श्‍वसनसंस्था- १०

श्‍वसनसंस्था- १०

हम श्‍वसनसंस्था के बारे में जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। पिछले लेख में हमने श्‍वसनसंस्था की रचना का अध्ययन किया। आज से हम उसके कार्यों के बारे में जानकारी प्राप्त करनेवाले हैं। हमारे श्‍वसन का कार्य क्या है? यदि कोई ऐसा प्रश्‍न पूछें तो हम फौरन उत्तर देंगे कि शरीर को प्राणवायु की आपूर्ति करने […]

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श्‍वसनसंस्था- ९

श्‍वसनसंस्था- ९

पिछले भाग में हमने क्षयरोग के लक्षणों तथा उनके कारण होनेवाले शारीरिक परिवर्तनों का अध्ययन किया। आज के लेख में हम क्षयरोग के कारण होनेवाली अन्य बीमारियों तथा क्षयरोग की जाँच के बारे में अध्ययन करनेवाले हैं (complications & Lab diagnosis of Tuberculosis) क्षयरोग का पता चलने के बाद जल्द से जल्द उपचार करने पर […]

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श्‍वसनसंस्था- ८

श्‍वसनसंस्था- ८

हमारे श्‍वसन का मुख्य आधार हैं, हमारे फ़ेफ़ड़े । हम इस बारे में अध्ययन कर रहे हैं। प्रत्येक फ़ेफ़ड़े में ब्रोंकोपलमनरी सेगमेंटस् होते हैं, यह हमने देखा। प्रत्येक ब्रोंकोपलमनरी सेगमेंट स्वतंत्र रूप से श्‍वसन का कार्य कर सकती हैं। ऐसे प्रत्येक सेंगमेंट को एक-एक सेगमेंटल ब्रोंकस हवा की आपूर्ति करता रहता है। फ़ेफ़ड़े में प्रवेश […]

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श्‍वसनसंस्था- ७

श्‍वसनसंस्था- ७

अब हम श्‍वसननलिका के अंतिम परन्तु महत्त्वपूर्ण भाग के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। इस भाग को फ़ेफ़ड़ा कहते हैं। फ़ेफ़ड़ा यह श्‍वसनक्रिया का अनिवार्य अंग है। हमारे हृदय के दोनों ओर एक-एक फ़ेफ़ड़ा होता है। फ़ेफ़ड़े के ऊपर पतले परदे का आवरण होता है। इस आवरण को ‘प्लुरा’ कहते हैं। इस आवरण के अंदर […]

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श्‍वसनसंस्था- ६

श्‍वसनसंस्था- ६

पिछले लेख में हमने मुख्य श्‍वसननलिका की रचना का अध्ययन किया। आज हम इसके अगले भाग की जानकारी प्राप्त करेंगे। छाती और रीढ़ की पाँचवीं हड्डी के स्तर पर मुख्य श्‍वसन नलिका दो विभागों में विभाजित हो जाती है। इन विभागों को ब्रोंकस कहते हैं। ऊपर दी हुयी आकृती में श्‍वसन नलिका की अगली रचना […]

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श्‍वसनसंस्था- ५

श्‍वसनसंस्था- ५

श्वसनसंस्था के बारे में जानकारी लेते समय हमनें देखा कि रचना की दृष्टि से इसे दो भागों में बाँटा गया है। इनमें से ऊपरी भाग की जानकारी हमने पिछले लेख में प्राप्त की। आज से हम श्वसन संस्था के निचले भाग की जानकारी प्राप्त करनेवाले हैं, श्वसनसंस्था के निचले भाग में निम्नांकित अवयव आते हैं-श्‍वसननलिका, […]

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श्‍वसनसंस्था- ४

श्‍वसनसंस्था- ४

हम अभी अपनी श्‍वसनसंस्था के ऊपरी भाग के बारे में जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। लॅरिन्क्स अथवा स्वरयंत्र की संक्षिप्त जानकारी हमनें प्राप्त की। स्वरयंत्र हवा का मार्ग ही है। जब हम नाक के द्वारा श्‍वास लेते हैं तो अंदर ली गयी हवा स्वरयंत्र से ही श्‍वसननलिका में जाती है। जब हवा बाहर निकाली जाती […]

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श्‍वसनसंस्था- ३

श्‍वसनसंस्था- ३

हम अपनी श्वसनसंस्था के बारे में जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। रचना को समझने में आसानी हो इसलिए श्वसनसंस्था को दो भागों में बांटा गया है। नाक से लेकर स्वरयंत्र तक के भाग को ऊपरी श्वसन संस्था अथवा upper Respiratory Tract कहते हैं। स्वरयंत्र से नीचे के भाग को निचली श्वसनसंस्था अथवा Lower Respriatory Tract […]

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श्‍वसनसंस्था-२

श्‍वसनसंस्था-२

हम हमारी श्‍वसनसंस्था का अध्ययन कर रहे हैं। श्‍वसन-संस्था की रचना और कार्य दोनों के बारे में हम जानकारी प्राप्त करनेवाले हैं। हमारी श्‍वसनसंस्था की शुरुआत हमारी नाक से होती है। फेफड़ें, श्‍वसनसंस्था के मुख्य अवयव हैं। नाक से लेकर फेफडों तक जो जो अवयव इसमें सम्मिलित होते हैं, उन सभी को मिलाकर वायु मार्ग […]

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श्‍वसनसंस्था

श्‍वसनसंस्था

‘श्‍वास-उच्छ्श्‍वास अवघा तुझा, तूचि चालवावे प्राणा।’ भक्तमाता की आरती लिखते समय कवि ने कितना अचूक वर्णन किया है ना! ‘श्‍वासोच्छ्श्‍वास अवघा तुझा’ यानी श्‍वास (साँस लेना) और उच्छ्श्‍वास (साँस छोड़ना) दोनों आपके ही हैं यानी आपकी वजह से ही चलते हैं और उस श्‍वास पर ही मेरे प्राण, मेरा जीव कार्यरत है। तात्पर्य यह है […]

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