१०८. स्टार्टअप नेशन

इस्रायल को उपलब्ध रहनेवाले संसाधनों की मर्यादा को देखते हुए, आय के नये नये स्रोत ढूँढ़ने की कोशिशें इस्रायल करता आया है| इसमें विज्ञान-तंत्रज्ञान के संशोधन-विकास के क्षेत्र की चाबी उसके हाथ आयी|

संसाधनों की अपर्याप्तता होने के कारण, कम संसाधनों से अधिक से अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए; साथ ही, चारों तरफ़ से शत्रुराष्ट्रों से घिरे होने के कारण अपनी सेना की भेदकता को बढ़ाने के लिए, इस्रायल के विभिन्न क्षेत्रों में चल रहा संशोधन इस्रायल के लिए अस्तित्व बनाये रखने हेतु ज़रूरी था ही; लेकिन वह अपने लिए आय का महत्त्वपूर्ण स्रोत भी हो सकता है यह समझ में आते ही इस्रायल ने उसपर उस दृष्टि से भी अधिक मेहनत करना शुरू किया|

लेकिन एक बात तो तय थी कि इस्रायल के क्षेत्रफ़ल को देखते हुए, इस्रायल के संशोधनों के लिए स्थानिक मार्केट सीमित ही रहनेवाला था| इस कारण, इस्रायल के संशोधकों को, उद्योजकों को तथा सरकार को भी जागतिक स्तर पर ही, यानी संशोधन-निर्यात के बारे में ही अधिक विचार करना आवश्यक था| लेकिन यदि दुनिया की प्रतिस्पर्धा में इस्रायली उत्पादनों को खड़ा करना हों, तो उनका नाविन्यपूर्ण (इनोवेटिव्ह) – ‘हटके’ ही होना ज़रूरी था| इस्रायल के विज्ञान-तंत्रज्ञान संशोधन-विकास का प्रवास यह इस नाविन्यपूर्णता के घटक पर ही केंद्रित रहा है….और यहीं पर ‘स्टार्टअप्स’ का महत्त्व समझ में आता है|

आज देखा जाये, तो इस्रायली संस्कृति यह मानो ‘स्टार्टअप’ संस्कृति ही बन चुकी है| यहॉं स्टार्टअप कंपनी शुरू करना बहुत ही आसान है| मूलतः इस्रायल को ही ‘स्टार्टअप-नेशन’ कहा जाता है| सिलिकॉन व्हॅली के बाद के दूसरे नंबर के स्टार्टअप शहर के रूप में तेल अवीव्ह का ज़िक्र किया जाता है; वहीं, ‘पर कॅपिटा’ स्टार्टअप्स की संख्या में इस्रायल पहले नंबर का देश है|

इस्रायल में सालाना विभिन्न क्षेत्रों में तक़रीबन १ हज़ार से भी अधिक स्टार्टअप्स का निर्माण होता है| इस्रायल के कई परिवारों में, दक़ियानुसी सोच के बाहर की कोई संकल्पना होनेवाला और उसे स्टार्टअप्स के माध्यम से मूर्तरूप देना चाहनेवाला ऐसा एकाद तो ‘उद्योजक’ पाया जाता है|

इन स्टार्टअप्स में से, सरकारी निकषों की पूर्तता कर सकनेवाले स्टार्टअप्स को निवेश तथा अन्य बातों की आपूर्ति करने के लिए इस्रायली सरकार के – इंडस्ट्रियल पार्क्स, टेक्नॉलॉजिकल इन्क्युबेटर्स आदि उपक्रम होते ही हैं|

लेकिन सरकारी निकषों की पूर्तता न कर सकनेवालों को तो निजी निवेशकों को ढूँढ़ना पड़ता है| शुरू शुरू में माता-पिता, परिजन, दोस्त, रिश्तेदार इनसे कर्ज़ा लेकर आरंभ किया जाता है| लेकिन धीरे धीरे जब स्टार्टअप की ज़रूरतें बढ़ने लगती हैं, तब ये घरेलु स्रोत उसके लिए अपर्याप्त साबित होने लगते हैं|

