५३. ‘नेक्स्ट इयर इन जेरुसलेम’

५३. ‘नेक्स्ट इयर इन जेरुसलेम’

‘नेक्स्ट इयर इन जेरुसलेम….’ हर साल ‘पासओव्हर’ और ‘योमकिप्पूर’ इन ज्यूधर्मीय त्यौहारों में की जानेवालीं प्रार्थनाओं के अन्त में, सालों साल….सदियों से, दुनिया के किसी भी कोने में होनेवाला (‘ज्यू डायस्पोरा’ में स्थित) हर एक ज्यूधर्मीय उपरोक्त शब्द कहता आया है….और ये शब्द बिलकुल भक्तिभाव के साथ और विश्‍वासपूर्वक कहते हुए वह थोड़ासा भी ऊबा […]

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५२. आधुनिक इतिहास की दहलीज़ पर

५२. आधुनिक इतिहास की दहलीज़ पर

इस प्रकार जेरुसलेमस्थित ज्यूधर्मियों ने पुनः ग़ुलामी में ही नये सहस्राब्द में (इसवीसन के दूसरे सहस्राब्द में – मिलेनियम में) प्रवेश किया था| अब गत लगभग ४५० वर्ष मुस्लिमों के विभिन्न खलिफाओं के वंशों का राज्य जेरुसलेम प्रान्त पर था| सारे युरोप भर में तथा मध्यपूर्व में भी अब बायझन्टाईन साम्राज्य को अरब आक्रमकों के […]

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५१. परतन्त्रता में एक और सहस्रक

५१. परतन्त्रता में एक और सहस्रक

ज्यूधर्म में निर्माण हुए सदूकी, फरिसी, एस्सेनी, झीलॉट् आदि गुटों में से सदूकी, एस्सेन, झीलॉट ये गुट इस पहले ज्युइश-रोमन युद्ध के बाद लगभग नामशेष ही हुए और उनमें से केवल फरिसीज् यह मध्यममार्गीय माना जानेवाला गुट ही अपना अस्तित्व बरक़रार रख सका| इन फरिसीज् से ही आगे चलकर ‘रब्बीनिक ज्युडाइझम’ (लिखित एवं मौखिक रूप […]

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५०. पहला ज्यूइश-रोमन युद्ध; दूसरे होली टेंपल का ध्वंस

५०. पहला ज्यूइश-रोमन युद्ध; दूसरे होली टेंपल का ध्वंस

इसवीसन ६६ में पहले ज्यूइश-रोमन युद्ध की शुरुआत हुई, लेकिन उसके बीज इसवीसन ६ में ही बोये गये थे। स्थानीय रोमन अधिकारियों का दमनतन्त्र और उनका भ्रष्टाचार तथा रोमन शासकों का ज्यूधर्मतत्त्वों को मनाही करनेवाला रवैया इनके कारण दिनबदिन ज्यूधर्मियों में असंतोष बढ़ता ही जा रहा था। गॅमला के ज्युडास के बाद इस बग़ावत का […]

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४९. ज्यूधर्मियों की रोमनों के खिलाफ़ बग़ावत

४९. ज्यूधर्मियों की रोमनों के खिलाफ़ बग़ावत

मॅथॅटियस ने सेल्युसिड साम्राज्य के साथ शुरू की हुई, ज्यूधर्मियों पर लगाये गये धार्मिक निर्बन्धों के खिलाफ़ की लड़ाई को उसके इसवीसनपूर्व ३७ में रोमन शासकों ने हेरॉड को बतौर ‘ज्युडिआ का राजा’ मान्यता दी। अगले ३३ साल यानी इसवीसनपूर्व ४ में हुई हेरॉड की मृत्यु तक उसकी यह सत्ता अबाधित रही। इस प्रान्त का […]

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४८. ज्यूधर्मियों पर रोमन लोगों का शासन

४८. ज्यूधर्मियों पर रोमन लोगों का शासन

मॅथॅटियस ने सेल्युसिड साम्राज्य के साथ शुरू की हुई, ज्यूधर्मियों पर लगाये गये धार्मिक निर्बन्धों के खिलाफ़ की लड़ाई को उसके बेटे ज्युडास ने अंजाम दे दिया; इतना ही नहीं, बल्कि ज्युडास के भाइयों ने तथा भतीजे ने अगले २५ साल – सेल्युसिड्स के साथ भी और अपनों में ही रहनेवाले ग्रीकपरस्त ज्यूधर्मियों से भी […]

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४७. मॅक्कबीज् की बग़ावत; ‘हनुक्का’ त्योहार

४७. मॅक्कबीज् की बग़ावत; ‘हनुक्का’ त्योहार

अब तक ज्यूधर्मियों पर राज किये विदेशी राज्यकर्ताओं में जिसे सबसे अधिक क्रूर कहा जा सकता है, ऐसे अँटिओकस (चतुर्थ) ने ज्यूधर्मियों पर दमनतन्त्र का कहर ढ़ाया था| अपने साम्राज्य में ग्रीकीकरण के कार्यक्रम पर जोरोंशोरों से अमल करते हुए उसने, ज्यूधर्मियों पर उनकी – शब्बाथ का पालन करना आदि धार्मिक रूढ़ियों-परंपराओं का व्यक्तिगत रूप […]

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४६. सेल्युसिड्स द्वारा ज्यूधर्मियों के साथ अपमानकारक सुलूक़

४६. सेल्युसिड्स द्वारा ज्यूधर्मियों के साथ अपमानकारक सुलूक़

टोलेमियों के नियंत्रण में रहकर ग्रीक संस्कृति का ऐसा अतिक्रमण ज्यूधर्मीय सह रहे थे, तभी ग्रीक साम्राज्य के पूर्वी भाग में ‘सेल्युकस’ नामक दूसरे एक सिरियन-ग्रीक सरदार का उदय हो चुका था। उसने वहाँ पर इसवीसनपूर्व ३१५ तक अपना ‘सेल्युसिड’ साम्राज्य स्थापित किया था। अलेक्झांडर के बाद उसके प्रमुख सरदारों में हुए उसके साम्राज्य के […]

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४५. ग्रीक संस्कृति का आकर्षण

४५. ग्रीक संस्कृति का आकर्षण

ग्रीक सम्राट ‘अलेक्झांडर द ग्रेट’ के असामयिक निधन के बाद उसके उत्तराधिकारी का सवाल उपस्थित हुआ, क्योंकि उसने कोई उत्तराधिकारी को चुना ही नहीं था| इस कारण, अब तक उसके साथ सभी मुहिमों पर उसके कन्धे से कन्धा मिलाकर खड़े रहे उसके सेना-अधिकारियों में, ग्रीक साम्राज्य पर – ख़ासकर उसमें अलेक्झांडर ने जीतकर समाविष्ट किये […]

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४४. ज्युडाह प्रांत ‘अलेक्झांडर’ के ग्रीक साम्राज्य का हिस्सा

४४. ज्युडाह प्रांत ‘अलेक्झांडर’ के ग्रीक साम्राज्य का हिस्सा

इसी दौरान, सायरस ने मज़बूत कर रखा पर्शियन साम्राज्य उसके बेटे कंबायसेस-२ ने बढ़ाया ही था| अब तो इजिप्त भी पर्शियन साम्राज्य में समाविष्ट हुआ था| इस साम्राज्य का अब कंबायसेस के पुत्र दारियस ने और भी विस्तार किया| ज्युडाह प्रांत यह इन सभी शासकों की ख़ास मर्ज़ी होनेवाला प्रदेश था और इस प्रान्त को […]

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