माओवादी नेता रिश्तेदारों की शिक्षा पर कर रहे है लाखों का खर्चा

नई दिल्ली: देश के दुर्गम इलाकों की विकास परियोजनाओं के साथ साथ स्कूलों पर भी हमले करने वाले माओवादी नेता बहुत ही ढोंगी हैं, ऐसा केन्द्रीय गृहमंत्रालय ने दी जानकारी से सामने आया है। दुर्गम इलाकों के बच्चों की शिक्षा को उध्वस्त करने वाले माओवादी नेता, इस हिंसक आन्दोलन से मिलने वाला पैसा अपने परिवार की उच्च शिक्षा के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं, ऐसा गृहमंत्रालय ने कहा है। ऐसे माओवादी नेताओं के नाम भी गृहमंत्रालय के अधिकारियों ने दिए हैं।

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संदिप यादव, अरविन्द यादव, प्रद्युम्न शर्मा और मुसाफिर सहानी इन माओवादी नेताओं ने अपने परिवार के सदस्यों की उच्च शिक्षा के लिए करीब १२ से २२ लाख रुपये खर्च किये हैं। यह पैसा माओवादी नेताओं ने अपने आन्दोलन के लिए जमा कर रहे हैं, ऐसा कहा था। इन माओवादी नेताओं ने करोड़ो रुपयों की माया जमा करने की बात सामने आयी है। उनसे ५ करोड़ रूपए और ३२ एकड़ जमीन बरामद की गई है। यह जानकारी देते समय केंद्री गृहमंत्रालय के अधिकारियों ने माओवादी नेताओं का ढोंगी रूप दुनिया के सामने लाया है।

पिछले कुछ महीनों से माओवादियों के खिलाफ तीव्र कार्रवाई शुरू हुई है। उसके अनुसार माओवादियों के प्रभाव वाले क्षेत्र में लष्करी कार्रवाई के साथ साथ इस दुर्गम इलाके का विकास और प्रगति की तरफ भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ऐसे इलाकों के विकास परियोजनाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी सुरक्षा दल पर सौंपी गई है और इसके सकारात्मक परिणाम भी दिखाई दे रहे हैं। उसी समय सुरक्षा दलों की कार्रवाई की वजह से माओवादियों पर दबाव बढ़ता जा रहा है और माओवादियों के प्रभाव वाले जिलों की संख्या तेजी से कम हो रही है, ऐसी जानकारी केन्द्रीय गृहमंत्रालय ने हाल ही में दी थी।

उसके बाद अब माओवादी नेताओं का ढोंग भी गृहमंत्रालय ने दुनिया के सामने रखा है। दुर्गम इलाकों के बच्चों को शिक्षा न मिले, इसके लिए माओवादियों ने स्कूलों को उध्वस्त किया था। इस वजह से बहुत समय तक यहाँ के बच्चे शिक्षा से वंचित रहे हैं। अन्य लोगों के बच्चों को शिक्षा न मिले इसके लिए कार्रवाई करने वाले माओवादी नेता अपने परिवार के सदस्यों की शिक्षा के लिए लाखों रूपए खर्च कर रहे हैं, यह बात गृहमंत्रालय के अधिकारियों ने मीडिया के सामने रखी है। इन माओवादी नेताओं के नाम खोलकर उन्होंने अपने निकटवर्तियों के मेडिकल और अभियांत्रिकी शिक्षा के लिए कितना खर्चा किया है, इसका तपशील भी अधिकारियों ने घोषित किया है।

उनकी फीज के लिए आने वाले लाखो रूपए माओवादियों ने व्यापारी ठेकेदारों से फिरौती लेकर साथ ही गरीबों पर अत्याचार करके पाए हैं। अपने आन्दोलन का उदात्त हेतु साध्य करने के लिए यह पैसा आवश्यक होने का दावा माओवादी नेता करते हैं। लेकिन उसका खुद के लिए इस्तेमाल करके माओवादी नेताओं ने सबको गुमराह किया है, ऐसा दिखाई दे रहा है।