ऐसे समय इन नये से निर्माण हो रहे स्टार्टअप्स को पूँजि की आपूर्ति करने के लिए निजी निवेशक भी तत्पर रहते हैं| उन्हें ‘एंजल इन्व्हेस्टर’, ‘व्हेंचर कॅपिटलिस्ट’ कहा जाता है| किस स्टार्टअप की संकल्पना अपने निवेश के लिए अच्छे रिटर्न्स देगी इसका बारिक़ी से अध्ययन करके ही यह निवेश किया जाता है|

इनमें से ‘एंजल इन्व्हेस्टर’ यह आम तौर पर एक व्यक्ति होता है और वह स्वयं का पैसा स्टार्टअप में निवेश करता है| ये लोग केवल स्वयं के पैसों का निवेश कर रहे होने के कारण उनकी ताकत उतनी ज़्यादा नहीं होती और वे स्टार्टअप के एकदम शुरुआती दौर में ही उसमें निवेश करते हैं|

वहीं, ‘व्हेंचर कॅपिटलिस्ट’ यह प्रायः कंपनी होती है और वह उनकी कंपनी में लोगों द्वारा निवेश किये हुए पैसों का स्टार्टअप में निवेश करती है| लेकिन इस कारण, उनके निकष ‘एंजल इन्व्हेस्टर्स’ से अधिक स़ख्त होते हैं और लोगों के पैसों का निवेश कर रहे होने के कारण उनके पास ज़्यादा पैसा होता है, अर्थात् उनकी आर्थिक ताकत अधिक होती है| ये प्रायः ज़रासा स्थिर हो चुका स्टार्टअप ही निवेश के लिए चुनते हैं|
लेकिन इनमें से सभी स्टार्टअप्स क़ामयाब होते हैं ऐसा नहीं है| कई स्टार्टअप्स ग़लत नीतियों के कारण या उनके पीछे रहनेवाली ‘क्लिक’ न होने के कारण या फिर प्रतिस्पर्धा के कारण असफल होकर बन्द पड़ते हैं| आज की घड़ी में इस्रायल में लगभग ५ हज़ार से भी अधिक स्टार्टअप्स कार्यरत हैं ऐसा बताया जाता है|

लेकिन व्यवहार्य (फ़ीज़ीबल) संकल्पनाओं पर निर्माण हुए और अच्छे तरीक़े से नीतियॉं तय किये गये कुछ स्टार्टअप्स क़ामयाब हो जाते हैं| स्टार्टअप ‘क़ामयाब’ होना यानी वह अब ‘स्टार्टअप’ न रहना| अर्थात् उसीके क्षेत्र की अथवा उसके क्षेत्र में प्रवेश करना चाहनेवाली किसी बड़ी कंपनी द्वारा उसे ‘टेकओव्हर’ (अधिग्रहित) किया जाना| इस प्रक्रिया को ‘एक्झिट’ कहा जाता है और इस प्रकार ‘एक्झिट’ करना यह स्टार्टअप की क़ामयाबी मानी जाती है| इसपर हालॉंकि आलोचना की जाती है (इस्रायली संशोधक ने इतने सारे पापड़ बेलकर इस्रायल में विकसित की हुई संकल्पना आख़िरकार विदेशी कंपनी को बेच दी वगैरा), फिर भी स्टार्टअप में निवेश करनेवाले निवेशकों की स्टार्टअप से यही उम्मीद होती है, क्योंकि ऐसी ‘एक्झिट’ में से ही उन्हें उनके निवेश पर सर्वाधिक रिटर्न मिलते हैं|

