ये व्यास….ज़रूर कोई न कोई बात है, यह सभी सोच रहे […]

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परमहंस-१०७

परमहंस-१०७

रामकृष्णजी की शिष्यों को सीख जब एक भक्त ने ऐसा सवाल पूछा कि ‘सभी में ईश्‍वर हैं, फिर यदि कोई मनुष्य किसी भक्तिमार्ग चलनेवाले श्रद्धावान के साथ बुरा बर्ताव कर रहा है, तो फिर वह श्रद्धावान क्या करें’; तब, श्रद्धावानों को इस व्यवहारिक दुनिया में जीते समय, दुनिया के बुरे लोगों से खुद की रक्षा करते […]

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क्रान्तिगाथा-६९

क्रान्तिगाथा-६९

जालियनवाला बाग में घटित इस घटना का भारत में हर एक स्तर पर निषेध ही किया गया। इस हत्याकांड का निषेध करने के लिए रविन्द्रनाथ टागोर ने अँग्रेज़ सरकार के द्वारा उन्हें प्रदान किया गया सर्वोच्च सम्मान (उपाधि) लौटा दी। लेकिन इस घटना से भारतीयों के मन में मातृभूमि को आज़ाद करने के ध्येय की […]

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नेताजी- १६५

नेताजी- १६५

सुभाषबाबू का विदेश सचिव केपलर के साथ हुआ झगड़ा, यह हालाँकि कोई अच्छी घटना नहीं थी, लेकिन उसकी गूँजों ने तो थोड़ाबहुत अच्छा काम कर दिया। सुभाषबाबू बहुत ही नाराज़ हैं, इस बात को जानने के बाद रिबेनट्रॉप ने स्वयं इस मामले पर ध्यान देना शुरू किया। एक के बाद एक इस तरह ‘एस्प्लनेड’, ‘एक्सलसियर’, […]

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परमहंस-१०६

परमहंस-१०६

रामकृष्णजी की शिष्यों को सीख : ‘जिस तरह कोई सांसारिक मनुष्य धनसंपत्ति से, कोई पतिव्रता पत्नी अपने पति से, कोई माता अपनी संतान से प्रेम करती है, वह प्रेम ईश्‍वर से करना सिखो। दरअसल इन तीनों आकर्षणों का (लालच-मोह, प्रेम और वत्सलता) रूख़ एकत्रित रूप में उसी आर्तता के साथ ईश्‍वर की दिशा में मोड़ना […]

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समय की करवट (भाग ६७) – सुएझ : घटनाओं की गूँजें

समय की करवट (भाग ६७) – सुएझ : घटनाओं की गूँजें

‘समय की करवट’ बदलने पर क्या स्थित्यंतर होते हैं, इसका अध्ययन करते हुए हम आगे बढ़ रहे हैं। इसमें फिलहाल हम, १९९० के दशक के, पूर्व एवं पश्चिम जर्मनियों के एकत्रीकरण के बाद, बुज़ुर्ग अमरिकी राजनयिक हेन्री किसिंजर ने जो यह निम्नलिखित वक्तव्य किया था, उसके आधार पर दुनिया की गतिविधियों का अध्ययन कर रहे […]

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नेताजी-१६४

नेताजी-१६४

सुभाषबाबू बर्लिन लौटे, वह ग़ुस्से में ही। पहले ही २२ जून १९४१ को जर्मनी ने रशिया पर आक्रमण किया था, जिससे कि उनकी योजनाओं को मानो बारूद ही लग गया था। साथ ही, बर्लिन पहुँचते ही, मुसोलिनी मुझसे न मिलें इसलिए हिटलर द्वारा किये गये कारस्तानों की जानकारी भी उन्हें मिली। वे ख़ौलकर फौरन विदेश […]

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परमहंस-१०५

परमहंस-१०५

रामकृष्णजी की शिष्यों को सीख : एक बार रामकृष्णजी उनके एक शिष्य बेणीमाधव पाल के निमंत्रण पर सत्संग के लिए उनके फार्महाऊस पर गये थे। बेणीमाधवजी पहले ब्राह्मो समाज से संलग्न होने के कारण ब्राह्मो समाज के कई साधक भी इस समय उपस्थित थे। हमेशा की तरह ही सत्संग के दौरान साधक रामकृष्णजी को जिज्ञासु […]

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क्रान्तिगाथा-६८

क्रान्तिगाथा-६८

हालाँकि भारत में सर्वत्र इस अमानुष गोलीबारी की खबर तेज़ी से फैल गयी, लेकिन इंग्लैंड़ में इस घटना की सविस्तार खबर पहुँची, दिसंबर १९१९ में। अँग्रेज़ सरकार को लगा कि अब भारतीय सहम गये होंगे, इसलिए इसके बाद अँग्रेज़ों के खिलाफ बगावत करने से पहले दस बार सोचेंगे। लेकिन अँग्रेज़ों को जल्द ही भारतीयों की […]

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नेताजी-१६३

नेताजी-१६३

रोम में भारतीय युद्धबन्दियों के साथ बातचीत करने की इजाज़त प्राप्त करना, इसके अलावा और कुछ भी सुभाषबाबू के हाथ नहीं लगा। इक्बाल सिदेई में उन्हें जो आशा की किरण नज़र आ रही थी, वह भी व्यर्थ ही साबित हुई। सिदेई सुभाषबाबू की बढ़ाई व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए कर रहा था। उसपर धुन सवार थी […]

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