कुलभूषण जाधव को फाँसी की सज़ा सुनानेवाले पाकिस्तान के सेनान्यायालय की संयुक्त राष्ट्रसंघ द्वारा आलोचना

संयुक्त राष्ट्रसंघ, दि. १६ :  नेदरलैंड के हेग में आंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में कुलभूषण जाधव के मसले को लेकर भारत और पाकिस्तान एक-दूसरे के खिलाफ़ खड़े हुए हैं, ऐसे में संयुक्त राष्ट्रसंघ ने पाकिस्तान के सेनान्यायालय की आलोचना की है| कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान के सेनान्यायालय ने फाँसी की सज़ा सुनाई थी| इस पृष्ठभूमि पर, संयुक्त राष्ट्रसंघ ने की आलोचना को बहुत बड़ा औचित्य प्राप्त हुआ है|

सोमवार को हेग में आंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में हरिश सालवे ने कुलभूषण जाधव मामले में भारत का पक्ष रखा| ‘पाकिस्तान के सेना न्यायालय ने जाधव को सुनायी गई सजा अन्यायकारक है| यह संयुक्त राष्ट्रसंघ के व्हिएन्ना समझौते का उल्लंघन साबित होता है’ ऐसा आरोप सालवे ने किया| साथ ही, जाधव को क़ानूनी सहायता दिलाने का भारत का अधिकार पाकिस्तान ने ठुकराया, इस बात पर भी सालवे ने न्यायालय का ग़ौर फ़रमाया| इसीके साथ, किसी भी प्रकार की विश्‍वासार्हता खोये पाकिस्तान के सेना न्यायालय की कोई आंतर्राष्ट्रीय वैधता नहीं है, यह बात भी सालवे ने ध्यान में लाकर दी है|

फाँसी की सज़ाजाधव का ईरान की सीमा से अपहरण कराके इसके बाद उन्हे पाकिस्तान लाया गया था| इसलिए उनकी कहाँ और कैसी गिरफ़्तारी हुई, इसके तफ़सील पाकिस्तान की एजन्सी ने दिये नहीं है, ऐसा कहकर सालवे ने, कुलभूषण जाधव पर पाकिस्तान ने किये आरोपों की हवा निकालकर रख दी| भारतीय मीडिया सोमवार के दिन हुई सुनवाई को बारिक़ी से देख रही थी| इस सुनवाई में से भारतीय सुनवाई का लाईव टेलिकास्ट भी किया गया| हरिश सालवे ने बेजोड़ युक्तिवाद करके पाकिस्तान का भाँड़ाफोड़ कर दिया, ऐसा दावा वरिष्ठ कानूनविश्‍लेषक कर रहे हैं|

इसके बाद पाकिस्तान के वक़ील ने अपने देश का बचाव करने की कोशिश की| लेकिन यह बचाव बहुत ही कमज़ोर था, ऐसा कानूनविश्‍लेषकों का कहना है| यह मसला अचानक से आंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में लाकर, भारत ने हम पर न्यायालयीन हमला किया है, ऐसी आलोचना पाकिस्तान के वक़ील ने की| साथ ही, इस मामले में बचाव के लिये हमे पर्याप्त समय भी मिला नहीं, ऐसा कारण भी पाकिस्तान के वक़ील ने आगे किया| कुलभूषण जाधव ने, वे भारतीय खुफिया एजन्सी रॉ के लिए काम कर रहे होने की बात मान्य करने का वीड़ियो इस न्यायालय में दिखाने की कोशिश पाकिस्तान ने की थी| लेकिन न्यायालय ने यह विडिओ देखने से इन्कार करके पाकिस्तान को झटका दिया|

आंतर्राष्ट्रीय न्यायालय ने हालाँकि अभी तक इस मामले में निर्णय नहीं दिया है, लेकिन वह निर्णय पाकिस्तान के पक्ष में नहीं होगा, ऐसे आसार अभी से ही दिखाई देने लगे हैं| ‘यह मामला आंतर्राष्ट्रीय न्यायालय की कक्षा में आता है या नहीं’, यह एक ही बात भारत के विरोध में जा सकती है| अन्यथा इस मामले की सुनवाई में पाकिस्तान पूरी तरह से दुविधा में फ़ँस चुका दिखायी दे रहा है| आंतर्राष्ट्रीय न्यायालय ने भले ही पाकिस्तान के खिलाफ निर्णय दिया हो, मग़र फिर भी पाकिस्तान के लिए यह फैसला स्वीकारना बंधनकारक नहीं है, ऐसा दावा पाकिस्तान द्वारा किया जा रहा है| लेकिन आंतर्राष्ट्रीय न्यायालय का फैसला पाकिस्तान के लिए बंधनकारक ही रहेगा, ऐसा जानकारों का कहना है|

आंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के फैसले के खिलाफ संयुक्त राष्ट्रसंघ में अपील करने का मार्ग पाकिस्तान के सामने अवश्य खुला है| लेकिन संयुक्त राष्ट्रसंघ ने ही पाकिस्तान के सेनान्यायालय की आलोचना करने के कारण, पाकिस्तान की दिक्कते बढ़ीं हैं ऐसा दिखाई दे रहा है| पाकिस्तान का सेनान्यायालय निष्पक्ष और पारदर्शक नहीं है, ऐसा दोषारोपण संयुक्त राष्ट्रसंघ की समिति ने किया है|