पाकिस्तान के लष्कर प्रमुख द्वारा भारत के लिए शांति प्रस्ताव

कराची – शांति का लाभ सभी को होगा| इस वजह से गरिबी, निरक्षरता और बिमारी से लढना संभव होगा| इसी लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री भारत के सामने दोस्ती का हाथ बढा रहे है| उनके इन कोशिशों को पाकिस्तान की लष्कर का भी समर्थन है| लेकिन इस संबंधी किए जा रहे कोशिशों की ओर पाकिस्तान की कमजोरी समझने की नजर से ना देखा जाए, ऐसा पाकिस्तान के लष्कर प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा इन्होंने कहा है| कुछ महीने पहले भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन्होंने पाकिस्तान के सामने इसी स्वरूप का प्रस्ताव रखा था| अब यह पाकिस्तान के लष्कर प्रमुख दोहरा रहे है, यह सूचक घटना मानी जा रही है|

कराची शहर में पाकिस्तानी नौसेना की ‘पासिंग आऊट परेड’ के दौरान जनरल बाजवा बोल रहे थे| पाकिस्तान शांति प्रिय देश है, यह दावा भी उन्होंने इस दौरान किया| इसी लिए प्रधानमंत्री इम्रान खान इन्होंने भारत के सामने मित्रता स्थापित करने के लिए कोशिश शुरू की है| इन कोशिशों को पाकिस्तान के लष्कर का भी समर्थन है, यह जनरल बाजवा इन्होंने रेखांकित किया| लेकिन इन कोशिशों की तरफ कोई भी पाकिस्तान की कमजोरी के नजर से ना देखे, यह कहकर जनरल बाजवा इन्होंने शांति के समय में भारत और पाकिस्तान को बिमारी, गरिबी और निरक्षरता जैसी चुनौतीयों का सामना करना संभव होगा, यह समझदारी की सलाह भी उन्होंने दी|

युद्ध से केवल विध्वंस ही होता है, इससे अन्य कुछ भी प्राप्त नही होता| आखिरकार सारी समस्याओं का हल बातचीत के जरिये से ही निकालना होगा, यह भी जनरल बाजवा ने कहा| पाकिस्तान की लष्कर को काफी देरी से समझ आई इन बातों में कई बातें छिपी है| २०१६ में भारत के प्रधानमंत्री ने इसी स्वरूप का प्रस्ताव रखा था| भारत और पाकिस्तान को लडना है तो, गरिबी से जंग करे, यह सुझाव प्रधानमंत्री मोदी ने रखा था| लेकिन उस समय पाकिस्तान का लष्कर भारत के साथ चर्चा करने के लिए जरा भी उत्सुक नही था|

भारत के साथ बातचीत में सिर्फ कश्मीर का मुद्दा रहेगा, यह पाकिस्तान की मांग है| लेकिन इस चर्चा में पाकिस्तान कर रहे आतंकी गतिविधियों का मुद्दा भारत उपस्थित ना करें, इस के लिए पाकिस्तान की कोशिश रहती है| पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इम्रान खान?इन्होंने तो अपने समय में

पाकिस्तान भारत के विरोध में आतंकी गतिविधियां नही करेगा, यह भी ऐलान किया था| फिर भी जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान पुरस्कृत आतंकी संगठनों की गतिविधियां अभी भी शुरू है|

साथ ही जम्मू-कश्मीर की सरहदी क्षेत्र में पाकिस्तानी लष्कर अभी भी गोलाबारी कर रहा है| इस वजह से पाकिस्तान के लष्कर प्रमुख भारत के साथ चर्चा करने के संबंधी कर रहे दावे खोखले है, यह स्पष्ट हो रहा है| केवल चर्चा के लिए चर्चा करने में कुछ भी मतलब नही है| भारत के साथ चर्चा करने के लिए जरूरी माहौल का निर्माण करने की जिम्मेदारी पहले पाकिस्तान निभाए, यह भारत की मांग है| इसके अलावा चर्चा संभव नही है, यह भारत ने पाकिस्तान को बार बार बताया है| फिर भी पाकिस्तान की नई सरकार भारत के साथ चर्चा करने के लिए अलग अलग मार्ग का इस्तेमाल कर रही है| उनकी इस कोशिशों को पाकिस्तान की लष्कर का भी अब साथ मिल रहा है| जनरल बाजवा ने भारत के साथ बातचीत करने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने रखा प्रस्ताव सही करार किया है| यह प्रस्ताव रखनेवाला पाकिस्तान शांति प्रिय है और यह प्रस्ताव ठुकरानेवाला भारत युद्धखोर है, यह चित्र पाकिस्तान बना रहा है| लेकिन पाकिस्तान के इस भारत विरोधी प्रचार को अन्य कोई भी देश साथ देने के लिए तैयार नही है|