पेट्रोलियम उत्पाद थोड़े थोड़े समय के बाद ‘जीएसटी’ की कक्षा में लाएंगे – वित्त मंत्रालय के सचिव हसमुख अधिया

नई दिल्ली: पेट्रोलियम उत्पाद भी ‘जीएसटी’ की कक्षा में लाने पर विचार किया जा रहा है, ऐसी जानकारी केन्द्रीय अर्थसचिव हसमुख अधिया ने दी है। पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोत्तरी हो रही है, ऐसे में पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के अंतर्गत लाया जाए, ऐसी मांग पूरे देश से हो रही है। उस वजह से पेट्रोल और डीजल के दाम नियंत्रण में रहेंगे, ऐसा दावा किया जा रहा था। उस पृष्ठभूमि पर केन्द्रीय सचिव ने दी हुई यह जानकारी महत्वपूर्ण है। लेकिन यह प्रक्रिया थोड़े थोड़े समय के बाद पूरी होगी, ऐसा अधिया ने स्पष्ट किया है।

पेट्रोलियम उत्पाद, थोड़े समय, बाद, जीएसटी, कक्षा, लाएंगे, वित्त मंत्रालय, सचिव हसमुख, अधिया, भारत, रशियाअंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे घटनाक्रमों की वजह से इंधन के दाम पिछले साढ़े चार सालों में उच्च स्तर पर पहुँच रहे हैं। इंधन की आयात पर निर्भर भारत पर इसका बहुत बड़ा परिणाम हो रहा है और पेट्रोल डीजल के मूल्य बढ़ने का नुकसान भारतीय ग्राहकों को उठाना पड़ रहा है। इस पृष्ठभूमि पर, पेट्रोल, डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पाद जीएसटी की कक्षा में लाए जाएं, ऐसी माँग की जा रही थी। कुछ राजनीतिक पार्टियों ने भी इस माँग को समर्थन दिया है।

सरकार इन मांगों के बारे में विचार कर रही है और जल्द ही इस बारे में निर्णय घोषित किया जाएगा, लेकिन यह प्रक्रिया थोड़े थोड़े समय के बाद पूरी होगी, ऐसा अधिया ने कहा है। अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क मंडल के अध्यक्ष एस. रमेश ने भी इस मांग को लागू करते समय कई जटिल प्रक्रिया पूरी करनी पड़ेंगी, ऐसा कहा है।

जीएसटी’ कौंसिल’ सबसे पहले उसकी रूपरेषा तैयार करके उसके बाद ही इस बारे में निर्णय लेगा, ऐसा एस. रमेश ने स्पष्ट किया है। दौरान, विमानों के लिए आवश्यक इंधन भी जीएसटी की कक्षा में लाया जाए, ऐसी मांग नागरी उड्डान मंत्रालय ने की थी। क्योंकि इंधन के बढ़ते दामों का नुकसान विमान परिवहन को भी हो रहा है। इस वजह से नुकसान बढ़ रहा है, ऐसा दावा नागरी उड्डान मंत्रालय ने किया था।

दौरान, अंतर्राष्ट्रीय स्तर के घटनाक्रमों को देखा जाए तो आने वाले समय में इंधन के दाम कम होने की संभावना नहीं है। वर्तमान में ‘ओपेक’ इस इन्धन उत्पादक देशों के संगठन ने रशिया के साथ की हुई चर्चा के अनुसार इंधन का उत्पादन बढाने का निर्णय लिया है। इस वजह से इंधन के दाम तुलना में कम होने का दावा किया जा रहा है। एल्किन ईरान जैसा देश इस बात पर नाराजगी जता रहा है।

आने वाले समय में ओपक, रशिया और इंधन की निर्यात बड़े पैमाने पर ब्बधा रहे अमरिका के बीच मतभेद हुए तो उसका इंधन बाजार पर बहुत बड़ा परिणाम ही सकता है। इस वजह से इंधन के दाम बढ़ सकते हैं। साथ ही अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में चल रही उलटपुलट और अस्थिरता का परिणाम भी इंधन के बाजार पर हो सकता है। यह चिंता भारत जैसे इंधन की आयात करने वाले देशों को सता रही है।

इसीलिए पेट्रोलियम उत्पाद जीएसटी की कक्षा में लाने का निर्णय भारत के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।