अमरिका के साथ बाहर के देशों को छोड़कर – ‘आसियन’ देशों के साथ संयुक्त लष्करी अभ्यास के लिए चीन का प्रस्ताव

बीजिंग: दक्षिण-पूर्व आशिया के अलावा अन्य क्षेत्र के देशों को छोड़कर ‘आसियन’ सदस्य देशों के साथ संयुक्त लष्करी अभ्यास करने का प्रस्ताव चीन ने दिया है। चीन का यह प्रस्ताव मतलब इंडो-पैसिफ़िक और उसका हिस्सा साउथ चाइना सी में अमरिका और उसके मित्र देशों के मोर्चे को मात देने की कोशिश दिखाई दे रही है। लष्करी अभ्यास के साथ साथ इंधन क्षेत्र की योजनाएं भी संयुक्तिक रूपसे लागू करने की चीन ने तैयारी दर्शाई है। उसके लिए भी विदेशी कंपनियों के सहभाग को नकारने की शर्त रखी है।

सिंगापूर में आसियन की बैठक शुरू हैं और गुरुवार को ‘आसियन-चीन मिनिस्ट्रीयल मीटिंग’ पूरी हुई। इस बैठक के लिए चीन के विदेश मंत्री वैंग ई उपस्थित थे। बैठक के दौरान चीन और आसियन देशों के बीच विविध क्षेत्र में सहकार्य पर चर्चा हुई। इसी चर्चा के दौरान चीन ने ‘आसियन’ देशों के साथ संयुक्त लष्करी अभ्यास और इंधन उत्खनन योजनाओं का प्रस्ताव दिया है।

अमरिका, बाहर के देशों, छोड़कर, आसियन देशों, संयुक्त लष्करी अभ्यास, प्रस्ताव, चीन‘चीन और दस आसियन सदस्य देशों ने नियमित रूपसे संयुक्त लष्करी अभ्यास करना चाहिए। लेकिन इस अभ्यास में क्षेत्र के बाहर के किसी भी देश का सहभाग नहीं चाहिए। अगर क्षेत्र के बाहर का देश शामिल होने वाला है, तो उसकी जानकारी सभी देशों को पहले से ही होनी चाहिए और उनकी इस समावेश को ऐतराज नहीं चाहिए’, ऐसा चीन के प्रस्ताव में सुझाव दिया गया है। लष्करी अभ्यास के साथ ही इंधन उत्खनन की योजनाएं संयुक्तिक रूपसे लागू करने की तैयारी चीन ने दर्शाई है। उसमें भी क्षेत्र के बाहर की कंपनियों को बाहर रखने की आग्रही भूमिका भी ली है।

आसियन देशों को चीन ने दिया यह प्रस्ताव अमरिका और अमरिका की पहल से खड़े हुए मित्र देशों के मोर्चे को साउथ चाइना सी से दूर रखने की कोशिश मानी जा रही है। अमरिका ने भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया इन देशों की सहायता से मजबूत मोर्चा स्थापित किया है और इन देशों ने लगातार चीन के वर्चस्व को चुनौती देने की भूमिका अपनाई है। अमरिका की पहल से तैयार हुआ यह मोर्चा चीन की साउथ चाइना सी की दादागिरी को रोकने वाला साबित हुआ है और आसियन देशों के लिए आश्वासक विकल्प सामने आया है।

इस पृष्ठभूमि पर कुछ सालों पहले साउथ चाइना सी अपने ही स्वामित्व का है, ऐसा दावा करके आसियन देशों के साथ संघर्ष की भूमिका अपनाए चीन ने अब सहकार्य का प्रस्ताव दिया है। आसियन देशों ने अमरिका और मित्र देशों के मोर्चे के बल पर चीन को दी हुई चुनौती इसके पीछे का प्रमुख कारण है, ऐसा माना जा रहा है। लेकिन दक्षिण-पूर्व आशिया के कुछ विश्लेषकों ने चीन का प्रस्ताव मतलब दक्षिण-पूर्व आशिया पर वर्चस्व जताने की चाल हो सकती है, ऐसी चेतावनी भी दी है।

दौरान, ‘आसियन-चीन’ बैठक में चीन ने साउथ चाइना सी के ‘कोड ऑफ़ कंडक्ट’ सन्दर्भ में चर्चा करने के प्रस्ताव का प्राथमिक मसौदा मान्य करने की जानकारी सिंगापूर ने दी है। सिंगापूर के विदेश मंत्री विवियन बालकृष्णन ने यह जानकारी देते हुए, यह मंजूरी ‘कोड ऑफ़ कंडक्ट’ के विवाद के सन्दर्भ में निर्णायक पड़ाव साबित हो सकता है, ऐसा दावा किया है। इस मसौदे में व्हिएतनाम ने चीन के ‘कृत्रिम द्वीपों’ पर साथ ही ‘लष्करी अड्डों’ पर तीव्र नाराजगी जताई है।