१०२. इस्रायली समाजजीवन

१०२. इस्रायली समाजजीवन

अस्तित्व बनाये रखने के लिए नवजात इस्रायल के – बस्तियों का निर्माण, जलआपूर्ति, ख़ेती, मत्स्यख़ेती आदि सभी क्षेत्रों में महत्प्रयास जारी थे और तब बतौर एक ‘समाज’ भी इस्रायल विकसित हो रहा था और उसके लिए इस्रायली समाजधुरीणों ने विशेष परिश्रम किये| स्वतंत्रतायुद्ध के ख़त्म होने के बाद और एक बार ये ऊपरोक्त प्रश्‍नों का […]

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१०१. ‘मेल्टिंग पॉट कल्चर’

१०१. ‘मेल्टिंग पॉट कल्चर’

किसी भी देश की कला-संस्कृति ये बातें उस देश के समाज का मानो प्रतिबिंब ही होते हैं और जनमानस से अंतरंग के दर्शन कराते हैं| विभिन्न कालखंडों में तैयार हुईं किसी देश की कलाकृतियों के आधार पर, उस उस कालखंड में होनेवाला वहॉं के जनमानस का रूझान समझने में सहायता हो सकती है| इस्रायल यह […]

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१००. इस्रायली शिक्षापद्धति

१००. इस्रायली शिक्षापद्धति

स्वतंत्र होते समय अविकसित माना जानेवाला अपने अथक परिश्रमों से विकसित कैसे बना, यह देखते हुए हमने अब तक, इस्रायल ने – डेव्हलपमेंट टाऊन्स, रेगिस्तान में ख़ेती, जलव्यवस्थापन, पानी के वैकल्पिक स्रोत, मत्स्यख़ेती आदि क्षेत्रों में की हुई प्रगति देखी| लेकिन ये सारीं इस्रायल के लिए, अपना अस्तित्व बनाये रखने के लिए आवश्यक ऐसीं मूलभूत […]

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९९. मत्स्यपालन

९९. मत्स्यपालन

‘मत्स्यपालन’ यह इस्रायल में कृषि के बाद का अहम व्यवसाय है| अब जिस देश को समुद्रकिनारा प्राप्त होता है, उस देश के मच्छिमारी से पूर्वापार मज़बूत रिश्ता होता ही है; फिर उसमें इस्रायल की क्या अलग बात है? तो इस्रायल केवल मच्छिमारी कर रहा न होकर ‘मत्स्यपालन’ यानी ‘मछलियों की ख़ेती’ करने पर ज़ोर देता […]

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९८. वैकल्पिक जलस्रोत

९८. वैकल्पिक जलस्रोत

इस्रायल ने अथक परिश्रमों से और संशोधन से, उत्तरी इस्रायलस्थित जलाशयों से दक्षिणी इस्रायल तक पानी पहुँचाकर शुरुआती दौर में जलसमस्या पर नियंत्रण तो पा लिया; लेकिन दिनबदिन बढ़ती हुई जनसंख्या को मद्देनज़र करते हुए और उसीके साथ इस्रायली समाज को हो रही प्रगति को देखते हुए पानी का विनियोग दिनबदिन बढ़ता ही जानेवाला था, […]

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९७. जलनियोजन

९७. जलनियोजन

हमारी इस वसुंधरा पृथ्वी पर लगभग ७०% पानी है। लेकिन आज वैश्‍विक जलपरिस्थिति को देखें, तो कई जगह अकाल की परिस्थिति दिखायी देती है। पानी के अभाव के कारण ख़ेती न कर सकने के उदाहरण दुनिया में कई जगहों में दिखायी देते हैं। उसीके साथ, कई भागों में, पीने के पानी के घूँट के लिए […]

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९६. दुनिया के लिए मार्गदर्शक इस्रायल का हायटेक कृषिसंशोधन

९६. दुनिया के लिए मार्गदर्शक इस्रायल का हायटेक कृषिसंशोधन

इस्रायल में जब ख़ेती का विचार किया जा रहा था, तब इस्रायल को अनगिनत मुश्किलों का सामना करना पड़ा। लेकिन उसी के कारण इस्रायल का कृषिसंशोधन यह सर्वसमावेशक साबित हुआ। ख़ेती के लिए पूरी तरह प्रतिकूल हालात होते हुए भी इस्रायल ने आज जो ‘कृषिप्रधान देश’ के रूप में अपनी पहचान बनायी है, वह केवल […]

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९५. कृषिसंशोधन

९५. कृषिसंशोधन

विद्यमान जागतिक जनसंख्यावृद्धि के रेट को देखते हुए, आनेवाले कुछ सालों में दुनिया की आबादी १० अरब तक जा पहुँचेगी, ऐसा डर अभ्यासक व्यक्त कर रहे हैं। इसलिए इस आबादी को जीने के लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता भी धीरे धीरे कम होती जायेगी, यह बात भी ज़ाहिर है। उसीके साथ – संसाधनों की फ़ज़ूलखर्ची, […]

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९४. रेगिस्तान में ख़ेती

९४. रेगिस्तान में ख़ेती

जिस प्रकार इस्रायल के डेव्हलपमेंट टाऊन्स का ज़िक्र किया, तो एरिएह शेरॉन का नाम सामने आता है, उसी प्रकार नेगेव्ह के रेगिस्तान के विकास का ज़िक्र होने पर एक ऐसा ही नाम आँखों के सामने आ जाता है – ‘मेनाकेम पर्लमटर’! सन १९२८ में तत्कालीन झेकोस्लोव्हाकिया में जन्मे पर्लमटर का नाम ‘नेगेव्ह विकास के शिल्पकार’ […]

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९३. ज़मीन और ख़ेती

९३. ज़मीन और ख़ेती

डेव्हिड बेन-गुरियन के बारे में एक क़िस्सा बताया जाता है। एरिएह शेरॉन की टीम ने बनाये मास्टर प्लॅन के अनुसार पूरे इस्रायल भर में डेव्हलपमेंट टाऊन्स का निर्माण होने जा रहा था, वैसा वह नेगेव्ह के रेगिस्तान में भी करने की योजना बनायी जा रही थी। इस्रायल के कुल क्षेत्रङ्गल के आधे से भी अधिक […]

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