भारत को ब्रिटेन से अत्याधुनिक ‘सबमरीन रेस्क्यू सिस्टम’ मिलेंगे

नई दिल्ली/लंदन: चीन का खतरा ध्यान में लेकर गहरे समंदर में किसी भी आपातकालीन स्थिति का सामना करने के लिए भारत तैयारी बढ़ा रहा है। आने वाले महीने में भारतीय नौदल को पहली अत्याधुनिक पनडुब्बी ‘रेस्क्यू सिस्टम’ मिलने का वृत्त है। भारत में ब्रिटेन के कंपनी के साथ दो ‘फ्लायअवे सबमरीन रेस्क्यू सिस्टम’ के लिए लगभग सारे १७ हजार करोड़ रुपए का करार किया था। भारतीय नौदल के लिए बनाए जानेवाले दो यंत्रणा में से एक यंत्रणा का काम पूर्ण हुआ है। दूसरी यंत्रणा जून महीने में भारत को प्राप्त होने वाली है, ऐसी जानकारी सामने आई है।

हिंद महासागर में भारत के नैसर्गिक प्रभाव को चीन आवाहन दे रहा है। चीनी नौदल के विनाशिका एवं पनडुब्बियां हिंद महासागर में दिखाई देने लगे हैं। जिसकी वजह से विशेषज्ञों से दोनों देशों के नौदल क्षमता की तुलनात्मक विचार शुरू हुआ है। चीनी नौदल के बेड़े में लगभग ६८ पनडुब्बियां होकर तथा भारत के पास १५ पनडुब्बियां है। इनमें कई पनडुब्बियां कालबाह्य होने के मार्ग पर है तथा अरिहंत श्रेणी की एक और कलवरी श्रेणी के दो पनडुब्बियों का फिलहाल परीक्षण शुरू है। तथा इन दोनों श्रेणी में अधिक पांच पनडुब्बियों का निर्माण शुरू है। नौदल के बारे में पनडुब्बियों की संख्या बढ़ाते समय भारतीय नौदल पनडुब्बियां भेदी विनाशीका और विमान भी अपने बेड़े में दाखिल कर रहा है।

अपने पनडुब्बी द्वारा युद्ध में अपना पक्ष अधिक सक्षम करना भारत के लिए आवश्यक है। इसके लिए नौदल को अत्याधुनिक ‘सबमरीन रेस्क्यू सिस्टम’ की आवश्यकता लग रही है। शत्रु का हमला होने पर अथवा दुर्घटना होने पर गहरे समंदर में बचाव कार्य करने की क्षमता इस यंत्रणा में है। इसकी वजह से आवश्यकता के अनुसार ऑपरेशन हाथ लेकर पनडुब्बियों की तैनाती जवानों की जान बचा सकती है।

स्कॉटलैंड के ‘जेएफडी’ कंपनी ने ‘फ्लायअवे सबमरीन रेस्क्यू सिस्टम’ विकसित किए हैं और यह सिस्टम दुनिया की सबसे अत्याधुनिक पनडुब्बी रेस्क्यू सिस्टम है। इस यंत्रणा की वजह से अत्यंत कम समय में गहरे समंदर में बचाव कार्य किया जा सकता है, ऐसा इस कंपनी का दावा है। इस सिस्टम में ‘डीप सर्च ॲण्ड रेस्क्यू व्हेईकल’ (डीएसआरव्ही) और ‘लॉन्च ॲण्ड रिकवरी सिस्टम’ (एलएआरएस) और ‘ट्र्न्सफर अंडर प्रेशर’ (टीयूपी) इन उपकरणों का समावेश है।

भारत के साथ हुए करार के अनुसार दो यंत्रणा में से एक यंत्रणा का काम हालही में पूर्ण हुआ है, ऐसी घोषणा कंपनी ने की है। यह यंत्रणा अब परीक्षण के लिए तैयार होकर आने वाले महीने में ‘फ्लायअवे सबमरीन रेस्क्यू सिस्टम’ भारत के नोबेल को सौंपी जाएगी। उसके बाद उसके परीक्षण संपन्न होंगे तथा दूसरी यंत्रणा का काम शुरू हुआ है और जून के आखिर तक दूसरे ‘फ्लायअवे सबमरीन रेस्क्यू सिस्टम’ भी भारतीय नौदल को मिलने वाले हैं।

ऐसे प्रकार की अत्याधुनिक यंत्रणा बहुत ही कम देशों के पास होकर जल्द ही भारत का उन देशो में समावेश होगा। ‘भारत यह ब्रिटेन का महत्वपूर्ण धारणात्मक सहयोगी देश है। भारतीय रक्षादल के साथ सहयोग बढ़ाने पर ब्रिटेन उत्सुक है’, ऐसा रक्षा और सुरक्षा विषयक व्यापार से संबंधित ब्रिटेन के विभाग के प्रमुख सिमोन एवरेस्ट ने कहा है।