क्रान्तिगाथा-९०

क्रान्तिगाथा-९०

पराक्रम और बुद्धि की चतुरता के साथ जाँबाज राम्पा लोगों के साथ लडनेवाले अल्लुरि सीताराम राजु को पकडने के बाद भविष्य में क्या होनेवाला है, यह भारतीय बिना बताये ही समझ गये। चिंतापल्लि के जंगल से अल्लुरि सीताराम राजु को गिरफ्तार किया गया। अँग्रेज़ों ने उन्हें बहुत तकलीफे देना शुरू कर दिया। आखिर एक नदी […]

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क्रान्तिगाथा-८९

क्रान्तिगाथा-८९

अल्लुरि सीताराम राजु का जन्म इस आदिम जनजाति में नहीं हुआ था, लेकिन इन लोगों की तकलीफें, दुख और अँग्रेज़ों द्वारा उनका किया जानेवाला शोषण इन सभी बातों को उन्होंने करीब से देखा और उन्होंने राम्पा लोगों मे चेतना जगायी। एक अभूतपूर्व ब्रिटिश विरोधी संषर्घ की शुरुआत हुई। दर असल इन पहाड़ों और जंगलों से […]

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क्रान्तिगाथा-८८

क्रान्तिगाथा-८८

दक्षिण भारत के आंध्रप्रदेश में स्थित विझागपटम् के पहाड़ी इलाके में राम्पा नामक आदिम जनजाति सदियों से बस रही थी। कई सदियों से ये लोग आजादी का अनुभव कर रहे थे। अन्य आदिम जनजातियों के तरह ये लोग भी परंपरागत व्यवसाय कर रहे थे। ताड़ के पेड़ का रस जिसे प्रारंभिक अवस्था में नीरा और […]

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क्रान्तिगाथा-८७

क्रान्तिगाथा-८७

१८वीं सदी के उत्तरार्ध से यानी कि अँग्रेज़ों का भारत में प्रवेश होने के बाद इन आदिम जनजातियों ने अँग्रेज़ों के खिलाफ़ लड़ना शुरू किया। सन १७७४–७९ में छत्तीसगड की हलबा नामक जनजाति अँग्रेज़ों से लडने के लिए सिद्ध हो गयी। सन १७७८ में छोटा नागपूर के पहारिया सरदार अँग्रेज़ों के खिलाफ़ खड़े हुए। १९वीं […]

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क्रान्तिगाथा-८६

क्रान्तिगाथा-८६

दक्षिणी भारत के युवाओं को भारतीय स्वतन्त्रता के लिए सक्रिय करने में सुब्रह्मण्य भारती, व्ही. ओ. चिदंबरम् पिल्लै और सुब्रह्मण्य शिवा का बहुत बड़ा योगदान रहा है। दक्षिणी भारत के देशभक्तों में गर्व से लिया जानेवाला एक और नाम है-पट्टाभि सीतारामय्या का। आंध्र प्रदेश में १८८० में इनका जन्म हुआ। मद्रास ख्रिश्‍चन कॉलेज में से […]

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क्रान्तिगाथा-८५

क्रान्तिगाथा-८५

रेल, तार, डाक जैसी अनेक सुविधाएँ भारत में उपलब्ध हो गयीं। लेकिन उनके शुरू होने की वजह बन गये थे अँग्रेज़। जब भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में ‘स्वदेशी’ का आन्दोलन ज़ोर शोर पर था; तब भारत में अनेक स्थित्यन्तरण हुए थे। स्वदेशी का पुरस्कार करते हुए अनेक भारतीयोंने अपने भारतवासी भाईयों के लिए कुछ सुविधाओं की […]

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क्रान्तिगाथा-८४

क्रान्तिगाथा-८४

भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति तक का जो संघर्षमय काल था, उस काल में भारतीय जनमानस में चेतना को जगाने का काम कई देशभक्तिपर घोषणाओं और गीतों ने किया। ‘वंदे मातरम्’ जैसी देशभक्तिपर घोषणाएँ, ‘जन गण मन’ जैसे देशभक्तिपर गीत हर एक भारतीय को देश के लिए कुछ करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे। तमिलनाडु […]

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क्रान्तिगाथा-८३

क्रान्तिगाथा-८३

केरल में ब्रिटिशविरोध की शुरुआत १८वीं सदी के अंत में और १९वीं सदी के आरंभ में हुई। केरल के मलबार, त्रावणकोर और क कोचीन ये राज्यही ब्रिटिशों का विरोध करने में जुट गये। त्रावणकोर राज्य के प्रधानमंत्री ने ब्रिटिशों के विरोध में मोरचा खोला। कोचीन में भी उस राज के प्रधानमंत्री ने ही ब्रिटिश विरोध […]

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क्रान्तिगाथा-८२

क्रान्तिगाथा-८२

‘झंड़ा सत्याग्रह’ यानी ‘फ्लॅग मार्च’ यह अँग्रेज़ों का विरोध करने की एक अनोखी कोशिश थी। १९२३ में नागपुर और जबलपुर में प्रमुख रूप से एवं सेंट्रल प्रोव्हिन्स में कुछ स्थानों पर इस झंड़ा सत्याग्रह का आयोजन किया गया था। झंड़ा सत्याग्रहियों के द्वारा फिर जगह जगह भारत का ध्वज लहराने की कोशिशें की गयी। यहाँ […]

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क्रान्तिगाथा-८१

क्रान्तिगाथा-८१

दिसंबर १९२५ की सुबह लाहोर से चलनेवाली एक ट्रेन में एक पुरुष एक स्त्री और एक छोटा बच्चा इस तरह एक परिवार चढ़ गया और उनका नौकर भी तीसरी क्षेणी के रेल डिब्बे में चढ़ गया। कुछ विशिष्ट स्टेशनों में गाड़ी बदली करते हुए यह परिवार हावड़ा पहुँच गया। लेकिन उनका नौकर पहले ही, बनारस […]

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