कृष्णमेघ कुंटे भाग – १

कृष्णमेघ कुंटे भाग – १

वास्तविक तौर पर मेरा समय व्यतीत हो रहा था, परन्तु दिमाग में कुछ चल रहा था। आस-पास कुछ कर दिखाने योग्य नज़र नहीं आ रहा था, फिर भी मन में होने वाले विश्वास की पकड़ ढीली नहीं पड़ी थी। दसवी में गणित एवं बारहवी में रसायनशास्त्र इन विषयों में मैं केवल बोर्ड की कृपा से […]

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प्रफुल्लचंद्र रॉय (१८६१-१९४४)

प्रफुल्लचंद्र रॉय (१८६१-१९४४)

विदेशी वस्तुओं पर निर्भर रहना, उनके प्रति प्रलोभन होना यह किसी भी देश के हित के लिए ठीक नहीं है। श्रमिकों का तन, ग्राहकों का मन और देश का धन इन सब के प्रति प्रयत्नपूर्वक, निपुणता से किया गया नैतिक विचार है स्वदेशी। स्वतंत्रता आंदोलन में स्वदेशी, स्वराज्य, राष्ट्रीय शिक्षा ये आचार सूत्र थे। विदेशी […]

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डॉ. जयंत नारळीकर – भाग २

डॉ. जयंत नारळीकर – भाग  २

वैज्ञानिकों को दिखाई देनेवाला ‘विश्वरुप दर्शन’ चाहे कितना भी गूढ़ एवं अद्‌भुत क्यों न हो, फिर भी उसके बारे में जानने का उनका प्रयास चलता ही रहेगा, क्योंकि कोशिशों से ही खगोलशास्त्र की एवं विज्ञान की प्रगति होती रहती है। जिज्ञासा-प्रयोग-निरीक्षण-कारणमीमांसा-भविष्य इस शृंखला से विज्ञान की खोजें होती रहती हैं। डॉ. नारलीकर का प्रमुख काम […]

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डॉ. जयंत नारळीकर – भाग १

डॉ. जयंत नारळीकर – भाग १

अनंत काल से ही अंतरिक्ष में दिखाई देने वाले ग्रहों एवं तारों के प्रति मानव मन में हमेशा से ही कौतूहल रहा है। आखिर इन सब का अंतरिक्ष में क्या प्रयोजन हो सकता है? इस बात की जानकारी हासिल करने हेतु उसने उनकी एक-दूसरे के साथ-साथ सूर्य की भी तुलना ज़रूर की होगी। संस्कृति के […]

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डॉ. राम ताकवले

डॉ. राम ताकवले

बीसवीं शताब्दी के अंतिम चरण में भारत में ज्ञान का रूपांतरण संपत्ति में करने की क्षमता रखनेवाले विभिन्न क्षेत्र विकसित होने लगे थे। इस ज्ञानयुग में भारत प्राचीन काल से ही महत्त्वपूर्ण देश माना जाता है। विविध प्रकार की क्रांति के पीछे शैक्षणिक प्रगति का काफी बड़ा योगदान रहा है। अनेक वैज्ञानिकों ने अपने-अपने कार्यकाल […]

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डॉ. अरुण निगवेकर

डॉ. अरुण निगवेकर

वैज्ञानिक की छबी हमारे मन में प्राय: एकान्त में रहकर संशोधन कार्य करने वाले ज्ञानी के रूप में उभरती है, लेकिन आज के दौर के संशोधक-वैज्ञानिक एकाकीपन को छोड़कर समाज में मिलजुलकर विज्ञान के प्रचार-प्रसार का काम करते हुए नज़र आते हैं। पुराने समय के वैज्ञानिक अपने स्वयं के संशोधन में ही पूर्ण रूप से […]

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डॉ. अशोक कोलासकर

डॉ. अशोक कोलासकर

राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुणे विश्‍वविद्यालय के कुछ वैज्ञानिकों का सम्मानपूर्वक उल्लेख किया जाता है। पुणे महाविद्यालय के भूतपूर्व उपकुलगुरु डॉ. अशोक सदानंद कोलासकर का भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिकों में विशेष तौर पर उल्लेख किया जाता है। आज के समय के वैज्ञानिक भी उनके संशोधनकार्य के साथ साथ अन्य प्रशासनिक कार्यों में भी […]

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अंतरिक्ष-शास्त्र वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई भाग-२

अंतरिक्ष-शास्त्र वैज्ञानिक  डॉ. विक्रम साराभाई भाग-२

उपग्रह, अंतरिक्ष संशोधन ऐसे क्षेत्रों में जो कुछ भी भव्यदिव्य कार्य आज दिखाई देता है, उसकी नींव डालनेवाले शास्त्रज्ञ के रूप में जाने-माने डॉ. भाभा के समकालीन एक अंतरराष्ट्रीय कीर्ति प्राप्त वैज्ञानिक थे, डॉ. विक्रम साराभाई। डॉ. साराभाई को आदर्श मानकर उनके बाद के अनेक संशोधकों ने उनसे प्रेरणा लेकर संशोधन के इस भार को, […]

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डॉ. विक्रम साराभाई भाग-१

डॉ. विक्रम साराभाई भाग-१

हमारे देश का स्वतन्त्रता-प्राप्ति के बाद स्वतंत्र एवं समर्थ अंतरिक्ष संशोधन करने का सपना साकार करने का कार्य जिन वैज्ञानिकों ने साकार किया, उनमें से एक प्रमुख नाम है, डॉ. विक्रम साराभाई। उन्होंने चुनौतियों का स्वीकर कर देश के सपने को प्रत्यक्ष रूप में साकार करने की दिशा में कदम आगे बढ़ाये। इन प्रयासों को […]

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डॉ. व्ही. जी. भिडे

डॉ. व्ही. जी. भिडे

‘लिक्विड क्रिस्टल डिजिटल डिसप्लेज’ तकनीक के विज्ञानविद् वैज्ञानिक दृष्टिकोन रखनेवाले विज्ञाननिष्ठ समाज के निर्माण हेतु वैज्ञानिकों (संशोधनकर्ताओं) ने कोशिशें कीं, यह हम जानते हैं। डॉ. व्ही. जी. भिड़े के समान अनेक वैज्ञानिक देश के विकासकार्य हेतु कटिबद्ध होने के कारण आज हम अविकसित नहीं हैं, बल्कि प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ते ही चले जा […]

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