जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर शुरू जोरदार संघर्ष के दौरान इटली से तोप के १ लाख गोले खरीदने की तैयारी में पाकिस्तान

नई दिल्ली: पाकिस्तान ने इटली से होवित्जर तोप और तोप के लगभग एक लाख गोले खरीद करने की तैयारी की है| फिलहाल जम्मू-कश्मीर की नियंत्रण रेखापर भारतीय लष्कर पाकिस्तान की गोलाबारी को जोरदार प्रत्युत्तर दे रहा है| इस परिस्थिति में पाकिस्तान कर रहा यह रक्षा व्यवहार भारत के दृष्टी से अहम साबित होता है| रक्षा सामग्री की खरीद के लिए इसके पहले पाकिस्तान बडी मात्रा में चीन पर निर्भर था| लेकिन, इन तोप के लिए पाकिस्तान ने इटली का चुनाव किया है, इस पर भारत के सामरिक विश्‍लेषक आश्‍चर्य जता रहे है|

जम्मू-कश्मीर, नियंत्रण रेखा, शुरू, जोरदार संघर्ष, दौरान, इटली, तोप, १ लाख गोले, खरीदने, तैयारी, पाकिस्तानजम्मू-कश्मीर की नियंत्रण रेखा पर लगातार गोलाबारी करके भारत को चुनौती दे रहे पाकिस्तान की सेना को सबक सिखाने की तैयारी भारत ने रखी है| इसके अनुसार पाकिस्तानी सेना की गोलाबारी को भारत जोरदार प्रत्युत्तर दे रहा है और इस दौरान पाकिस्तान के बंकर्स भी ध्वस्त किए जा रहे है| इस वजह से कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान ने जवानों की तैनाती भी बढाई है| साथ ही भारतीय सेना की गोलाबारी से बचने के लिए बाहर ना निकले और जमीन के स्तर पर ही रहे, ऐसी सूचना पाकिस्तानी लष्कर ने अपने जवानों को की है| नियंत्रण रेखा पर दोनों देशों के लष्कर के बीच यह संघर्ष शुरू है, तभी पाकिस्तानी सेना के लिए हो रही इस खरिदी का समाचार उजागर हुआ है|

भारत ने वर्ष २०१७ में अमरिका से १४५ होवित्जर तोप खरिदने के लिए लगभग पांच हजार करोड रुपयों का समझौता किया था| उसके बाद पाकिस्तान ने भी इटली से १२१ होवित्जर तोप खरिदी करने का निर्णय किया है| इन तोपों के लिए लगभग एक लाख गोले पाकिस्तान खरीद रहा है| इन तोप के गोलों का इस्तेमाल पाकिस्तान सिर्फ भारत के विरोध में करेगा, यह स्पष्ट है| इसी कारण इस समाचार पर भारत के सामरिक विश्‍लेषक ध्यान केंद्रीत कर रहे है| इसके पहले पाकिस्तान रक्षा सामग्री खरीदने के लिए चीन पर निर्भर रहा है| लेकिन होवित्जर तो और तोप के गोले खरीदने के लिए पाकिस्तान अब इटली के साथ व्यवहार कर रहा है, यह बात भी आश्‍चर्यचकित करनेवाली साबित होती है|

चीन की होवित्जर तोप इटली से भी महंगी होगी, इस कारण पाकिस्तान ने यह विकल्प चुना होगा, यह विश्‍लेषकों का कहना है| इससे पाकिस्तान और चीन में हुए मतभेद का भी दाखिला प्राप्त हो रहा है| ‘सीपीईसी’ प्रकल्प से पाकिस्तान और चीन के बीच गंभीर मतभेद होने की बाज उजागर हुई थी| इसी वजह से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इस प्रकल्प के बदौलत हो रहे निवेश में कटौती करने का निर्णय कर रहे है| वास्तव में यह निवेश नही है बल्कि कर्ज है और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री चीन के कर्ज के चंगुल से अपने देश को बचाने के लिए कोशिश कर रहे है, यह इस दौरान सामने आया है|