६०. इस्रायल की भूमि में बिजलीनिर्माण की शुरुआत

६०. इस्रायल की भूमि में बिजलीनिर्माण की शुरुआत

इसवीसन १९२० के दशक के प्रारंभ में ही हालाँकि पॅलेस्टाईन में ज्यू-अरब संघर्ष भड़के थे, ज्यूधर्मियों के लिए सकारात्मक गतिविधियाँ भी घटित होने लगीं थीं। उदा. भविष्यकाल में इस्रायल के उद्योग आदि क्षेत्रों में जिन्होंने मूलभूत महत्त्व का कार्य किया, ऐसीं कई संस्थाओं का निर्माण होकर वे निश्‍चित आकार धारण करने लगीं थीं। इनमें से […]

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५९. संघर्षों की चेतावनी-घंटियाँ

५९. संघर्षों की चेतावनी-घंटियाँ

इस प्रकार इसवीसन १९१८ से पॅलेस्टाईन में ब्रिटिशों की सत्ता शुरू हुई। विश्‍वयुद्ध जीतने के बाद ब्रिटन ने वहाँ पर लष्करी प्रशासन नियुक्त किया था, जिसके स्थान पर सन १९२१ में नागरी प्रशासन लाया गया। हर्ट्झ्ल् के तथा उसके द्वारा स्थापन किये गये झायॉनिस्ट ऑर्गनायझेशन के अथक प्रयास, साथ ही ब्रिटीश सरकार ने जारी किया […]

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५८. ब्रिटीश मँडेटरी पॅलेस्टाईन

५८. ब्रिटीश मँडेटरी पॅलेस्टाईन

पहला विश्‍वयुद्ध समाप्त हुआ और उसमें विजयी हुए ब्रिटन तथा दोस्तराष्ट्रों ने, पराजित अक्षराष्ट्रों (अ‍ॅक्सिस पॉवर्स) की भूमि का अपनी अपनी सहूलियत के अनुसार बँटवारा कर उन भूभागों को आपस में बाँट लेना शुरू किया। इस कारण, कुछ समय पहले तीन महाद्वीपों में जिसका विस्तार था ऐसा ऑटोमन साम्राज्य अब केवल, उसकी शुरुआत जहाँ से […]

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५७. बेलफोर डिक्लरेशन

५७. बेलफोर डिक्लरेशन

हर्ट्झ्ल् निर्मित झायॉनिस्ट ऑर्गनायझेशन द्वारा किये गये अथक परिश्रमों को सफलता मिलने लगी और इसवीसन १९०४ से १९१४ के दौरान दुनिया के विभिन्न कोनों से जेरुसलेम लौटे ज्यूधर्मियों की संख्या ४० हज़ार से ऊपर पहुँच गयी थी (दूसरी ‘आलिया’)। उन्हें समा लेने के लिए, शुरुआती दौर में (टेंपल कालखंड में) केवल १ चौरस किलोमीटर विस्तार […]

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५६ . पहली ‘झायॉनिस्ट कॉंग्रेस’

५६ . पहली ‘झायॉनिस्ट कॉंग्रेस’

इस प्रकार हर्ट्झ्ल् ने अब झायॉनिझम का प्रसार करने का काम बड़ी ही फ़ुरती से हाथ में लिया| उसने पहले ‘झायॉनिस्ट ऑर्गनायझेशन’ की स्थापना की और इसवीसन १८९७ के अगस्त महीने में स्वित्झर्लंडस्थित बेसेल में पहली ‘झायॉनिस्ट कॉंग्रेस’ का आयोजन किया| विभिन्न देशों से कुल मिलाकर २०० से भी अधिक निमंत्रितों ने कॉंग्रेस में हिस्सा […]

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५५. ‘झायॉनिझम’ की स्थापना

५५. ‘झायॉनिझम’ की स्थापना

१८वीं सदी के अन्त में और १९ वीं सदी में ज्यूधर्मीय विचारक ज्युडाह बिबास, झ्वी हर्श कॅलिशर और बिबास के छात्र ज्युडाह अल्कालाई ने अथक परिश्रम कर, जेरुसलेम लौटने के लिए डायस्पोरा के ज्यूधर्मियों को जो प्रेरित किया, उसके फलस्वरूप कई ज्यूधर्मीय जेरुसलेम लौट आये। (‘आलिया’) इस कालखंड की पहली ‘आलिया’ अर्थात् ज्यूधर्मीय बड़ी संख्या […]

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५४. ‘झायॉनिझम’ की पार्श्‍वभूमि

५४. ‘झायॉनिझम’ की पार्श्‍वभूमि

हज़ारों साल बदतर हालातों में गुज़ारने के बाद अब इसवी १९ वीं सदी में ज्यूधर्मियों की स्थिति बेहतर होने के आसार दिखायी देने लगे थे, क्योंकि इसी सदी में ‘झायॉनिझम’ के बीज बोये गये| ‘ज्युडाईझम’ और ‘झायॉनिझम’ इनमें फ़र्क़ है| ज्युडाईझम ज्यूधर्मतत्त्वों का पालन करने के बारे में, अर्थात् पूर्णतः धार्मिक स्तर पर ज्यूधर्मियों को […]

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५३. ‘नेक्स्ट इयर इन जेरुसलेम’

५३. ‘नेक्स्ट इयर इन जेरुसलेम’

‘नेक्स्ट इयर इन जेरुसलेम….’ हर साल ‘पासओव्हर’ और ‘योमकिप्पूर’ इन ज्यूधर्मीय त्यौहारों में की जानेवालीं प्रार्थनाओं के अन्त में, सालों साल….सदियों से, दुनिया के किसी भी कोने में होनेवाला (‘ज्यू डायस्पोरा’ में स्थित) हर एक ज्यूधर्मीय उपरोक्त शब्द कहता आया है….और ये शब्द बिलकुल भक्तिभाव के साथ और विश्‍वासपूर्वक कहते हुए वह थोड़ासा भी ऊबा […]

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५२. आधुनिक इतिहास की दहलीज़ पर

५२. आधुनिक इतिहास की दहलीज़ पर

इस प्रकार जेरुसलेमस्थित ज्यूधर्मियों ने पुनः ग़ुलामी में ही नये सहस्राब्द में (इसवीसन के दूसरे सहस्राब्द में – मिलेनियम में) प्रवेश किया था| अब गत लगभग ४५० वर्ष मुस्लिमों के विभिन्न खलिफाओं के वंशों का राज्य जेरुसलेम प्रान्त पर था| सारे युरोप भर में तथा मध्यपूर्व में भी अब बायझन्टाईन साम्राज्य को अरब आक्रमकों के […]

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५१. परतन्त्रता में एक और सहस्रक

५१. परतन्त्रता में एक और सहस्रक

ज्यूधर्म में निर्माण हुए सदूकी, फरिसी, एस्सेनी, झीलॉट् आदि गुटों में से सदूकी, एस्सेन, झीलॉट ये गुट इस पहले ज्युइश-रोमन युद्ध के बाद लगभग नामशेष ही हुए और उनमें से केवल फरिसीज् यह मध्यममार्गीय माना जानेवाला गुट ही अपना अस्तित्व बरक़रार रख सका| इन फरिसीज् से ही आगे चलकर ‘रब्बीनिक ज्युडाइझम’ (लिखित एवं मौखिक रूप […]

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