अमरीका के रक्षा विभाग द्वारा यूएफओ से मिले अवशेषों का अध्ययन जारी था – संशोधक अँथनी ब्रॅगालिया

अमरीका के रक्षा विभाग द्वारा यूएफओ से मिले अवशेषों का अध्ययन जारी था – संशोधक अँथनी ब्रॅगालिया

वॉशिंग्टन – अमेरिका के रक्षा विभाग द्वारा, पहले से पृथ्वी पर आईं हुईं उड़न तश्तरियों अर्थात् यूएफओ का और उनसे मिले अवशेषों का अध्ययन जारी था, ऐसी सनसनीखेज जानकारी संशोधक अँथनी ब्रॅगालिया ने उजागर की। ब्रॅगालिया ने प्राप्त की जानकारी में, ‘मेमरी मेटल’, ‘मेटामटेरिअल्स’, ‘अदृश्यता’, ‘प्रकाश की रफ्तार कम करने की शक्ति’ और ‘इलेक्टोमॅग्नेटिक एनर्जी’ […]

Read More »

कोरोना का उद्गम छिपाने के लिए चीन की योजनाबद्ध कोशिशें – आन्तर्राष्ट्रीय न्यूज़ एजन्सी का दोषारोपण

कोरोना का उद्गम छिपाने के लिए चीन की योजनाबद्ध कोशिशें – आन्तर्राष्ट्रीय न्यूज़ एजन्सी का दोषारोपण

बीजिंग – पिछले वर्ष में दुनियाभर में हाहाकार मचानेवाले कोरोनावायरस का उद्गम दुनिया के सामने ना आ जायें इसलिए चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट हुक़ूमत योजनाबद्ध कोशिशें कर रही होने का दोषारोपण आन्तर्राष्ट्रीय न्यूज़ एजन्सी ने किया है। अमरीका में मुख्यालय होनेवाली ‘असोसिएटेड प्रेस’(एपी) इस न्यूज़ एजन्सी द्वारा कोरोनावायरस के उद्गम की खोज करने के लिए […]

Read More »

डॉ.लॉरेन्स काटूझ

डॉ.लॉरेन्स काटूझ

अधिकतर लोग अपनी नैतिक, शारीरिक एवं बौद्धिक क्षमता की मर्यादा में ही रहना पसंद करते हैं। हममें से हर किसी में महासागर के समान क्षमता है, परन्तु उसे हमने सपने में भी नहीं देखा होता है। इस क्षमता को उत्तेजन देनेवाले का जीवन ज़रूर उच्च दिशा में मार्गक्रमण करता रहता है। जिन्हें अपनी बुद्धि, स्मृति […]

Read More »

गणपतराव पाटील

गणपतराव पाटील

बढ़ता हुआ तापमान, बारिश की अनियमितता, आवागमन की समस्यायें, पथरीली ज़मीन, रेत के समान क्षारीय मिट्टी इस प्रकार की अनेक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए आधुनिक एवं प्रयोगशील पद्धति से खेती करने के लिए यदि प्रयास किया जाये तो विदेशों में होनेवाली के खेती के समान हमारे यहाँ की खेती भी विकसित हो सकती […]

Read More »

डॉ.आनंद कर्वे : भाग – १

डॉ.आनंद कर्वे : भाग – १

महर्षि धोंडो केशव कर्वे इनके नाती, इरावती कर्वे (विख्यात मराठी लेखिका), और दिनकर कर्वे (शिक्षा-विशेषज्ञ) इस दंपती के सुपुत्र इस पहचान के साथ-साथ कृषिविशेषज्ञ एवं तत्संबंधित विविध शोध जिनके नाम हैं ऐसे संशोधक अर्थात डॉ.आनंद कर्वे। जर्मनी से वनस्पतिशास्त्र में पी.एच.डी.की उपाधि प्राप्त कर अपनी मातृभूमि का सम्मान करते हुए अपने देश में लौटकर इसी […]

Read More »

अशोक बंग

अशोक बंग

पिछले कुछ वर्षों से ग्रामीण विभाग की कृषि संबंधित समस्यायें अधिक गंभीर हो चली जा रही हैं। कृषि की नवीन स्वावलंबी राह चुनना यह इसके प्रति एक अच्छा उपाय साबित हो सकता है और ऐसी खेती नैसर्गिक दृष्टिकोण से दीर्घकाल तक के लिए उपयोगी साबित होगी। पारंपरिक एवं आधुनिक बलस्थानों का उपयोग यह किसानों एवं […]

Read More »

वसंत टाकळकर

वसंत टाकळकर

‘घर में नहीं है पानी, गगरिया खाली है रे गोपाला’ (घरात नाही पानी, घागर उताणी रं गोपाला) इस मराठी लोकगीत का अर्थ कोई चाहे कैसे भी लगाये, परन्तु आज के विज्ञानयुग में विशेष तौर पर पृथ्वी पर होने वाला ