डॉ. यश पाल

डॉ. यश पाल

अवकाश संशोधन क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण योगदान देनेवाले वैज्ञानिक विभिन्न प्रकार की चुनौतियाँ हमारे समक्ष समय-समय पर आ खड़ी होती हैं और उन्हीं चुनौतियों के अनुसार समाज बड़े-बड़े विद्वानों के, विचारकों के, वैज्ञानिकों के मतानुसार उन चुनौतियों का उत्तर ढूँढ़ने की कोशिशें करता रहता है। समाज प्रबोधन हेतु भी अनेक वैज्ञानिक आगे बढ़ते हुए दिखाई देते […]

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आर्थर क्लार्क ‘उपग्रह संदेशवहन के जनक’ (१९१७-२००८)

आर्थर क्लार्क  ‘उपग्रह संदेशवहन के जनक’ (१९१७-२००८)

मानव यह एक ऐसा प्राणि है, जिसकी कल्पना उसके कार्य से काफी आगे की कथाएँ होती हैं, इसी लिए कालानुसार अन्य साहित्य-सामग्रियों की तुलना में वैज्ञानिक ही स्थिर रह सकते हैं।’ यह थी आर्थर क्लार्क की राय। इंग्लैंड में जन्मे क्लार्क को आर्थिक परेशानियों के कारण महाविद्यालयीन शिक्षा हासिल करना संभव नहीं था। १९४१-४६ की […]

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कार्ल सेगन (१९३४-१९९६)

कार्ल सेगन (१९३४-१९९६)

बीसवीं सदी के प्रमुख शास्त्रज्ञों के नाम यदि पूछे जायें तो अनेकों लोग तुरंत ही आईनस्टाईन का नाम ले लेंगे। कार्ल सेगन के नाम के इर्दगिर्द किसी भी प्रकार का प्रभामंडल नहीं है। ऐसा होने के बावजूद भी पाश्‍चात्य देशों में उनका नाम सर्वतोमुख होने का कारण यह है कि आधुनिक विज्ञान को अत्यन्त आर्कषक […]

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जोसेफ स्वान (१८२८-१९१४)

जोसेफ स्वान (१८२८-१९१४)

सार्वजनिक तौर पर सर्वप्रथम बिजली के दीप जगमगा उठे, वह केवल जोसेफ स्वान नामक एक असामान्य संशोधनकर्ता के ही कारण। स्कूली शिक्षा कुछ अधिक न होने के बावजूद भी स्वान अकसर आनंदित रहा करते थे। विशेष शिक्षित न होनेवाले स्वान के पास अनेक प्रकार की व्यावसायिक शिक्षा एवं कार्यों का तजुर्बा था। डोरियों में बल […]

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सर डेव्हिड ब्रुस्टर (१७८१-१८६८)

सर डेव्हिड ब्रुस्टर (१७८१-१८६८)

इंग्लैड के राजा चौथे विल्यम उमदा व्यक्तित्व के होने कारण उन्होंने ड्यूक ऑफ डेव्हनशायर की तलवार लेकर डेव्हिड ब्रुस्टर के कांधे पर रखकर उन्हें अपने सरदार-दल में शामिल कर लिया। आजकल तो यह सब कुछ काफी उत्साह के साथ किया जाता है, मग़र फिर भी विज्ञान एवं वैज्ञानिकों को राजमान्यता प्राप्त करानेवाली यह प्रथम घटना […]

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डॉ. व्लादिमीर हाफकिन (१८६०-१९३०)

डॉ. व्लादिमीर हाफकिन (१८६०-१९३०)

प्लेग के जीवाणुओं की खोज यार्सिन और किटासावे ने की, वहीं कॉलरा के जीवाणुओं की खोज कॉक ने की। जीवाणुजन्य रोगों का प्रतिकार करने का मार्ग पाश्‍चर ने दिखाया। विज्ञान की इस अन्वेषण-गंगा को करोड़ों लोगों तक पहुँचाने का यह कार्य व्लादिमीर हाफकिन ने किया। इसके लिए उन्होंने दिन-रात एक कर शारीरिक-मानसिक कष्ट, आर्थिक विवंचना, […]

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सर्पविशेषज्ञ डॉ. रेमंड डिटमार्स (१८७६-१९४२) – भाग २

सर्पविशेषज्ञ डॉ. रेमंड डिटमार्स (१८७६-१९४२) – भाग २

न्यूयॉर्क झूलॉजिकल पार्क के सर्पोद्यान के व्यवस्थापक के रूप में १७ जुलाई १८९९ से डॉ. रेमंड कार्यभार सँभालने लगे। स्वयं का सर्प संग्रह भी उन्होंने उस उद्यान में उपहार-स्वरूप में दे दिया था। सर्पोद्यान यह प्रेक्षकों के लिए खास तौर पर उनके आकर्षण का केन्द्र साबित हुआ। अनेक क्षेत्रों के लोग रेमंड के संपर्क में […]

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सर्पविशेषज्ञ डॉ. रेमंड डिटमार्स (१८७६-१९४२) – भाग १

सर्पविशेषज्ञ डॉ. रेमंड डिटमार्स (१८७६-१९४२) – भाग १

आज और क्या ले आये जेब में डालकर? रेमंड की दादी गुस्से से पूछती थीं और कुछ निकालकर दिखा देने पर और भी अधिक चीढ़ जाती थीं। मेंढ़क, साँप, टिड्डा, गिरगिर, कीड़े, पतंगे, तितलियों के समान सभी जीव उनके मित्र-सखा हुआ करते थे। नन्हें रेमंड का एक अजीबो-गरीब अनोखा ही शौक था, साँप पालने का […]

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विल्यम मेयो और उनका परिवार भाग – २

विल्यम मेयो और उनका परिवार भाग – २

मानवों के उद्धार हेतु अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर देनेवाले पुण्यात्मा पृथ्वीपर चिरंतन कार्य करते हुए काल के गर्त में समा जाते हैं। ‘मेयो क्लिनिक’ की जन्मकथा भी कुछ ऐसी ही आनेवाली पिढ़ी के लिए एक प्रेरणा स्तोत्र है। डॉ. विल्यम मेयो और उनकी पत्नी इन दोनों के प्रतीकात्मक स्वरूप में प्रसिद्धि प्राप्त करनेवाले डॉ. […]

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विल्यम मेयो और उनका परिवार भाग – १

विल्यम मेयो और उनका परिवार भाग – १

जीवनभर अपनी मेहनत, अपने परिवार की कमाई दूसरों के क्षेमकल्याण हेतु उपयोग में लाकर इस धरती पर स्वर्ग का निर्माण करनेवाले थे, डॉ. विल्यम मेयो। उनके द्वारा लगाए गए एक छोटे से पौधे ने आज विशाल वृक्ष का रूप धारण कर लिया है। इंग्लैंड में ‘इक्कल्स’ नामक गाँव में ३१ मई १८१९ के दिन डॉ.विल्यम […]

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