ध्वनि से पांच गुना तेज हायपरसोनिक मिसाइल का निर्माण अंतिम चरण में – अमरिकी ‘एअरफोर्स सेक्रेटरी’

तृतीय महायुद्ध, परमाणु सज्ज, रशिया, ब्रिटन, प्रत्युत्तरवॉशिंगटन – रशिया एवं चीन जैसे प्रतिद्वंदी देश तेजी से हायपरसोनिक मिसाइल का निर्माण कर रहे है, ऐसे में अब अमरिका ने भी इसी दिशा में कदम तेजी से कदम बढाना शुरू किया है| ध्वनि से पांच गुना तेजीसे हमला करने में सक्षम हायपरसोनिक मिसाइल का निर्माण अंतिम चरण में है, यह गवाही अमरिकी ‘एअरफोर्स सेक्रेटरी’ हिथर विल्सन इन्होंने दी है| अमरिकी राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प इन्होंने पिछले महीने में प्रसिद्ध किए ‘मिसाइल डिफेन्स रिव्ह्यू’ में भी हायपरसोनिक मिसाइल के निर्माण का जिक्र किया था|

पिछले वर्ष अमरिका के ‘स्ट्रॅटेजिक कमांड’ के प्रमुख जनरल जॉन हायटन इन्होंने एक मुलाकात के दौरान रशिया एवं चीन की बढती हायपरसोनिक क्षमता का जिक्र किया था| उसमें उन्होंने अमरिका ऐसी हथियारों को रोकने के लिए सक्षम नही है, यह चिंता भी जताई थी| उसके बाद कुछ दिनों में ही अमरिकी हवाई दल ने देश की चोटी की हथियार निर्माण करनेवाली कंपनी ‘लॉकहिड मार्टिन’ को ‘हायपरसोनिक’ मिसाइल का निर्माण करने के लिए लगभग ९२ करोड डॉलर्स का ठेका दिया था| इस कंपनी के अलावा ‘रेथॉन’ इस अन्य प्रमुख शस्त्रनिर्माण करनेवाली कंपनी भी ‘हायपरसोनिक डिफेन्स सिस्टिम’ का निर्माण कर रही हैै, यह स्पष्ट हुआ था|

इस पृष्ठभूमि पर अमरिकी ‘एअरफोर्स सेक्रेटरी’ हिथर विल्सन इन्होंने दी हुई जानकारी ध्यान आकर्षित करनेवाली साबित होती है| अमरिका के एक अभ्यास गुट के कार्यक्रम के दौरान बोलते वक्त विल्सन इन्होंने अमरिका के हायपरसोनिक मिसाइल से जुडा वक्तव्य किया| ‘रशिया एवं चीन जैसे देश हायपरसोनिक मिसाइल के लिए कर रहे कोशिशों की पृष्ठभूमि पर अमरिका ने भी अपनी गति बढाई है| जल्द ही अमरिका ध्वनि से पांच गुना तेज हायपरसोनिक मिसाइल का निर्माण करेगी’, यह वादा ‘एअरफोर्स सेक्रेटरी’ हिथर विल्सन इन्होंने किया है|

ध्वनि से पांच गुना (मॅक ५) एवं उससे भी अधिक गति की यंत्रणा को ‘मॅक ५’ के तौर पर जाना जाता है| अमरिका दो अलग अलग तरीके के ‘हायपरसोनिक वेपन्स सिस्टिम’ का निर्माण कर रही है| इसमें से एक ‘टॅक्टिकल बूस्ट ग्लाईड वेपन’ वर्ग की है और अन्य ‘हायपरसोनिक एअर ब्रेथिंग वेपन कंसेप्ट’ वर्ग की है|

‘लॉकहिड मार्टिन’ को ‘टॅक्टिकल बूस्ट ग्लाईड वेपन’ के निर्माण का ठेका दिया गया है| इस कंपनी से ‘हायपरसोनिक क्रूज मिसाइल’ का निर्माण किया जा रहा है| इसके अलावा वायू सेना से ‘एअर लॉंच्ड् रॅपिड रिस्पॉन्स वेपन’ नाम से ‘हायपरसोनिक’ यंत्रणा का भी निर्माण हो रहा है और इसके लिए लगभग २६ करोड डॉलर्स के नीधि का प्रावधान किया जा रहा है|

रशिया एवं चीन इन दोनों देशों ने अपने पास हायपरसोनिक मिसाइल तैयार है और आनेवाले वर्ष में इन्हें रक्षा बलों में तैनात किया जाएगा, यह दावा भी किया है| रशिया ने भारत की सहायता से निर्माण किया हुआ ‘ब्रह्मोस’ यह हायपरसोनिक मिसाइल रक्षाबलों के बेडे में शामिल करने की जानकारी दी है|