तिब्बत में चीनी लष्कर का युद्धाभ्यास

बीजिंग – चीन ने तिब्बत में युद्धाभ्यास शुरू करके भारत को चेतावनी दी है। इस युद्धाभ्यास की जानकारी चीन के सरकारी मुखपत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने दी है। सन १९६२ के युद्ध में चीन ने भारत पर जीत पाई थी। लेकिन इस जीत के फल चीन को नहीं खाने मिले, इसका कारण चीन की सेना को रसद की आपूर्ति करने के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं थी, ऐसा ग्लोबल टाइम्स ने युद्धाभ्यास के बारे में दी खबर में कहा है।

ग्लोबल टाइम्स की खबर के अनुसार मंगलवार के दिन चीनी लष्कर ने यह युद्धाभ्यास किया है। लगभग ४५०० मीटर ऊंचाई पर स्थित क्विंटाई-तिब्बत इस पठार पर इस अभ्यास का आयोजन किया गया था। यहाँ की दुर्गम भौगोलिक रचना और कठीन वातावरण से यहाँ सैनिकों को रसद और लष्करी सामग्री की आपूर्ति करना कठिन हो जाता है। इस आपूर्ति में आने वाली रुकावटें दूर करके ऐसे दुर्गम इलाकों में भी तेजी से रसद की आपूर्ति करने की क्षमता चीन विकसित कर रहा है।

‘सदर अभ्यास में लष्कर के साथ चीन की अन्य सरकारी यंत्रणा, स्थानीय कंपनियों की भी सहायता ली गई थी है। तिब्बत की स्थानीय कंपनियों की तरफ से इंधन और सरकारी यंत्रणाओं का इस्तेमाल अनाज की आपूर्ति के लिए किया गया। लष्करी और नगरी सहकार्य की दिशा में चीन ने रखा यह कदम महत्वपूर्ण साबित होता है। आने वाले समय में मजबूत लष्कर निर्माण का लक्ष्य हासिल करने के लिए चीन की यह व्यूहरचना है’, ऐसा विश्लेषकों ने दावा किया है।

पिछले साल ‘डोकलाम’ में भारत और चीन के सैनिकों के बीच संघर्ष हुआ था। उसके बाद पहली बार तिब्बत में अतिउंचाई के दुर्गम इलाके में चीन की तरफ से इस तरह के अभ्यास का आयोजन किया गया है। इसके पहले पिछले वर्ष के अगस्त महीने में चीन ने यहाँ पर अभ्यास किया था, ऐसा ग्लोबल टाइम्स ने कहा है। ग्लोबल टाइम्स ने अपने लेख में सन १९६२ साल का प्रमाण दिया है।

अतिउंचाई के इलाके में संघर्ष हुआ तो लष्कर को रसद की आपूर्ति करना बड़ी चुनौती होती है। १९६२ के युद्ध में चीन को बड़ी सफलता मिली थी। लेकिन चीन को इसके फल खाने नहीं मिले थे। क्योंकि चीन यहाँ पर रसद की आपूर्ति नहीं कर सका। उस समय स्थानीय लोगों ने चीन की सेना की सहायता की, लेकिन वह अस्थायी स्वरुप की थी। ऐसा लष्करी विशेषज्ञ सॉंग झोंगपिंग ने कहा है।

डोकलाम का उल्लेख और सन १९६२ के युद्ध की याद इन दोनों चीजों का ग्लोबल टाइम्स के लेख में आया हुआ सन्दर्भ सूचक है। सन १९६२ में असावधान भारत पर प्राप्त की जीत का प्रमाण देकर चीन ने भारत इस हार को न भूले, ऐसा सुझाव दिया है। उसी समय डोकलाम में भारत ने किया हुआ अपमान चीन नहीं भूलने वाला है, ऐसा सन्देश भी चीन के सरकारी दैनिक ने दिया है।

वर्तमान की परिस्थिति में अमरिका के साथ व्यापार युद्ध में उतरे चीन ने भारत के साथ सभी स्तरों पर संबंध सुधारने के लिए कदम उठाए हैं। चीन में निर्यात किए जाने वाले भारतीय उत्पादों पर आयात कर कम करके चीन ने भारत को सकारात्मक सन्देश दिया है। उसी समय अमरिका के साथ के व्यापार युद्ध में चीन और भारत एकजुट दिखाए, ऐसा प्रस्ताव भी चीन के विश्लेषकों ने दिया है। लेकिन ऐसा होते हुए भी भारत के ऊपर का लष्करी दबाव थोडा भी कम नहीं होगा, इसका भी ख्याल चीन रख रहा है। तिब्बत में पूरा हुआ युद्धाभ्यास इसीकी ही गवाही दे रहा है और ग्लोबल टाइम्स ने सन १९६२ के युद्ध का और डोकलाम का उल्लेख भारत को चेतावनी देने के लिए किया है।