इंडो-पसिफिक क्षेत्र में चीन से प्रभाव बढाने की कोशिश हो रही है तभी – अमरिका को भारत के साथ विविध स्तर के सामरिक सहयोग की उम्मीद

नई दिल्ली: भारत के प्रधानमंत्री ‘ईस्ट एशिया समिट’ के लिये १४ नवंबर के रोज सिंगापूर प्रस्थान कर रहे है| इस दो दिन की यात्रा के दौरान वह जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमरिका के शिर्ष नेताओं से चर्चा करेंगे| ‘इंडो-पसिफिक’ क्षेत्र में प्रभाव बढाने के लिये चीन की ओर से हो रही कोशिशों में बढोतरी हो रही है| इस पर चिंता जताई जा रही है तभी, भारत के प्रधानमंत्री जापान, ऑस्ट्रेलिय और अमरिका के प्रमुख नेताओं के बीच होने वाली चर्चा का बडा महत्त्व है| इस अवसर पर भारत इंडो-पसिफिक क्षेत्र के देशों के साथ विविध स्तर पर लष्करी सहयोग विकसित करें, ऐसी उम्मीद अमरिका ने जताई है|

इंडो,पसिफिक, क्षेत्र, चीन, प्रभाव बढाने, कोशिश, अमरिका, भारत, विविध स्तर, सामरिक सहयोग, उम्मीद‘क्वाड्रिलॅटरल सिक्युरिटी डायलॉग’ यानी ‘क्वाड’ नाम से जाने जा रहे भारत, अमरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया इन के सामरिक सहयोग इंडो-पसिफिक क्षेत्र में संतुलन कायम रखने के लिये सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण है, यह दावा हो रहा है| चीन का बढता बल और आपा के कारण इस क्षेत्र का संतुलन खो रहा है| खास तौर पर इस क्षेत्र में चीन की नौसेना ने शुरू की हुई गतिविधियां खतरनाक है और आने वाले समय में इस के गंभीर परिणाम होने की संभावना है, ऐसी चेतावनी अमरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया लगातर दे रहे है| इस परिस्थिती में भारत की अहमियतता बढ रही है| भारत की ओर से इंडो-पसिफिक क्षेत्र में विविध स्तर पर लष्करी सहयोग विकसित करने की जरूरत है, ऐसी आशा अमरिका के वरिष्ठ नौसेना अधिकारी ने जताई है|

चीन की बढती प्रबलता और विस्तार नीति से भारत के हितसंबंधों को बडी मात्रा में खतरा बन रहा है| यह होते हुए भी अपनी विदेश नीति का संतुलन कायम रखने का ख्याल रख कर भारत चीन के विरोधी गठबंधन में सिधे तौर पर शामिल होने से बचता आ रहा है| इसी कारण भारत ने जापान और अमरिकी नौसेना के संयुक्त युद्धाभ्यास में ऑस्ट्रेलिया को शामिल करने से इन्कार कर रहा था| लेकिन आने वाले समय में भारत को इस सागरी क्षेत्र में अन्य देशों के साथ लष्करी सहयोग विकसित करना ही होगा| अमरिका इस के लिये कोशिश कर रही है| भारत की ओर से इन कोशिशों को जरुरी प्रतिक्रिया मिली तो उससे सबकी भलाई होगी, ऐसा अमरिका के ‘इंडो-पसिफिक कमांड’ के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है|

जागतिक नियमों पर आधारित व्यवस्था को चुनौती दे कर चीन अपनी ‘बेल्ट अँड रोड इनिशिएटीव्ह’ परियोजना की सहायता से इंडो-पसिफिक क्षेत्र की देशों को कर्जा देकर अपनी चंगुल में फंसा रहा है| श्रीलंका का हंबंटोटा बंदरगाह इसी प्रकार से कब्जे में कर लिया है, इस की याद अमरिका के इस वरिष्ठ नौसेना अधिकारी ने दिलाई है| इस परिस्थिती में भारत की भूमिका और लष्करी सहयोग काफी अहम होगी, यह अमरिका के इस अधिकारी ने कहा है|

इस के पहले ऑस्ट्रेलिया ने भी भारत की ओर से ऐसी ही उम्मीत जताई थी| चीन की विस्तार नीति बढ रही है और भारत काही सावधानता का रवैया अपना कर अपने विदेश नीति का संतुलन कायम रखने के लिये अहमियत दे रहा है, ऐसी नाराजगी ऑस्ट्रेलियन सामरिक विश्‍लेषकों ने जताई थी| अमरिका के साथ जापान भी भारत से ऐसी ही उम्मीद रख रहा है| प्रधानमंत्री मोदी इनकी सिंगापूर यात्रा के दौरान ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमरिका के प्रमुख नेताओं की होने वाली चर्चा में इंडो-पसिफिक क्षेत्र में भारत अधिक व्यापक जिम्मेदारी का स्वीकार करे, इस के लिये अनुरोध किया जायेगा, ऐसे संकेत अमरिकी नौसेना अधिकारी ने किये वक्तव्य से प्राप्त हो रहे है|