क्रान्तिगाथा-७८

क्रान्तिगाथा-७८

काकोरी योजना में रामप्रसाद बिस्मिल के साथ सम्मिलित रहनेवाले अशफ़ाक उल्ला खान को अँग्रेज़ सरकार ने जब इस योजना में शामिल होने का आरोप रखकर फाँसी दी, तब उनकी उम्र थी महज़ २७ साल। रामप्रसाद बिस्मिल के व्यक्तित्व का बहुत बड़ा प्रभाव अशफ़ाक उल्ला खान के जीवन पर था और हक़ीकत में इन दोनों की […]

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क्रान्तिगाथा-७७

क्रान्तिगाथा-७७

९ अगस्त १९२५ का दिन। सहारनपुर से लखनौ की तरफ़ जा रही ८ डाऊन ट्रेन काकोरी स्टेशन के पास आते ही अचानक से रूक गयी। शायद किसी ने चेन खींच ली होगी। ट्रेन रूक गयी और कुछ ही देर में बहुत कुछ घटित हुटा। अलग अलग जगह से इकट्ठा किया गया पैसा, जो अँग्रेज़ सरकार […]

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क्रान्तिगाथा-७६

क्रान्तिगाथा-७६

‘स्वराज्य पार्टी’ के स्थापनाकर्ताओं में एक और महत्त्वपूर्ण नाम था – मोतीलाल नेहरू का। मई १८६१ में उनका जन्म हुआ। कानून की डिग्री प्राप्त करने के बाद उन्होंने वकालत करना शुरू कर दिया और वे एक मशहूर वकील बन गये। शुरुआती समय में इंडियन नॅशनल काँग्रेस के माध्यम से कार्य करते हुए दो सालों तक […]

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क्रान्तिगाथा-७५

क्रान्तिगाथा-७५

काशी में यानी बनारस में बनारस हिन्दु युनिव्हर्सिटी की स्थापना में डॉ. अ‍ॅनी बेझंट इस विदेश से आयी, लेकिन भारत के लिए कार्य करनेवाली विद्वान महिला का महत्त्वपूर्ण सहभाग था। साथ ही ‘महामना’ की उपाधि से नवाज़े गये पंडित मदनमोहन मालवीयजी का भी योगदान उतना ही महत्त्वपूर्ण था। महज़ हिन्दी ही नहीं, बल्कि संस्कृत और […]

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क्रान्तिगाथा-७४

क्रान्तिगाथा-७४

विदेशियों की गुलामी की ज़ंजीरों में जकड़ी अपनी मातृभूमि को आज़ाद करने के लिए उसके अनगिनत सपूत दिनरात तड़प रहे थे, दिनरात मेहनत कर रहे थे। भारत के किसी कोने के देहात में रहनेवाला कोई भारतीय हो या किसी शहर में रहनेवाला भारतीय, दोनों की परिस्थिति में चाहे कितना भी फर्क क्यों न हो, मग़र […]

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क्रान्तिगाथा-७३

क्रान्तिगाथा-७३

अँग्रेज़ सरकार ने इस असहकार आंदोलन के मार्गदर्शक महात्मा गाँधीजी को गिरफ़्तार करके उन्हें ६ साल की सज़ा सुनायी। लेकिन आगे चलकर फरवरी १९२४ में स्वास्थ के बिगड़ जाने के कारण उन्हें रिहा किया गया। आख़िर १२ फरवरी १९२२ को इंडियन नॅशनल काँग्रेस ने राष्ट्रीय स्तर पर असहकार आंदोलन को स्थगित किये जाने की घोषणा […]

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क्रान्तिगाथा-७२

क्रान्तिगाथा-७२

अँग्रेज़ों द्वारा उनके शासनकाल में भारत में विभिन्न प्रांत यानी प्रोव्हिन्स का निर्माण किया गया था। उस समय के युनायटेड़ प्रोव्हिन्स में रहनेवाला चौरी चौरा यह एक गाँव था। भारतभर में असहकार आंदोलन की ज्वाला भड़क उठी थी और पूरे भारत में लोग यथासंभव अँग्रेज़ों से असहकार कर रहे थे। १९२२ का फरवरी का महीना […]

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क्रान्तिगाथा-७१

क्रान्तिगाथा-७१

असहकार आंदोलन के समय भारतीय गाँधीजी की कार्यपद्धति से परिचित हो गये। आख़िर निश्‍चित रूप से क्या स्वरूप था इस असहकार आंदोलन का? सरकारी नौकरियों पर बहिष्कार (बॉयकॉट) करना, संक्षेप में सरकारी नौकरी करनेवाले उस नौकरी को त्याग देंगें और यदि सरकारी नौकरी मिल भी रही हो तो उसका स्वीकार न करना। वकील और जज […]

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क्रान्तिगाथा-७०

क्रान्तिगाथा-७०

१९२० का अगस्त महीना शुरू हो चुका था। अगस्त महीने की १ तारीख थी और उस दिन एक बहुत ही दुखद घटना हुई। इस घटना से सारा भारत शोक में डूब गया। हुआ भी वैसा ही था। १ अगस्त १९२० को ‘लोकमान्य’ इस उपाधि से गौरवान्वित बाळ गंगाधर टिळकजी का स्वर्गवास हो गया। ‘स्वराज्य यह […]

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क्रान्तिगाथा-६९

क्रान्तिगाथा-६९

जालियनवाला बाग में घटित इस घटना का भारत में हर एक स्तर पर निषेध ही किया गया। इस हत्याकांड का निषेध करने के लिए रविन्द्रनाथ टागोर ने अँग्रेज़ सरकार के द्वारा उन्हें प्रदान किया गया सर्वोच्च सम्मान (उपाधि) लौटा दी। लेकिन इस घटना से भारतीयों के मन में मातृभूमि को आज़ाद करने के ध्येय की […]

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