८५. धरातल पर आधुनिक ‘इस्रायल’ का जन्म

८५. धरातल पर आधुनिक ‘इस्रायल’ का जन्म

‘हम इस इस्रायल की भूमि में ज्यू-राष्ट्र स्थापन हुआ होने की घोषणा इसके द्वारा कर रहे हैं’ – डेव्हिड बेन-गुरियन ने अपनी धीरगंभीर आवाज़ में घोषित किया। १४ मई १९४८ के इस समारोह की शुरुआत ‘हातिक्वा’ (जो आगे चलकर इस्रायल का राष्ट्रगीत बन गया) गायन से हुई थी। उसके बाद डेव्हिड बेन-गुरियन ने धीरगंभीरतापूर्वक ज्यूराष्ट्र-स्थापना […]

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८४. १४ मई १९४८

८४. १४ मई १९४८

१५ मई १९४८ यह तारीख़ जैसे जैसे नज़दीक आती गयी, वैसे वैसे डेव्हिड बेन-गुरियन अधिक से अधिक बेचैन होने लगे। वैसे देखा, तो पॅलेस्टाईन प्रांत में चल रहे अरब-ज्यू युद्ध में हर जगह ज्यूधर्मियों का ही पलड़ा भारी होता हुआ नज़र आ रहा था और पॅलेस्टाईन भर के अरब निवासी प्राणभय से अपना अपना बोरियाबिस्तरा […]

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८३. ऑपरेशन नाहशॉम और हॅगाना का ‘प्लॅन डी’

८३. ऑपरेशन नाहशॉम और हॅगाना का ‘प्लॅन डी’

८ अप्रैल १९४८ की डेईर यासिन की लड़ाई के बाद, तब तक आक्रमक होनेवाले पॅलेस्टिनी अरब बचावात्मक बन गये; वहीं, तब तक अरबी आक्रमण के खिलाफ़ बचावात्मक भूमिका अपनानेवाले ज्यूधर्मीय आक्रमक बन गये। जैसे जैसे ब्रिटीश पॅलेस्टाईन प्रांत से निकल जाने की आख़िरी तारीख़ (१४ मई १९४८) क़रीब आने लगी, संघर्ष और भी तीव्र होने […]

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८२. बाजी पलट गयी

८२. बाजी पलट गयी

युनो के पॅलेस्टाईन विभाजन के निर्णय के दूसरे ही दिन से पॅलेस्टाईन प्रांत में भड़का हुआ अरब-ज्यू संघर्ष का दावानल शान्त होने का नाम ही नहीं ले रहा था। इन कुल मिलाकर विस्फोटक हालातों को देखकर मार्च १९४८ में अमरीका ने, युना के पॅलेस्टाईन-विभाजन के इस प्रस्ताव को होनेवाला अपना समर्थन पीछे लेने की घोषणा […]

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८१. अंतिम संघर्ष शुरू….

८१. अंतिम संघर्ष शुरू….

युनो ने हालॉंकि ‘पॅलेस्टाईन में ज्यू-राष्ट्र’ इस संकल्पना को मान्यता दी; लेकिन रास्ते में काफ़ी मुश्किलें आनेवालीं थीं और इसकी डेव्हिड बेन-गुरियन को अच्छीख़ासी कल्पना थी| इसी कारण गत कुछ महीनों से हॅगाना का संख्याबल एवं शस्त्रबल बढ़ाने के लिए वे जानतोड़ कोशिशें कर रहे थे| अहम बात यानी हॅगाना यह केवल एक भूमिगत सशस्त्र […]

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८०. आख़िरकार….आंतरराष्ट्रीय मान्यता

८०. आख़िरकार….आंतरराष्ट्रीय मान्यता

पॅलेस्टाईन मसले पर नियुक्त की गयी युनो की विशेष समिति (‘युनायटेड नेशन्स स्पेशल कमिटी ऑन पॅलेस्टाईन’ (‘युएनस्कॉप’)) ने सुझाये हुए पॅलेस्टाईन के विभाजन के पर्याय पर अब युनो क्या फैसला करती है, इसकी ओर पूरी दुनिया का ध्यान केंद्रित हो चुका था। लेकिन इस्रायली नेता – ख़ासकर डेव्हिड बेन-गुरियन – तब तक हाथ पर हाथ […]

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७९. ब्रिटन के कन्धे पर से युनो के आँगन में….

७९. ब्रिटन के कन्धे पर से युनो के आँगन में….

सन १९४७ की शुरुआत में ही, ब्रिटीश मंत्रिमंडल की ‘उस’ बैठक के बाद ब्रिटन का पॅलेस्टाईन प्रश्‍नविषयक अगामी रूख स्पष्ट हुआ था, जो अरबों के पक्ष में होने के कारण ज्यूधर्मियों के लिए निराशाजनक ही था। ब्रिटिशों के लिए, अपने मध्यपूर्वी इलाके के हितसंबंध मह़फूज़ रखने के लिए अरबों का सहयोग अत्यधिक ज़रूरी होने के […]

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७८. १९४७….

७८. १९४७….

२२वीं झायॉनिस्ट काँग्रेस की भरी सभा में से डेव्हिड बेन-गुरियन ग़ुस्सा होकर जो बाहर निकले, वे ठेंठ अपने होटल गये और उन्होंने अपना सामान बाँधने की शुरुआत की। उनकी सहनशक्ति ख़त्म हुई थी। मन में तेज़ रफ़्तार से विचार दौड़ रहे थे – ‘ज्यूधर्मियों को उनकी हक़ की भूमि के लिए अभी तक दुनिया के […]

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७७. अब चर्चाएँ बस करो….

७७. अब चर्चाएँ बस करो….

अब चर्चाएँ बस करो…. जेरुसलेमस्थित हॉटेल डेव्हिड पर ‘इर्गुन’ ने किये हमले के बाद पॅलेस्टाईन प्रांत के ब्रिटीश प्रशासन के ज्यूधर्मियों के खिलाफ़ चलाये गये दमनतन्त्र में काफ़ी हद तक वृद्धि हो चुकी थी। उसीके साथ, यह कृत्य मान्य न होनेवाले हॅगाना के इर्गुन के साथ होनेवाले वैचारिक मतभेद चरमसीमा तक जाकर उनके मार्ग अलग […]

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७६. धीरे धीरे सशस्त्र स्वतंत्रतासंग्राम की ओर….

७६. धीरे धीरे सशस्त्र स्वतंत्रतासंग्राम की ओर….

धीरे धीरे सशस्त्र स्वतंत्रतासंग्राम की ओर…. अब युद्ध अटल है, इसका अँदाज़ा हो जाने के कारण ज्यूधर्मियों ने उस दृष्टि से पॅलेस्टाईन में अपना संख्याबल एवं युद्धसंसाधन बढ़ाने की, साथ ही बंजर ज़मीनों पर ज्यू-बस्तियों का निर्माण करने की ज़ोरदार शुरुआत की थी। ब्रिटीश सरकार ने लगायी हुईं स्थलांतरण पर की पाबंदियों को ठुकराकर, हॅगाना […]

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