ब्रेक्जिट समझौते को मंजूरी प्राप्त होने पर – ब्रिटीश प्रधानमंत्री इस्तिफा देगी

Third World Warलंदन: यूरोपीय महासंघ से अलग होने के लिए ब्रिटेन के सामने रखे गए आठों के आठ विकल्प ब्रिटीश संसद ने ठुकराए है| इस वजह से ‘ब्रेक्जिट’ का प्रश्‍न जटिल हुआ है और इसके सियासी परिणाम सामने आ रहे है| ‘ब्रेक्जिट’ समझौते को संसद ने मंजूरी दी तो इस्तिफा देने का प्रस्ताव प्रधानमंत्री थेरेसा मे इन्होंने संसद के सामने रखकर नई खलबली मचाई है|

ब्रेक्जिट, समझौते, मंजूरी प्राप्त, ब्रिटीश प्रधानमंत्री, इस्तिफा, लंदनब्रिटेन महासंघ से कब और कैसे अलग होगा, इस मुद्देपर बनी गडबडी दिन हर दिन और भी बढ रही है| प्रधानमंत्री थेरेसा मे एवं उनके सहयोगीयों ने रखे आठ प्रस्ताव और बदलाव ब्रिटेन की संसद ने ठुकराए है| कुछ दिन पहले ब्रिटेन की संसद ने ब्रेक्जिट की प्रक्रिया अब संसद संभालेगी, इस प्रकार के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी| इस वजह से संसद नया प्रस्ताव बहुमत से मंजूर करेगी एवं अगली राह खुली करेगी, यह समझा जा रहा था|

लेकिन, संसद ने ‘ब्रेक्जिट’ के अधिकार अपने हाथ लेने पर भी इस का हल प्राप्त नही हो सका है| बुधवार के दिन ब्रिटेन की संसद में ‘ब्रेक्जिट’ के मुद्दे पर अलग अलग विकल्प रखनेवाले आठ प्रस्ताव पेश दिए गए थे| इन प्रस्तावों में ‘नो डील’, ‘सिंगल मार्केट’ एवं ‘सेकंड रफरेंडम’ जैसे प्रस्ताव शामिल थे| लेकिन इसमें से एक भी प्रस्ताव को उम्मीद के नुसार बहुतम प्राप्त ना होने से सभी प्रस्ताव ठुकराए गए है| कोई भी विकल्प चुनने में संसद को मिली असफलता ब्रेक्जिट प्रक्रिया का मार्ग और भी जटिल करनेवाली साबित हो रही है|

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इसी पृष्ठभूमि पर प्रधानमंत्री मे ने अगले कुछ दिनों में ब्रेक्जिट के बारे में यूरोपीय महासंघ के साथ किए समझौता दुबारा संसद के सामने रखने का तय किया है| यह समझौता यानी एक जिम्मेदार विकल्प होने की बात कहकर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिले इस लिए हम इस्तिफा देने के लिए तैयार होने ऐलान उन्होंने किया| मे ने इस्तिफा देने के वक्तव्य से उनके कुछ विरोधकों को दिलासा मिल रहा है| फिर भी संसद सदस्यों का जरूरी समर्थन अभी प्राप्त नही हुआ है| इस वजह से मे ने इस्तिफा देने के लिए की घोषणा और गडबडी कर रही है|

इस दौरान, यूरोपीय कमिशन के प्रमुख डोनाल्ड टस्क इन्होंने, ब्रिटेन में ‘ब्रेक्जिट’ के विरोध कर रहे लोगों की भावनाओं पर ध्यान देने की जरूरत जताई| फिछले हफ्ते में ब्रिटेन की राजधानी लंदन में ब्रेक्जिट के मुद्दे पर दुसरी बार सार्वमत लेने की मांग पर भव्य मोर्चा की हांक दी गई थी| इसमे से लगभग १०० लाख नागरिक शामिल हुए थे| इसके अलावा सार्वमत के मुद्दे पर आयोजित की गई ऑनलाईन मुहीम को सबसे अधिक ५० लाख से भी अधिक नागरिकों ने समर्थन दिया था| इस वजह से ब्रिटेन’ दुबारा महासंघ में शामिल हो सकता है, यह एहसास महासंघ को हो रहा है और इस पर महासंघ ने तुरंत ही प्रतिक्रिया जताई है| महासंघ के प्रमुख टस्क? इन्हों ने ब्रिटीश सरकार ने ‘ब्रेक्जिट’ के निर्णय करते समय जनता की इच्छा पर ध्यान दिया जाए, यह उम्मीद व्यक्त की है|