तैवान के बाद चीन अन्य एशियाई देशों पर कब्जा करेगा – तैवानी राष्ट्राध्यक्षा की चेतावनी

Third World Warतैपेई: ‘राष्ट्राध्यक्ष शी जिनपिंग इनके नेतृत्व में चीन से तैवान के लिए बना लष्करी खतरा हर दिन बढ रहा है| आज चीन अपने लष्करी सामर्थ्य के बल पर तैवान पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है| इसके बाद एशिया के अन्य देशों पर भी इसी खतरे का सामना करने की नौबत आ सकती है| जो भी कोई देश चीन के सामने घुटने टिके गा नही उन एशियाई देशों को तैवान के जैसे ही चीन से लष्करी खतरा बन सकता है|’, यह चेतावनी तैवान की राष्ट्राध्यक्षा त्साई ईंग वेन इन्होंने दी है| चीन से बढ रहा लष्करी खतरा रेखांकित करने के लिए तैवान की राष्ट्राध्यक्षा न अपने पडोसी एशियाई देशों को सतर्क किया है|

तैवान में राष्ट्राध्यक्षीय चुनाव निकट आ रहे है और तैवान में चीन समर्थक विपक्षी गुट राष्ट्राध्यक्षा त्साई इनकी सरकार पर जोरदार आलोचना कर रहे है| चीन ने भी राष्ट्राध्यक्ष त्साई इन्हें सत्ता से बाहर निकालने के लिए जोर की कोशिश शुरू की है और चीन की जिनपिंग संरकार ने सियासी, आर्थिक और लष्करी बल का इस्तेमाल शुरू किया है, ऐसा आरोप हो रहा है| दो दिनों पहले राष्ट्राध्यक्ष त्साई इन्होंने अमरिका की चोटी की वृत्तवाहिनी को दी हुई मुलाकात में चीन की बढती लष्करी आक्रामकता को लेकर एशियाई और पश्‍चिमी देशों को चेतावनी दी|

तैवान, चीन, अन्य, एशियाई देशों, कब्जा करेगा, तैवानी राष्ट्राध्यक्षा, चेतावनीचीन के कम्युनिस्ट नेताओं ने राष्ट्राध्यक्ष जिनपिंग इन्हें आजीवन नेतृत्व बहाल करने से चीन के लष्कर की आक्रामक गतिविधियों में बढोतरी हुई है| इस वजह से चीन अधिकाधिक बलवान और महत्वाकांक्षी हो रहा है और तैवान के लिए लष्करी खतरा भी बढा है| चीन की इस लष्करी आक्रामकता की वजह से तैवान का अस्तित्व, सुरक्षा और जनतंत्र के लिए बडा खतरा बना है| तैवान के लिए यह सबसे बडा मुद्दा है’, ऐसा राष्ट्राध्यक्ष त्साई इन्होंने कहा है|

चीन की इस आक्रामकता से पश्‍चिमी मित्र देश तैवान की सुरक्षा करे, ऐसा निवेदन भी उन्होंने किया है| साथ ही चीन के लष्करी बल का मुकाबला करने के लिए अमरिका ने तैवान के लिए हथियारों की आपुर्ति की थी, यह भी राष्ट्राध्यक्ष त्साई इन्होंने स्वीकार किया है| लेकिन, तैवान को ऐसी लष्करी सहयोग की बडी मात्रा में जरूरत है, ऐसा त्साई ने कहा है|

इसके साथ ही चीन की लष्करी आक्रमकता को अभी विरोध नही किया तो चीन तैवान पर कब्जा करेगा| ऐसा हुआ तो एशिया के अन्य किसी भी देश पर तैवान जैसी परिस्थिति का सामना करने की नौबत आ सकती है| चीन की इच्छा के विरोध में गए तो लष्करी धमकियों से चीन एशियाई देशों पर भी कब्जा कर सकता है, यह चेतावनी त्साई इन्होंने दी है| साथ ही चीन का सामना करने के लिए तैवान का लष्कर हमेशा चौकना होता है| लेकिन, चीन और तैवान के सामर्थ्य में बडा फरक है और इसे कम करने के लिए मित्रदेशों के सहयोग की अपेक्षा होने का निवेदन त्साई इन्होंने किया है|

इस दौरान, तैवान यह अपना स्वायत्त भूभाग होने का दावा चीन करता रहा है| अन्य कोई भी देश चीन को नजरअंदाज करके तैवान के साथ सियासी, आर्थिक या लष्करी सहयोग स्थापित ना करे, ऐसी धमकी चीन ने दी है| लेकिन, चीन की इस धमकी के बावजूद अमरिका ने तैवान के लिए हथियारों की आपुर्ति जारी रखी है| लेकिन, इस शस्त्र सहायता पर कडी आलोचना करके चीन ने अमरिका को लष्करी कार्रवाई करने की धमकी दी थी| साथ ही तैवान की राष्ट्राध्यक्ष त्साई इन्हें भी धमकाया था|

तैवान को लेकर चीन ने अपनाई इस आक्रामक भूमिका की और भी एक अहम बाजू है| चीन ने ‘वन चाइना’ नीति अपनाई है और इसके नुसार हॉंगकॉंग, मकाव यह भी चीन का हिस्सा होते है| चीन इसमें तैवान को भी शामिल कर रहा है| लेकिन, तैवान ने अपनी आजादी बरकरार रखकर चीन की सियासी एवं लष्करी दबाव का सफलता से सामना किया तो हॉंगकॉंग और मकाव से भी चीन को ऐसे ही झटके महसूस हो सकते है| साथ ही इससे चीन में अंतर्गत सियासी संघर्ष शुरू होगा और चीन की कम्युनिस्ट हुकूमत पलटने की कोशिश जोर पकड सकती है|

इससे बचने के लिए अमरिका और अन्य बडे देशों से टकराव करने की तैयारी रखकर चीन अब तैवान पर लष्करी दबाव बढा रहा है| लेकिन, अमरिकी राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प इन्होंने तैवान को लेकर डटकर भूमिका स्वीकारने से चीन के दांव उसी देश पर पलटते दिखाई दे रहा है|