श्रीसाईसच्चरित : अध्याय-३ : भाग-८३

श्रीसाईसच्चरित : अध्याय-३ : भाग-८३

रोहिले की कथा से सीख लेते समय हमने यह सीखा की भक्तिमार्ग पर चलते हुए स्वयं की प्रगति करने की इच्छा रखनेवाले मेरे मन में जब-जब भी अनचाही यादें भूतकाल के गलतियों की डाकिने परेशान करने की कोशिश करने लगती हैं अथवा भविष्यकाल की चिंताएँ मुझे ग्रसित करने की कोशिशें करने लगती हैं। ऐसे में […]

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श्रीसाईसच्चरित : अध्याय-३ : भाग-८२

श्रीसाईसच्चरित : अध्याय-३ : भाग-८२

शिरडी में आनेवाले रोहिले की कथा का अध्ययन हम जितना अधिक करेंगे उतना कम ही है। रोहिला एवं उसके साथ न रह सकनेवाली रोहिली ये दो वृत्तियाँ हैं, दो दिशाएँ हैं। रोहिला एवं रोहिली इन रूपकों के आधार पर साईनाथ इस कथा के माध्यम से हमें हमारे जीवन के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यन्त मौलिक […]

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श्रीसाईसच्चरित : अध्याय-३ : भाग-८१

श्रीसाईसच्चरित : अध्याय-३ : भाग-८१

श्रीसाईनाथ का गुणसंकीर्तन फलाशा का पूर्णविराम किस तरह से करता है इससे संबंधित अध्ययन हमने पिछले अध्याय में देखा। रोहिली का एक अर्थ जिस तरह हमने पिछले लेख में देखा ‘फलाशा’। बिलकुल उसी तरह भक्तिमार्ग में आनेवाली सिद्धियाँ, ये भी रोहिली ही हैं। ‘सिद्धियाँ’ जैसे योगमार्ग में प्राप्त होती हैं, वैसे ही भक्तिमार्ग में भी […]

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श्रीसाईसच्चरित : अध्याय-३ : भाग-८०

श्रीसाईसच्चरित : अध्याय-३ : भाग-८०

शिरडी में आनेवाला रोहिला सचमुच निरपेक्ष प्रेम से आया था, बाबा के गुणों से मोहित होकर वह आया था और उसने स्वयं को बाबा के चरणों पर अर्पित कर दिया था। शिरडी में आया एक रोहिला। वह बाबा के गुणों से मोहित हो गया। वहीं पर काफ़ी दिनों तक रहा। प्रेम लुटाता रहा बाबा के […]

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श्रीसाईसच्चरित : अध्याय-३ : भाग-७९

श्रीसाईसच्चरित : अध्याय-३ : भाग-७९

पुष्प खिले जो मेरे। अर्पण कर दिया आपको। आपका आपको ही देकर। संतुष्ट मैं रहता हूँ। (पुष्प उमलले जे माझे। वाहिले तुलाचि। तुला तुझे देताना ही। भरूनी मीच राही॥) आद्यपिपा की ये पंक्तियाँ रोहिले के ‘प्रेम लुटाता रहा बाबा पर’ इस बोलद्वारा हमें स्मरण हो जाती हैं। मैं ही एक पुष्प बनकर, खिलता हुआ फूल […]

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श्रीसाईसच्चरित : अध्याय-३ : भाग-७८

श्रीसाईसच्चरित : अध्याय-३ : भाग-७८

रोहिले की कथा के पन्ने पलटते हुए हम उससे सीख भी ग्रहण कर रहे हैं। यह सब करने का हमारा उद्देश्य यही है कि इस कथा के माध्यम से मुझे क्या सीखना है? इस कथाद्वारा दी गई कौन सी सीख लेकर मुझे अपनेआप में क्या परिवर्तन करना चाहिए? श्रीसाईनाथ का गुणसंकीर्तन मुझे कैसे करना चाहिए? […]

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श्रीसाईसच्चरित : अध्याय-३ : भाग-७७

श्रीसाईसच्चरित : अध्याय-३ : भाग-७७

रोहिले की कथा द्वारा बोध प्राप्त करते हुए पिछले लेख में हमने महत्त्वपूर्ण और भी एक मुद्दे का अध्ययन किया और वह है होशोंहवास खो देना। हमें अपने-आप में ही खुश होकर अधिकाधिक जोर-शोर के साथ ईश्‍वर का गुणसंकीर्तन करते ही रहना चाहिए क्योंकि इसी गुणसंकीर्तन के ही कारण उस रोहिली से हमें हमेशा के […]

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श्रीसाईसच्चरित : अध्याय-३ : भाग-७६

श्रीसाईसच्चरित : अध्याय-३ : भाग-७६

रोहिले की कथा का अध्ययन करते समय हमने अब तक निम्नलिखित मुद्दों से बोध प्राप्त किया। १) बाबा के गुणों से मन मोहित होकर शिरडी जाना। २) अन्य सभी मार्ग को छोड़कर शिरडी अर्थात भक्तिभूमि को चुनना (का चुनाव करना) ३) साई के सामीप्य में रहना। ४) साई के प्रति समर्पित हो जाना। ५) साई […]

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श्रीसाईसच्चरित : अध्याय-३ : भाग- ७५

श्रीसाईसच्चरित : अध्याय-३ : भाग- ७५

दिन हो अथवा रात, द्वारकामाई हो अथवा चावड़ी, रोहिला उच्च स्वर में ईश्‍वर का गुणसंकीर्तन करने लगा। हमने इनमें से दो मुद्दों का अध्ययन किया। अब हम तीसरे महत्त्वपूर्ण मुद्दे के बारे में अध्ययन करेंगे। रोहिला गुणसंकीर्तन कैसे करता है, इस बात का वर्णन इस पंक्ति में हेमाडपंत ने काफ़ी सुंदर तरीके से किया है। […]

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श्रीसाईसच्चरित : अध्याय-३ : भाग- ७४

श्रीसाईसच्चरित : अध्याय-३ : भाग- ७४

रोहिले की कथा देखी जाए तो अनेक पहलुओं से संपन्न है। हमने रोहिले के वर्णन द्वारा हेमाडपंत के माध्यम से साईनाथ हमें क्या उपदेश देना चाहते हैं इस संबंध में हमने विस्तारपूर्वक अध्ययन किया। इसके साथ ही हम रोहिले के आचरण से संबंधित अध्ययन भी कर रहे हैं। पिछले लेख में रोहिला द्वारकामाई में क्यों […]

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