अमरीका के कठोर प्रतिबंधों की वजह से ईरान की इंधन निर्यात में ४६ प्रतिशत गिरावट – ईरानी और अंतर्राष्ट्रीय संगठन की जानकारी

तृतीय महायुद्ध, परमाणु सज्ज, रशिया, ब्रिटन, प्रत्युत्तर

तेहरान/लंडन – अमरीका के राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प ने लगाए कठोर प्रतिबंधों के झटके अब ईरान को लग रहे हैं| पिछले वर्ष की तुलना में ईरान की इंधन निर्यात ४६ प्रतिशत से कम हुई है| यह गिरावट यहीं तक ही रुकने वाली नहीं है, बल्कि आने वाले महीनों में इसमें बढ़ोत्तरी होने की संभावना रन के अधिकारी ने जताई है| अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने दी जानकारी के अनुसार अक्टूबर महीने में ईरान की इंधन निर्यात प्रति दिन १० लाख बैरल्स पर पहुंची है और इस वजह से ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव आया है, ऐसा इस संगठन ने कहा है|

मई महीने में ट्रम्प ने ईरान के साथ किए परमाणु समझौता को तोडा था| इसीके साथ ही ट्रम्प ने अपने यूरोपीय मित्र देशों को और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को ईरान पर प्रतिबन्ध लगाने की चेतावनी दी थी|इन प्रतिबंधों से पहले यूरोपीय और अन्य देश ईरान के साथ सहकार्य तोड़ दें, ऐसा ट्रम्प ने सुझाव दिया था| उसके अनुसार जुलाई महीने के पहले हफ्ते में ट्रम्प ने ईरान पर नए प्रतिबन्ध लगा थे| साथ ही आने वाले नवम्बर महीने में ईरान की इंधन निर्यात पर भी कठोर प्रतिबन्ध लगाए थे| साथ ही आने वाले नवम्बर महीने में ईरान की इंधन निर्यात पर भी नए प्रतिबन्ध लगाने की घोषणा की है|

ईरान, यूरोपीय महासंघ, रशिया और चीन ने अमरीका के इन प्रतिबंधों की आलोचना की थी| यूरोपीय महासंघ ईरान के साथ के परमाणु अनुबंध पर कायम रहने की घोषणा की थी| लेकिन अमरीका ने ईरान पर लगाए प्रतिबन्ध और ट्रम्प ने दी चेतावनी के बाद यूरोप के इंधन क्षेत्र की बड़ी कंपनियों ने ईरान के साथ सहकार्य बंद कर दिया है|

उसीके साथ ही इसके पहले ईरान से इंधन खरीदने वाले भारत, दक्षिण कोरिया, जापान इन देशों ने भी ईरान के साथ सहकार्य बंद करना शुरू किया है| इसका सीधा परिणाम ईरान के इंधन निर्यात पर होने की जानकारी ईरान के कस्टम अधिकारियों ने सरकारी वृत्तसंस्था को दी है|

सन २०१७ में मार्च से सितंबर इस अवधि में ईरान की इंधन निर्यात ८६ लाख बैरल्स टन इतनी थी|लेकिन सन २०१८ में इसी अवधि में ईरान की इंधन निर्यात ४६ लाख बैरल्स तों तक गिर गई है| ईरानी अधिकारियों ने यह गिरावट ४६ प्रतिशत इतनी है, ऐसा कहा है| इस गिरावट का परिणाम ईरान की मुद्रा पर भी हुआ है|

अमरीका ने ईरान पर प्रतिबन्ध लगाने से पहले अमरिकी डॉलर की तुलना में ईरान का मूल्य १२ हजार रियाल तक पहुंचा था| लेकिन प्रतिबंधों की घोषणा के बाद अंतर्राष्ट्रीय बाजार में डॉलर की खरीदारी के लिए ईरान के निवेशक और व्यावसायिकों को ४२ हजार रियाल देना पड़ रहा है| इस वजह से ईरान की अर्थव्यवस्था डूबने की कगार पर खड़ी है, ऐसी चिंता भी ईरानी अधिकारी जता रहे हैं्|

लेकिन ईरान का यह संकट यहीं ख़त्म नहीं हुआ है| ईरान के पुराने सहकारी देशों ने इंधन की खरीदारी कम करने की वजह से इन देशों ने सऊदी अरेबिया और अन्य खाड़ी देशों की तरफ से इंधन की आयात शुरू की है| ईरान के इंधन उत्पादन में गिरावट का फायदा सऊदी अरेबिया उठा रहा है, ऐसा आरोप भी ईरान ने किया था|