नियंत्रण रेखा पर राकेट हमला कर के पाकिस्तान ने मनाया ‘कश्मीर डे’

श्रीनगर/इस्लामाबाद: जम्मू-कश्मीर की नियंत्रण रेखा पर कृष्णा?घाटी में गोलाबारी करके और इस राज्य के अलगाववादी नेताओं को समर्थन जाहीर करके पाकिस्तान ने ‘कश्मीर सॉलिडॅरिटी डे’ मनाया है| इसके पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने हुरियत कॉन्फरन्स के अलगाववादी नेताओं के साथ फोन से चर्चा करके भारत को उकसाया था| इस पर भारत ने कडी प्रतिक्रिया दर्ज करने पर पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने भारत बेवजह इस बातचीत का मुद्दा बना रहा है, यह आरोप किया था|

हर वर्ष ५ फरवरी के दिन पाकिस्तान में ‘कश्मीर सॉलिडॅरिटी डे’ मनाया जाता है| लेकिन, इसे अब पाकिस्तान की जनता से पहले जैसा समर्थन प्राप्त नही हो रहा है, ऐस दावे हो रहे है| इस परिस्थिति में प्रधानमंत्री इम्रान खान इनकी सरकार ने कश्मीर समस्या नए से प्रस्तुत करने के लिए आक्रामक कोशिश शुरू की है| इन कोशिशों के पीछे अपनी सरकार की आर्थिक विफलता छुपाने का उद्देश्य होने की बात स्पष्ट हो रही है| इसी लिए पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने ब्रिटेन में कश्मीर संबंधी कार्यक्रम का आयोजन किया था| इस कार्यक्रम से अपना सीधा संबंध नही है और इस वजह से कश्मीर पर अपनी भूमिका में बदलाव नही हुआ है, यह गवाही ब्रिटेन की सरकार ने भारत को दी है|

नियंत्रण रेखा, राकेट हमला, कर, पाकिस्तान, मनाया, कश्मीर डे, श्रीनगर, इस्लामाबाद‘कश्मीर डे’ के अवसर पर जम्मू-कश्मीर की नियंत्रण रेखा पर कृष्णा घाटी में पाकिस्तानी लष्कर ने गोलाबारी शुरू की थी| वहां पर ‘आर्मी कैम्प’ की दिशा में राकेटस् भी छोडे थे| इसे भारतीय सेना ने कडा प्रत्युत्तर देने का वृत्त है| इस गोलाबारी एवं राकेट हमले की पृष्ठभुमि पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इम्रान खान और राष्ट्रपति अरिफ अल्वी इन्होंने अपना देश कश्मीर की जनता के पीछे डटकर खडा होने का ऐलान किया| कश्मीरी जनता का दमन करना मुमकिन नही होगा, यह चेतावनी भी पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने भारत को दी है| वही, इम्रान खान इन्होंने कश्मीरी जनता पर भारत के हो रहे तथाकथित अत्याचारों का निषेध दर्ज किया है|

इस दौरान पाकिस्तानी लष्कर ने यह दावा किया है की, कश्मीरी जनता की आवाज दबाने में भारत कभी भी सफल नही होगा| लेकिन, पाकिस्तान के कब्जे में होनेवाले कश्मीर में शुरू प्रदर्शनों की चर्चा पाकिस्तान के किसी भी नेता ने की नही है| ऐसे में ही पाकिस्तान ने कब्जा किए कश्मीर के गिलगीट-बाल्टिस्तान में पाकिस्तान का निषेध करने के लिए प्रदर्शनों का आयोजन हुआ था|

लेकिन, पाकिस्तानी लष्कर ने अमानवीय कार्रवाई से इन प्रदर्शनों को दबाया है, ऐसा वृत्त प्राप्त हो रहा है| गिलगीट-बाल्टिस्तान के कुछ नेताओं को पाकिस्तान ने पिछले आठ साल से जेल में बंद करके रखा है| इसका निषेध करने के लिए इन प्रदर्शनों का आयोजन किया गया था, ऐसा बताया जा रहा है|

जम्मू-कश्मीर में भारत के तथाकथित अत्याचारों का निषेध कर रहे पाकिस्ताने अपने कब्जे के भूभाग की जनता को बुनियादी अधिकार देने से इनकार किया है, यही इस से स्पष्ट हो रहा है| गिलगीट-बाल्टिस्तान की जनता पाकिस्तान के सामने लगातार अपने हक प्रदान करने की मांग रख रही है| इस क्षेत्र में पाकिस्तान के अन्य हिस्सों से पहुंचे लोगों का स्थापित ना करे, यह मांग भी इस में शामिल है| साथ ही गिलगीट-बाल्टिस्तान से गुजर रहे ‘चाइना-पाकिस्तान इकॉनॉमिक कॉरिडॉर’ परियोजना पर भी स्थानिय नागरिक कडा विरोध कर रहे है|

इस परियोजना से स्थानिय नागरिकों की सुरक्षा एवं हित संबंध खतरे में आ रहे है, ऐसा यहां की जनता का कहना है| साथ ही गिलगीट-बाल्टिस्तान यह पाकिस्तान का भूभाग नही है और इस संबंधी कोई भी निर्णय करने का अधिकार पाकिस्तान को नही है| ऐसे होते हुए पाकिस्तान ने इस क्षेत्र में चीन को परियोजना शुरू करने की अनुमती देकर यहां की जनता पर अन्याय किया है, यह दावा स्थानिय कर रहे है| साथ ही यहां की जनता पर पाकिस्तानी लष्कर से हो रहे अत्याचारों की मात्रा में भी बढोतरी हो रही है|