इस्रायल में केवल ‘एंजल इन्व्हेस्टिंग’ अथवा ‘व्हेंचर कॅपिटलिंग’ ही मज़बूत है ऐसा नहीं है; बल्कि ‘एक्झिट सिस्टिम’ अर्थात् अच्छीख़ासी तरक्की की हुए स्टार्टअप्स को टेकओव्हर करने की प्रक्रिया ने भी अब तेज़ रफ़्तार पकड़ ली है| इस्रायल में होनेवाला यह ‘एक्झिट’ का कारोबार अब सालाना अरबों डॉलर्स की तादाद तक पहुँच चुका है| इससे हम जान सकते हैं कि इस ‘एक्झिट सिस्टिम’ की व्याप्ति कितनी है| इनमें से सबसे बहुचर्चित तथा बड़ी ‘एक्झिट’, इस्रायली प्रोफेसर ऍम्नन शाशुआ ने ‘ऍडव्हान्स्ड ड्रायव्हर असिस्टन्स सिस्टिम’ विकसित करने के लिए शुरू किये हुए ‘मोबाईलआय’ इस स्टार्टअप की थी| सन १९९९ में शुरू हुए मोबाईलआय स्टार्टअप को सन २०१७ में इंटेल कंपनी ने १५.३ अरब डॉलर्स को ख़रीद लिया| इंटेल ने गत दशकभर में ३० से भी अधिक इस्रायली स्टार्टअप्स को अधिग्रहित किया है| अन्य भी कुछ विदेश कंपनियॉं चढ़ते दामों में इस्रायली कंपनियों को अधिग्रहित कर रही हैं|

आयसीक्यू (इन्स्टन्ट मेसेंजर प्लॅटफॉर्म – एओएल – २८७ मिलियन डॉलर्स), मर्क्युरी (बी२बी आयटी सोल्युशन्स – एचपी – ४.५ अरब डॉलर्स), प्लेटिका (मोबाईल गेमिंग – चायनीज इन्व्हेस्टर्स ग्रुप – ४.४ अरब डॉलर्स), एम-सिस्टिम्स (युएसबी फ्लॅश ड्राईव्ह्ज – सॅनडिस्क – १.५ अरब डॉलर्स) ये उदाहरण ब्रॅकेट्स में दिये हुए विभिन्न विदेशी कंपनियों ने उस उस क़ीमत पर अधिग्रहित किये हुए उस उस क्षेत्र के इस्रायली स्टार्टअप्स के हैं|

वैसे देखा जाये, तो इन स्टार्टअप्स में इस्रायली सेना का अहम सहभाग रहता है| इस्रायल में ज्यू छात्रों के लिए ३ साल सैनिकी प्रशिक्षण एवं सेवा अनिवार्य होती है| इसके लिए इकट्ठा हुए बच्चों में से ‘जिनियस’ छात्रों को खोजकर, उन्हें हमेशा के सैनिकी प्रशिक्षण के साथ ही अँटी-हॅकिंग, सायबर सिक्युरिटी आदि क्षेत्रों में अतिरिक्त विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है, जो उन्हें लष्करी सेवा के साथ ही व्यक्तिगत जीवन में भी उपयोगी साबित होता है| इस सैनिकी प्रशिक्षण में समविचारी मित्र बनते हैं| ऐसे समविचारी मित्रों ने आगे चलकर एकत्रित रूप में स्टार्टअप्स शुरू किये होने के कई उदाहरण हैं, जिनमें अधिकतर उदाहरण सायबर सिक्युरिटी क्षेत्र के हैं| इस्रायली सेना के गाईडेड मिसाईल बनानेवाले डिपार्टमेंट में काम करनेवाले इंजिनियर ने, मिसाईल पर लगे कॅमेरे से प्रेरणा लेकर, आगे चलकर स्वयं के स्टार्टअप के ज़रिये ‘पिल कॅमेरे’ का निर्माण किया, यह सर्वज्ञात ही है|

ऐसा यह ‘स्टार्टअप नेशन’ इस्रायल! विज्ञान-तंत्रज्ञान संशोधन-विकास में होनेवाली अपनी ताकत को पहचानकर, उसके अनुसार अपनी नीतियॉं बनायीं होने के कारण यहॉं नयीं संकल्पनाओं की कभी भी कमी महसूस नहीं हुई| इस कारण, चाहे ऐसे कितने भी स्टार्टअप्स ‘एक्झिट’ क्यों न हो जायें, मग़र फिर भी नयीं नयीं संकल्पनाएँ लेकर इस्रायल में नये नये स्टार्टअप्स का निर्माण होता ही रहा है और आगे भी होता रहेगा, उसमें कोई शक़ नहीं है|(क्रमश:)

– शुलमिथ पेणकर-निगरेकर

 

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