अमरिका का तैवान में ‘अनौपचारिक दूतावास’ शुरू – ‘अमरिकन इन्स्टिट्यूट ऑफ तैवान’ यानी दूतावास होने का दावा

तैपेई: तैवान की राष्ट्राध्यक्षा ‘त्साई ईंग-वेन’ और अमरिका के वरीष्ठ अधिकारीयों की उपस्थिती में ‘अमरिकन इन्स्टिट्यूट ऑफ तैवान’ का राजधानी तैपेई में उद्घाटन हुआ| लेकिन यह अमरिका का सांस्कृतिक केंद्र होने का दावा किया जा रहा है, फिर भी वास्तविकता में यह अमरिका का दूतावास प्रतित हो रहा है| इस पर प्रतिक्रिया देते हुए चीनने अमरिका से अपनी गलती सुधारने की मॉंग की है|

चीन का दावा है कि, तैवान हमारा अविभाज्य हिस्सा है| इस कारण अन्य किसी देश ने तैवान के साथ राजनीतिक, व्यापारी और सैनिकी सहयोग स्थापित ना करे, ऐसी धमकी चीन द्वारा दी जाती है| तैवान को देश का दर्जा ना मिले इसलिए चीन अपने वित्तिय, राजनीतिक और सैनिकी सामर्थ्य की बाजी लगाने की घटनाए कई बार उजागर हुई थी|

अनौपचारिक दूतावास, शुरू, त्साई ईंग-वेन, अमरिकन इन्स्टिट्यूट ऑफ तैवान, दावा, तैवान, अमरिकावर्ष १९७९ में अमरिका ने चीन के व्यापारी सहयोग को ध्यान में रखते हुए तैवान समेत राजनीतिक सहयोग तोडते हुए ‘वन चायना’ नीति को समर्थन दिया था| लेकिन पिछले कई महिनों में अमरिका ने तैवान समेत सहयोग बढ़ाने की शुरूआत की है| तीन महिने पहले अमरिका ने ‘तैवान एक्ट’ को पारीत करते हुए तैवान समेत नए सहयोग की घोषणा की थी|

साथही अमरिका ने तैवान को लड़ाकू विमान, हेलिकॉप्टर्स, विध्वंसक देने की घोषणा की थी| वहीं अमरिका की विमान वाहक युद्धपोत जल्दही तैवान के खाड़ी में दाखिल होने के संकेत भी अमरिका ने दिए थे| अमरिका और तैवान के इस सैनिकी सहयोग पर चीन ने कड़ी नाराजगी जताई थी|

इसपर चीन ने धमकाते हुए कहा था कि, सैनिकी सहयोग से तैवान का नुकसान होगा| लेकिन अमरिका से चीन का द्विपक्षीय सहयोग पर भी विपरीत परीणाम होगा|

चीन की इस धमकी को चार घंटे भी नहीं हुए वहीं अमरिका ने तैवान की राजधानी तैपेई में ‘एआयटी’ का उद्घाटन किया| अमरिका के इस सांस्कृतिक केंद्र के उद्घाटन पर तैवान की राष्ट्राध्यक्षा ‘त्साई’ समेत अमरिका के विदेश मंत्रालय के शिक्षा और सांस्कृतिक विभाग की वरिष्ठ सचिव ‘मेरी रॉयसी’ साथही ‘एआयटी’ के संचालक और राजदूत ‘किन डब्ल्यू मोय’ भी उपस्थित थे|

‘एआयटी’ का उद्घाटन मतलब अमरिका और तैवान के सहयोग का अत्यंत महत्त्वपूर्ण पड़ाव होने का दावा मोय ने किया| वहीं रॉयसी ने कहा कि, यह सांस्कृतिक केंद्र मतलब २१ वी सदी में अमरिका-तैवान के सहयोग का प्रतिक है|

दौरान, यह सांस्कृतिक केंद्र मतलब अमरिका का तैवान में अनौपचारीक दूतावास दिखाई दे रहा है| तैवान को देश का दर्जा देने की दिशा में अमरिका ने कदम बढ़ाना शुरू किया है| ‘एआयटी’ का उद्घाटन यह इसका पहला कदम दिखाई दे रहा है| यह चीन के लिए संवेदनशील होते हुए, अमरिका ने तैवान को भौगोलिक, सामरीक और राजनीतिक महत्त्व ध्यान में रखते हुए तैवान की स्वतंत्रता के लिए चीन समेत अपने संबंध को दाव पर लगाया, ऐसा दिखाई दे रहा है|

अगर तैवान पर चीन ने कब्जा कर लिया तो फिर इस क्षेत्र में अमरिका के प्रभाव को चुनौती देना चीन के लिए बहूत आसान हो सकता है| जापान और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की सुरक्षा खतरे में आने से चीन यहा अनिर्बंध संचार कर सकता है| इससे निर्माण होनेवाला असमतोल घातक होगा, इसकी अनुभूती हो चुके अमरिका ने तैवान की सुरक्षा के लिए तेजी से गतिविधियॉं शुरू की है|

कुछ दिनों पहले तैवान ने ‘साऊथ चायना सी’ में अमरिकी बेस के लिए द्विप देने की तैयारी दिखाते हुए चीन को बड़ा झटका दिया था|