०३. ईश्‍वर का अब्राहम के साथ ‘क़रारनामा’ (द कॉवेनन्ट)

ईश्‍वर के आदेश के अनुसार ऊर प्रांत से कॅनान प्रांत में आकर बसे अब्राहम ने अब अपने परिजनों एवं समर्थकों के साथ कॅनान प्रांत में अपनी जड़ें फैलाना शुरू किया था। सबकुछ शून्य में से ही शुरू करना पड़ने के कारण जनजीवन में दैनंदिन व्यवहार में ज़रूरत पड़नेवाले विभिन्न व्यवसायिकों के काम लोगों ने सिख लिये। कुछ लोगों ने खेती करना शुरू किया था।
लेकिन कुछ समय में ही उन्हें भीषण अकाल का सामना करना पड़ा। इस कारण अब्राहम ने सारा तथा अपने लोगों के साथ नज़दीकी इजिप्त में स्थलांतरण किया। लेकिन इस उम्र में भी सारा सुंदर दिखती होने के कारण, कहीं कोई उसके मोह में फॅंसकर मुझे मारकर उसे भगा न ले जायें, इस विचार से अब्राहम ने उसे अपनी बहन बताया था। उसके अँदाज़े के अनुसार ही, कुछ ही दिनों में वहाँ के राजा फारोह तक सारा की सुंदरता की ख़बर पहुँची और उसने सारा को अपनी पत्नी बनाने के उद्देश्य से उसे राजमहल ले आने के लिए सैनिक भेजे। लेकिन यहाँ पर ईश्‍वर ने स्वयं हस्तक्षेप किया ऐसा यह कथा बताती है….फारोह के परिवार को अचानक प्लेग ने ग्रस्त किया। एक के बाद एक परिजनों को प्लेग ग्रस्त कर रहा है, यह देखकर फारोह गहरी सोच में डूब गया। अपने हाथों कुछ तो ग़लती हो रही है, यह उसकी समझ में आया। उतने में ईश्‍वर ने फारोह को दृष्टांत देकर उसे खरी खरी सुनायी और सारा की असली पहचान बताकर उसे वापस भेजने की आज्ञा फारोह को दी, ऐसी कथा बतायी जाती है। उसके बाद फारोह ने सारा को अब्राहम के पास वापस भेज दिया और अपनी ग़लती सुधारने के लिए अब्राहम और उसके परिवार को भारी मात्रा में धन तथा अन्य कई मौल्यवान वस्तुएँ, साथ ही दासदासी और मवेशी जानवर भी बहाल किये। उसके बाद अब्राहम कुछ ही दिनों में, कॅनान में पड़ा अकाल ख़त्म हुआ है, ऐसी खबर मिलने के बाद पुनः अपने परिजनों एवं आदमियों के साथ मूल्यवान् वस्तुओं से लदीं गाड़ियाँ लेकर कॅनान लौट आया।
अब उसके साथ उसका भतीजा ‘लोट’ यह भी था। उनके पास अब भारी मात्रा में धनदौलत थी। एक बार दोनों के चरवाहों में, प्राणियों के चरने को लेकर झगड़ा हुआ। अब्राहम के चरवाहे ये नीतिमान तथा अब्राहम द्वारा दिखाये गये मार्ग पर चलनेवाले थे; लेकिन लोट के चरवाहे ऐसे नहीं थे। इस कारण भविष्य में ऐसी ही किसी समस्या का सामना करना नहीं पड़े, इसलिए अब्राहम और लोट ने ज़मीन का बँटवारा कर दिया। लोट ने जिस प्रदेश की माँग की थी, वह प्राकृतिक संपन्नता से भरपूर था, लेकिन वहाँ के लोग नीतिमत्ता के हिसाब से एकदम ही गिरे हुए थे। उनके पाप जब चरमसीमा तक पहुँचे, तब ईश्‍वर ने उस शहर (‘सोडोम’ शहर) को नष्ट करने का निर्णय लिया। उसके लिए भगवान ने तीन देवदूत भेजे थे। उस शहर के मार्ग पर ही उनकी मुलाक़ात अब्राहम से हो गयी और उन्हीं से अब्राहम को इस बात का पता चला। लोट हालाँकि अनीतिमान लोगों में रह रहा था, मग़र वह खुद नीतिमान एवं अब्राहम के मार्ग पर से ही चलनेवाला था। इसलिए अब्राहम ने लोट के लिए तथा उस सोडोम शहर के लिए दया दिखाने की ईश्‍वर से प्रार्थना की। तब ईश्‍वर ने उसे बताया की यदि उस शहर में कम से कम ऐसे दस लोग मुझे दिखाओं, जो नेकी के रास्ते पर चल रहे हो; फिर मैं उस शहर को बक्ष दूँगा। लेकिन उतने भी नेक लोग न मिल पाने के कारण उस शहर का नाश अब अटल था। इस कारण भगवान ने लोट तथा उसके परिजनों को शहर छोड़कर जाने के लिए कहा और उनके वहाँ से निकलते ही वह शहर आग की बरसात करके नष्ट कर दिया, ऐसा यह कथा बताती है। उस समूचे शहर के स्थान पर एक अत्यधिक नमकीन ऐसे जलाशय का निर्माण हुआ। उसे ही बाद में ‘मृत समुद्र’ (‘डेड सी’) ऐसा कहा जाने लगा।
‘सोडोम’ शहर पर ईश्‍वर ने गिरायी आग की बरसात; उसमें से ‘डेड सी’ का जन्म।
‘सोडोम’ शहर पर ईश्‍वर ने गिरायी आग की बरसात; उसमें से ‘डेड सी’ का जन्म।
इसी दौरान अब्राहम के पिता तेराह ने इस दुनिया से विदा ली थी। मृत्यु के समय उनकी उम्र २०५ होने के उल्लेख पाये जाते हैं।
इन तीनों में से एक देवदूत ने अब्राहम को ईश्‍वर के दृष्टान्त की पुनः याद दिला दी। अब अब्राहम के ईश्‍वर का पहला दृष्टान्त पाने के दस साल बीत चुके थे। फिर भी उनके कोई बालबच्चे नहीं थे। सारा का मन थोड़ासा शंकित हो गया, तब उस देवदूत ने ही – ‘भगवान के लिए क्या असंभव है? वे कुछ भी कर सकते हैं’ ऐसा उन्हें बताया। लोट का शहर जला देने के बाद भगवान ने अब्राहम को पुनः दृष्टान्त देकर अपने पुराने आशीर्वचन की याद दिलायी और ‘मैं तुम्हारी और तुम्हारे मार्ग पर चलनेवाले तुम्हारे वंशजों की और अनुयायियों की रक्षा करूँगा’ ऐसा उसके साथ ‘क़रारनामा’ (‘कॉवेनन्ट’) भी किया। इस समय उसका मूल ‘अ‍ॅबराम’ यह नाम बदलकर भगवान ने ‘अब्राहम’ रखा; तथा सारा के मूल नाम ‘साराई’ को बदलकर ‘सारा’ रखा, ऐसा कहा जाता है। साथ ही, उसके लिए तथा उसके घर के अन्य सभी पुरुषसदस्यों के लिए कुछ विशिष्ट विधि करने के आदेश ईश्‍वर ने उसे दिये। यहाँ से आगे जन्म लेनेवाले उसके सभी वंशजों में तथा इस धर्म के सभी अनुयायियों में ये विधि प्रमुख धार्मिक विधि होनेवाली थीं।
अब्राहम ने एक भी सवाल न पूछते हुए, किसी भी प्रकार की आशंका मन में न लाते हुए ईश्‍वर के आदेश का हूबहू पालन किया। उसीके साथ ईश्‍वर ने उसे यह भी बताया कि ‘तुम्हारे वंशज तुम्हें दी हुई भूमि पर अवश्य राज करेंगे, लेकिन उससे पहले उन्हें लगभग ४०० साल दूसरे प्रदेश में ग़ुलामी में, बहुत ही तकली़फ में बीताने पड़ेंगे।’
ईश्‍वर ने किया अब्राहम के साथ ‘क़रारनामा’ (‘कॉवेनन्ट’)
ईश्‍वर ने किया अब्राहम के साथ ‘क़रारनामा’ (‘कॉवेनन्ट’)

