ईरान की तरफ से इंधन की खरीदारी करने वाले भारत पर अमरिका का दबाव बढा

नई दिल्ली: ईरान से इंधन की खरीदारी करने वाले देशों को भी हमारे प्रतिबंधों का झटका लगेगा, ऐसी धमकी अमरिका लगातार दे रहा है। इस बारे में अमरिका की जाने वाली माँग की तरफ आज तक नजरअंदाज करने वाले जापान ने भी अब ईरान की तरफ से इंधन की खरीदारी रोकने का फैसला किया है। इस वजह से ईरान से अभी भी बड़े पैमाने पर इंधन की खरीदारी करने वाले भारत और चीन इन देशों पर दबाव बढ़ गया है।

सन २०१५ में ईरान के साथ किए गए परमाणु अनुबंध से अमरिका कुछ महीनों पहले पीछे हट गया था। साथ ही इसके आगे ईरान के साथ किसी भी प्रकार का व्यापार करने वाली कंपनियों और देशों पर कार्रवाई करने की घोषणा अमरिका ने की है। इसके परिणाम दिखाई देने लगे हैं। यूरोपीय देशों ने इन प्रतिबंधों को मानने से इन्कार किया है, लेकिन अमरिका की कार्रवाई की डर से यूरोपीय कंपनियां ही ईरान के साथ सहकार्य से पीछे हट गई हैं। इसके पहले ईरान के साथ इंधन व्यवहार पर निश्चित भूमिका लेने वाले जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश भी अमरिका के दबाव के सामने झुकने लगे हैं, यह स्पष्ट हुआ है।

ईरान, इंधन, खरीदारी, अमरिका, दबाव बढा, भारत, चीनदक्षिण कोरिया ने ईरान की तरफ से की जाने वाली इंधन खरीदारी में जुलाई महीने में लगभग ४० प्रतिशत कटौती की है। जापान की कंपनी ने सितंबर महीने के बाद ईरान से इंधन खरीदारी रोकने का फैसला घोषित किया है। यह सबकुछ अमरिका की आक्रामक भूमिका की वजह से ही हो रहा है। चीन भी ईरान से इंधन की खरीदारी न करे ऐसी अमरिका ने चेतावनी दी थी। लेकिन इन दिनों अमरिका के साथ व्यापार युद्ध खेल रहे चीन की तरफ से यह माँग मान्य होने की संभावना नहीं है। ईरान की तरफ से इंधन खरीदारी की या नहीं की, अमरिका के साथ अपना व्यापार युद्ध रुकने वाला नहीं है, इसका चीन को एहसास है। इसीलिए इस बारे में निर्णय लेना चीन के लिए आसान हो सकता है। लेकिन अमरिका के साथ सभी स्तरों पर सहकार्य बढ़ाने की कोशिश कर रहे भारत को इस बारे में निर्णय लेना अधिक मुश्किल हो सकता है।

पिछले कुछ हफ़्तों से अमरिका ने ईरान पर लगाए प्रतिबंधों के खिलाफ भारत ने निश्चित भूमिका ली थी। भारत इंधन की खरीदारी के सन्दर्भ में दूसरे किसी भी देश की सूचनाओं का पालन नहीं करने वाला। बल्कि अपनी इंधन विषयक जरूरतों को देखकर इस बारे में फैसला करेगा, ऐसा विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने घोषित किया था। इसपर अमरिका की तरफ से प्रतिक्रिया आई थी। नवम्बर महीने तक भारत ईरान से हो रही इंधन की खरीदारी पूरी तरह से रोक दे, ऐसी माँग अमरिका ने भारत से की थी। वैसा नहीं हुआ तो अमरिका भारत पर प्रतिबन्ध लगाने में नहीं हिचकिचाएगा, ऐसी चेतावनी अमरिका के वरिष्ठ अधिकारियों ने हाल ही में दी थी।

अमरिका की इस माँग का विचार करते हुए भारत ने ईरान की तरफ से की जाने वाली इंधन खरीदारी में कुछ हद तक कटौती की है। लेकिन यह इंधन खरीदारी को पूरी तरह से रोकना भारत के लिए संभव नहीं है। ईरान के साथ भारत के पुराने संबंध हैं और इन संबंधों को सामरिक सहकार्य का भी आधार है। ईरान का छाबहार बंदरगाह भारत विकसित कर रहा है। भारत ने ईरान से इंधन की खरीदारी रोकदी तो उसका इस सहकार्य पर विघातक परिणाम हो सकता है। भारत को इंधन की आपूर्ति करने वाले देशों की सूचि में तीसरे नम्बर पर स्थित ईरान को नाराज करना भारत के लिए मुनासिब नहीं होगा। इसीलिए अमरिका की यह माँग मान्य करने के लिए भारत तैयार नहीं है।

जल्द ही भारत और अमरिका के बीच होने वाली ‘टू प्लस टू’ चर्चा के दौरान ईरान से इंधन खरीदारी का मुद्दा अमरिका की तरफ से उपस्थित किए जाने की कड़ी संभावना है। इस वजह से इस मुद्दे पर भारत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होने वाली है।