चीन की सीमा के निकट भारत की विकास योजना के लिये २५ हजार करोड रुपयों का प्रावधान

 १९ सडके, २९ इमारतों के साथ अन्य सुविधाओं का निर्माण होगा

नवी दिल्ली – भारत की सीमा के निकट चीन की सेना की गतिविधियों में बडी मात्रा में बढोतरी हो रही है, तभी भारत ने भी अपनी सरहदी क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं का विकास करने के लिये कई परियोजनाओं को शुरू किया है| इसके लिये लगभग २५० अरब रुपयों का प्रवधान किया गया है| केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंग इनकी अध्यक्षता में बनाई उच्चस्तरीय समिती ने यह ऐलान किया है| चीन सीमा से निकटवर्ती क्षेत्र से जुडे इस ऐलान को बडा सामरिक और राजनीतिक महत्त्व है|

अरूणाचल प्रदेश और सिक्कीम इन चीन सीमा से जुडे राज्यों में यह बुनियादी सुविधाओं की परियोजना शुरू हो रही है| इस में सडक निर्माण और प्रगत सुविधाओं से लैस इमारतों का निर्माण करने की योजना है| इस के पहले ईशान्य के राज्यों में बुनियादी सुविधाओं का निर्माण करने के विषय में भारत ने ध्यान नही दिया था| इस अनदेखी का पुरा लाभ चीन ने उठाया था| इस दौरान चीन ने भारतीय सीमा से जुडे क्षेत्र में काफी मात्रा में बुनियादी सुविधाओं का विकास किया| खास तौर पर तिब्बट में चीन ने सेना की बडी गतिविधियां शुरू की है और इस के लिये जरुरी बुनियादी सुविधाओं का निर्माण किया है| साथ ही अरुणाचल प्रदेश में तवांग यह तिब्बट का यानी चीन का हिस्सा है, यह दावा चीन ने किया था|

इस कारण भारत के लिये यहा की सीमा क्षेत्र का प्रश्‍न अधिक संवेदनशील बना था| ईशान्य के राज्यों में भारतीय नेताओं ने भेंट करने पर भी चीन आपत्ति जता रहा था| इस परिस्थिति की गंभीरता से दखल लेकर भारत ने ईशान्य के राज्यों में खास तौर पर अरुणाचल प्रदेश और सिक्कीम में बुनियादी सुविधाओं का विकास करने के लिये कई परियोजनाएं शुरू की है| इस के लिये अंतरराष्ट्रीय वित्त संस्था से कर्जा पाने के लिये भी भारत ने पहल की थी| जापान जैसा देश भारत के लिये बडी सहायता दे रहा है| भारत की इस क्षेत्र में शुरू परियोजनाओं को लेकर चीन ने लगातार आपत्ति जताई है|

इस पृष्ठभुमि पर उच्च स्तरीय कमिटी ने २५ हजार कोटी रुपयों का निवेश कर के अरुणाचल प्रदेश और सिक्कीम में बुनियादी पायाभूत सुविधाओं का निर्माण करने का ऐलान किया है| दो महिने पहले सिक्कीम में पहले हवाई अड्डे का निर्माण किया गया| आने वाले समय में इस क्षेत्र में अन्य जरुरी परियोजना की शुरूआत होगी, यह स्पष्ट संकेत भारत की ओर से दिये जा रहे है|