ईश्‍वर ने अब्राहम के वंशजों के द्वारा महान राष्ट्र का निर्माण होने का वरदान तो दिया था, लेकिन सारा-अब्राहम दोनों की भी उम्र अब लगभग ८०-८५ की हो चुकी थी और उनके अब भी कोई बालबच्चे नहीं थे। इसलिए, ‘अब यह कैसे मुमक़िन होगा’ इसपर सोचते सोचते सारा को एक मार्ग दिखायी दिया।

ऐसी परिस्थिति में, उस ज़माने की प्रचलित पद्धति के अनुसार सारा ने इसके लिए अपनी इजिप्शियन दासी ‘हाजर’ (हॅगर) का चयन किया। यह हॅगर इजिप्त के राजा की – फारोह की राजकन्या ही थी और अब्राहम-सारा के महत्त्व को जानने के बाद फारोह ने ही उसे इन दोनों की दासी के तौर पर भेजा था।
अब्राहम को सारा की संमति से, हॅगर द्वारा एक लड़का हुआ, जिसका नाम ‘इश्मेल’ (इस्माईल) रखा गया। ‘इस इस्माईल से ही आगे चलकर अरब वंश का निर्माण हुआ’ ऐसी ज्यू एवं इस्लाम इन दोनों धर्मियों की मान्यता है। इश्मेल के जन्म के समय अब्राहम की उम्र ८६ साल थी।
अब्राहम को हालाँकि हॅगर से लड़का हुआ था, मग़र फिर भी – ‘अब्राहम को दृष्टान्त में बताये गये धर्म का पथप्रदर्शक यह नहीं होगा, बल्कि अब्राहम को सारा से होनेवाला बच्चा ही वह पथप्रदर्शक होगा’ ऐसा ईश्‍वर ने अब्राहम को पुनः दृष्टान्त देकर बताया, ऐसा उल्लेख ज्यू ग्रंथों में पाया जाता है।
ऐसे ही साल बीतते गये। कॅनान प्रांत में स्थलांतरित हो चुके अब्राहम-सारा और उनके अनुयायियों ने अपनी अपार मेहनत और लगन से उस बंजर, पथरैल ज़मीन में अपने विश्‍व का निर्माण किया।
आगे चलकर १३ साल बाद अब्राहम और सारा को लड़का हुआ, जिसका नाम ‘आयझॅक’ (इसाक) रखा गया। अब्राहम तब तक उम्र के सौ साल की दहलीज़ तक आकर पहुँचा था और उसकी पत्नी सारा नब्बे साल की! ‘ईश्‍वर के लिए असंभव कुछ भी नहीं है’ इस सत्य का अब्राहम ने पुनः एक बार अनुभव किया था।
लेकिन सारा को बेटा होने के बाद हॅगर और सारा में लगातार अनबन होने लगी, जिसके परिणामस्वरूप अब्राहम ने हॅगर और इश्मेल को दूर भेज दिया। (क्रमश:)

– शुलमिथ पेणकर-निगरेकर