एसटीए-१ में भारत का समावेश करके अमरिका की चीन को चेतावनी

वाशिंग्टन – अमरिका ने अध्यादेश निकालकर भारत को ‘स्ट्रैटेजिक ट्रेड आर्गेनाईजेशन वन (एसटीए-१) का दर्जा दिया है। परमाणु शस्त्र प्रसार बंदी कानून पर हस्ताक्षर ना करते हुए अमरिका से एसटीए-१ दर्जा प्राप्त करने वाला भारत यह पहला देश ठहरा है। इसकी वजह से अमरिका से भारत को अतिप्रगत, संवेदनशील तंत्रज्ञान एवं अत्याधुनिक शस्त्रास्त्र प्रदान हो सकते हैं। इसीलिए भारत के बारे में ऐसा निर्णय लेकर अमरिका ने चीन को चेतावनी दी है, ऐसा दावा किया जाता है।

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भारत के पहले अमरिका ने ३६ देशों को यह दर्जा दिया था। इन में से अधिकतर देश नाटो के सदस्य है। मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (एमटीसीआर) और वासेनार अरेंजमेंट एवं ऑस्ट्रेलिया ग्रुप के साथ न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप (एनएसजी) सदस्यता होनेवाले देशों को अमरिका ने एसटीए-१ का दर्जा दिया था। भारत को एमटीसीआर एवं वासेनार अरेंजमेंट और ऑस्ट्रेलिया ग्रुप की सदस्यता मिली है। पर परमाणु तंत्रज्ञान पर नियंत्रण होनेवाले एनएसजी का सदस्यत्व भारत को अबतक नहीं मिला है। फिर भी भारत का एसटीए-१ में समावेश करके अमरिका ने भारत के बारे में अपनी धारणा अलग होने का संदेश सारी दुनिया को दिया है।

एनएसजी में भारत का शामिल होना केवल चीन के हटवादी धारणा की वजह से रुका है। अमरिका तथा एनएसजी के अन्य सदस्य देशों ने भी भारत को शामिल के बारे में अनुकूलता दिखाई है। फिर भी चीन ने तांत्रिक वजह आगे करके भारत का सदस्यत्व रोका था। पर एनएसजी का सदस्यत्व ना होते हुए भारत को एसटीए-१ में शामिल करके अमरिका ने चीन को झटका दिया है। भारत के अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थान सक्षम होते हुए चीन इसकी वजह से अधिक से अधिक अस्वस्थ बनता जा रहा है। एनएसजी में भारत के साथ पाकिस्तान का भी समावेश किया जाए, ऐसी मांग करते हुए चीन ने अपना मजाक उड़ाया था।

पिछले कई महीनों से अमरिका भारत के बारे में महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय भारत यह अपना धारणात्मक साझेदार देश होने की बात अमरिका ने घोषित की है। इस दौरान अमरिका ने इंडो पैसिफिक कमांड की घोषणा की है और इस क्षेत्र में भारत का स्थान असाधारण होगा ऐसे संकेत दिए थे। चीन की विस्तारवादी कार्यवाहियां रोकने के लिए भारत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, ऐसा अमरिका के अधिकारी अलग-अलग शब्दों में बता रहे थे। उस समय अफगानिस्तान जैसे देश में भी भारत अधिक महत्वपूर्ण भूमिका संपन्न कर सकता है। अमरिका की यही मांग है, भारत एवं अमरिका में विकसित हो रहे धारणात्मक सहायता दक्षिण आशिया के साथ क्षेत्र में निर्णायक भूमिका संपन्न कर सकता है।

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