‘न्युक्लिअर आईसब्रेकर्स’, लष्करी अड्डों के समावेश के साथ रशिया ने किया ‘आर्क्टिक प्लैन’ का ऐलान

तृतीय महायुद्ध, परमाणु सज्ज, रशिया, ब्रिटन, प्रत्युत्तरमास्को – ‘हमने सही समय पर परियोजना पर अमल नही किया तो आर्क्टिक की स्थिति क्रिमिआ जैसी होगी और क्रिमिआ का रैगिस्तान में परिवर्तन होता मुझे देखना नही है’, इन शब्दों में रशिया के राष्ट्राध्यक्ष व्लादिमीर पुतिन इन्होंने रशिया ने आर्क्टिक में तेजी से और व्यापक स्तर पर शुरू की गतिविधियों का समर्थन किया| पुतिन इन्होंने मंगलवार के दिन एक कार्यक्रम के दौरान ‘न्युक्लिअर आईसब्रेकर्स’, लष्करी अड्डे एवं व्यापार के लिए नए बंदरगाह के निर्माण का समावेश होनेवाले महत्वाकांक्षी ‘आर्क्टिक प्लैन’ का ऐलान किया|

रशिया के राष्ट्राध्यक्ष व्लादिमीर पुतिन इन्होंने पिछले वर्ष मार्च महीने में देश को संबोधित करने के लिए किए भाषण के दौरान रशियन रक्षादल के आर्क्टिक में मौजूद सामर्थ्य का खास तौर पर जिक्र किया था| रशिया आर्क्टिक में विज्ञान-संशोधन, यातायात जैसी कई क्षेत्रों की बुनियादी सेवा-सुविधाओं का निर्माण कर रही है और लष्करी अड्डों का निर्माण एवं प्रगत हथियारों की तैनाती पर भी ध्यान देगी, यह भरोसा भी उन्होंने दिलाया था| उसके बाद सितंबर महीने में आर्क्टिक क्षेत्र में सक्रिय ‘नॉर्दन फ्लीट’ में एडमिरल गोर्शकोव्ह यह विध्वंसक, इल्यामुरोमेटस् यह आईसब्रेकर पोत एवं इसके अलावा पांच पोतों का समावेश करने का ऐलान रशिया के रक्षामंत्री सर्जेई शोईगु इन्होंने किया था|

कुछ दिन पहले रशिया ने आर्क्टिक में एक नया लष्करी अड्डा कार्यान्वित करने की बात स्पष्ट हुई थी| साथ ही रशिया की चोटी की ईंधन कंपनी ‘रोजनेफ्ट’ ने आर्क्टिक में निवेश की मात्रा बढाने के संकेत दिए थे| इस पृष्ठभूमि पर मंगलवार के दिन राष्ट्राध्यक्ष पुतिन इन्होंने घोषित किया ‘आर्क्टिक प्लैन’ ध्यान आकर्षित करता है| इस योजना में पुतिन ने रशिया का आर्क्टिक में बना स्थान पुख्ता करने के लिए व्यापार और रक्षा इन दोनों क्षेत्रों में महत्वाकांक्षी कदम उठाने की बात स्पष्ट की|

रशिया के बेडे में फिलहाल चार ‘न्युक्लिअर आईसब्रेकर्स’ है और आर्क्टिक क्षेत्र में ‘न्युक्लिअर आईसब्रेकर’ रखनेवाला रशिया अकेला देश है| व्यापार और रक्षा इन दोनों उद्देश्य से इस्तेमाल हो सके ऐसी ‘न्युक्लिअर आईसब्रेकर्स’ की संख्या बढाने का भी ऐलान पुतिन ने किया| फिलहाल रशिया में तीन ‘न्युक्लिअर आईसब्रेकर्स’ का काम शुरू है और वर्ष २०३५ तक आर्क्टिक के लिए १३ न्युक्लिअर आईसब्रेकर्स का बेडा तैयार होगा, यह रशियन राष्ट्राध्यक्ष ने कहा है|

आर्क्टिक में रशिया के भौगोलिक एवं सामरिक हितसंबंध होने की बात पुतिन ने पहले ही स्पष्ट की थी| इस वजह से इस क्षेत्र में बने पुराने लष्करी अड्डे सक्रिय करने के साथ ही नए अड्डों का निर्माण करने की जानकारी राष्ट्राध्यक्ष पुतिन इन्होंने दी| आर्क्टिक में रशिया ने अबतक तीन लष्करी अड्डे सक्रिय किए है और और दो अड्डों के निर्माण का काम शुरू होने की बात कही जा रही है| लष्करी ठिकानों के अलावा आर्क्टिक में व्यापार बढाने के लिए नए बंदरगाह का निर्माण करने के संकेत भी पुतिन इन्होंने दिए है|

‘वर्तमान में आर्क्टिक से दो करोड टन से भी अधिक सामान का व्यापार हो रहा है और वर्ष २०२५ तक यह व्यापार आठ करोड टन तक बढाने का उद्देश्य रखा गया है| यह काफी असलियत से भरा एवं सटिक उद्देश्य है’, यह दावा भी रशियन राष्ट्राध्यक्ष ने किया| इस कार्यक्रम में मौजूद रशियन विदेशमंत्री सर्जेई लॅव्हरोव इन्होंने आर्क्टिक के लष्करी ठिकानों का समर्थन किया है और लष्करी एवं राजनयिक स्थिति को ध्यान में रखकर यह निर्णय किया गया है, यह बत डटकर कही|

रशिया की पहल से आयोजित की गई इस ‘आर्क्टिक’ बैठक के लिए नार्वे, स्वीडन एवं फिनलैंड के नेता भी उपस्थित थे| इस दौरान नार्वे के प्रधानमंत्री एर्ना सोल्बर्ग इन्होंने आर्क्टिक में कोई भी अपने अकेला का नियंत्रण है, इस भावना से बरताव ना करे, इन शब्दों के साथ रशिया की योजना पर आलोचना की| रशिया के अलावा अमरिका, कनाडा, नार्वे, फिनलैंड, स्वीडन और ग्रीनलैंड के साथ चीन भी आर्क्टिक पर दावा जता रहा है| इन दावों की वजह से आर्क्टिक में शुरू स्पर्धा और भी तीव्र हुई है और इसका रुपांतर युद्ध में हो सकता है, यह इशारा भी विश्‍लेषक दे रहे है|