९२. डेव्हलपमेंट टाऊन्स्

९२. डेव्हलपमेंट टाऊन्स्

एरिएह शेरॉन इस इस्रायली आर्किटेक्ट ने उसकी टीम के, नगररचना-गृहनिर्माण-स्थापत्यशास्त्र-अर्थ ऐसे विभिन्न क्षेत्रों के लगभग १८० विशेषज्ञों की सहायता से ‘नॅशनल डेव्हलपमेंट प्लॅन’ तैयार किया। वह इस्रायल के बुनियादी सुविधाओं के विकास का मानो मूलमंत्र – ‘मास्टर प्लॅन’ ही साबित हुआ। इस मास्टर प्लॅन का मुख्य उद्देश्य था – इस्रायल की स्वतन्त्रता के बाद दुनियाभर […]

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९१. इस्रायली समाजव्यवस्था की नींव

९१. इस्रायली समाजव्यवस्था की नींव

इस्रायल के लिए १९५० का दशक यह वैसे देखा जाये, तो ‘रेशनिंग सिस्टीम’ अर्थात् ‘ऑस्टेरिटी मेझर्स’ का ही साबित हुआ| लेकिन आगामी इस्रायली समाजव्यवस्था की नींव भी इसी दशक में बनायी गयी| आज हालॉंकि इस्रायल की गणना ‘विकसित राष्ट्रों’ में की जाती है, १९५० के दशक में वह इस संज्ञा से कोसों दूर था| बहुत […]

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९०. मुआवजा….

९०. मुआवजा….

‘ऑस्टेरिटी मेझर्स’ यानी मितव्ययिता के उपाय एक हद तक व्यवहार्य साबित होनेवाले थे, उसके आगे नहीं| जागतिक ज्यूधर्मियों से और ज्यू-मित्रों से सहायता हालॉंकि जारी थी, लेकिन ज्यू स्थलांतरितों का प्रवाह तो अव्याहत रूप में चालू ही था| गत कुछ महीनों से बेन-गुरियन के दिमाग में कुछ तो वैकल्पिक योजना बनाने के विषय में विचार […]

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८९. पहली कसौटी तथा उपाययोजना

८९. पहली कसौटी तथा उपाययोजना

लेकिन युनो ने किये विभाजन में, ज्यूधर्मियों के हिस्से में बहुत ही कम ऊपजाऊ या ख़ेतीयोग्य ज़मीन आयी थी, बाकी कुल मिलाकर शुष्क रेगिस्तानी ज़मीन ही थी।जन्मते ही अरब राष्ट्रों के साथ घमासान युद्ध का सामना करना पड़े हुए इस्रायल की स्थिति, उस युद्ध को जीतकर भी कुछ अच्छे नहीं थे। एक तो युद्ध का […]

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८८. युद्धविराम समझौता; स्वतंत्र इस्रायल की मार्गक्रमणा शुरू

८८. युद्धविराम समझौता; स्वतंत्र इस्रायल की मार्गक्रमणा शुरू

सन १९४८ के अरब-इस्रायल युद्ध में इस्रायल की विजय हुई। इस्रायल के चारों ओर से आक्रमण कर आयीं ५ अरब देशों की शस्त्रसुसज्जित ताकतवर सेनाएँ बनाम बहुत ही कम युद्धसामग्री के साथ, अपर्याप्त सैनिकबल के साथ उनका प्रतिकार करनेवाली इस्रायली सेना ऐसा यह विषम सामना इस्रायल ने अनगिनत अड़चनों को मात देकर जीता। अरब सेनाएँ […]

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८७. ऑपरेशन बालाक; अरब निर्वासित समस्या भड़की

८७. ऑपरेशन बालाक; अरब निर्वासित समस्या भड़की

सन १९४८ के अरब-इस्रायल युद्ध में शुरू के कुछ दिन ही सही, लेकिन इस्रायल की अपर्याप्त युद्धसामग्री के कारण अरबों का पल्ड़ा भारी होने लगा। तब विदेशस्थित, दुनियाभर में बिखेरे हुए ज्यूधर्मियों ने अपनी इस मातृभूमि को इस संकट से बाहर निकालने की ठान ली और अल्प-अवधि में ही इस्रायल की ओर पैसों की तथा […]

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८६. १९४८ का अरब-इस्रायल युद्ध

८६. १९४८ का अरब-इस्रायल युद्ध

इस्रायल की भूमि में स्वतंत्र ज्यू-राष्ट्र स्थापन हुआ होने की घोषणा करके डेव्हिड बेन-गुरियन ठेंठ तेल अवीव्हस्थित अपने सेना-मुख्यालय की ओर रवाना हुए थे। इस नये राष्ट्र ने जनतन्त्र शासनपद्धति अपनायी होने के कारण उसके शासक ये चुनाव पद्धति से ही चुने जानेवाले थे। लेकिन पहले चुनाव होने तक के समय में अंतरिम सरकार शासन […]

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८५. धरातल पर आधुनिक ‘इस्रायल’ का जन्म

८५. धरातल पर आधुनिक ‘इस्रायल’ का जन्म

‘हम इस इस्रायल की भूमि में ज्यू-राष्ट्र स्थापन हुआ होने की घोषणा इसके द्वारा कर रहे हैं’ – डेव्हिड बेन-गुरियन ने अपनी धीरगंभीर आवाज़ में घोषित किया। १४ मई १९४८ के इस समारोह की शुरुआत ‘हातिक्वा’ (जो आगे चलकर इस्रायल का राष्ट्रगीत बन गया) गायन से हुई थी। उसके बाद डेव्हिड बेन-गुरियन ने धीरगंभीरतापूर्वक ज्यूराष्ट्र-स्थापना […]

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८४. १४ मई १९४८

८४. १४ मई १९४८

१५ मई १९४८ यह तारीख़ जैसे जैसे नज़दीक आती गयी, वैसे वैसे डेव्हिड बेन-गुरियन अधिक से अधिक बेचैन होने लगे। वैसे देखा, तो पॅलेस्टाईन प्रांत में चल रहे अरब-ज्यू युद्ध में हर जगह ज्यूधर्मियों का ही पलड़ा भारी होता हुआ नज़र आ रहा था और पॅलेस्टाईन भर के अरब निवासी प्राणभय से अपना अपना बोरियाबिस्तरा […]

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८३. ऑपरेशन नाहशॉम और हॅगाना का ‘प्लॅन डी’

८३. ऑपरेशन नाहशॉम और हॅगाना का ‘प्लॅन डी’

८ अप्रैल १९४८ की डेईर यासिन की लड़ाई के बाद, तब तक आक्रमक होनेवाले पॅलेस्टिनी अरब बचावात्मक बन गये; वहीं, तब तक अरबी आक्रमण के खिलाफ़ बचावात्मक भूमिका अपनानेवाले ज्यूधर्मीय आक्रमक बन गये। जैसे जैसे ब्रिटीश पॅलेस्टाईन प्रांत से निकल जाने की आख़िरी तारीख़ (१४ मई १९४८) क़रीब आने लगी, संघर्ष और भी तीव्र होने […]

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