स्कोर्पिन श्रेणी की ‘करंज’ पनडुब्बी का जलावतरण

मुंबई: पूर्ण रूप से स्वदेशी बनावट के ‘करंज’ इस स्कॉर्पीन श्रेणी के पनडुब्बी का जलावतरण संपन्न हुआ है। इससे पहले स्कॉर्पीन श्रेणी में आईएनएस ‘कलवरी’ नौदल में शामिल हुई थी और इसी श्रेणी में ‘आयएनएस खांदेरी’ यह पनडुब्बी के परीक्षण शुरू हुए हैं। ‘करंज’ यह इस श्रृंखला की तीसरी पनडुब्बी होकर, जल्द ही इसके परीक्षण शुरू होंगे।

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नौदल के प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा उनकी पत्नी रीना लांबा इनके हाथों इस पनडुब्बी का जलावतरण किया गया है। भारतीय नौदल में इस पनडुब्बी का समावेश करने से साल भर पहले इस पनडुब्बी के परीक्षण किए गए हैं, ऐसा नौदल प्रमुख ने उस समय कहा है। भारतीय नौदल में स्कॉर्पीन श्रेणी में लगभग ६ पनडुब्बियों का समावेश किया जाने वाला है और यह प्रकल्प फ्रान्स की सहायता से कार्यान्वित होने वाला है। मुंबई के माझगाव डॉक में इन पनडुब्बियों का निर्माण शुरू है और ‘करंज’ यह इस श्रृंखला की तीसरी पनडुब्बी मानी जा रही है।

करंज पनडुब्बी की लंबाई ६७.५ मीटर होकर ऊंचाई १२.३ मीटर है तथा वजन १५६५ टन है। करंज टौरपिड़ो और युद्धनौका भेदी मिसाइल का मारा कर सकता है। इस पनडुब्बी का उपयोग ‘एंटी सबमरीन वॉर फेयर’ और गोपनीय जानकारी प्राप्त करने में काम आ सकती है। तथा सागरी सुरंग ढूंढना और उसे नाकाम करना यह काम भी पनडुब्बी कर सकती है। अत्यंत कम आवाज़ में यह पनडुब्बी प्रगत रडार यंत्रणा को भी चकमा दे सकती है। इस पनडुब्बी से जमीन पर हमला किया जा सकता है।

पिछले कई वर्षों से भारतीय नौदल के सामने चीन का आवाहन सामने आ रहा है। हिंद महासागर क्षेत्र से बंगाल के उपसागर तक चीनी नौदल की उपस्थिति बढ़ती जा रही है। भारत के प्रभाव क्षेत्र में घुसकर भारत को चुनौती देने की तैयारी चीन ने की है। इसकी वजह से भारतीय नौदल का सामर्थ्य बढ़ाना आवश्यक बना है और नौदल ने इसके लिए गतिमान कदम उठाने शुरू किए हैं। युद्धनौका विनाशीका और पनडुब्बियों का निर्माण गतिमान रूप से हो रहा है और उसके परिणाम दिखाई दे रहे हैं।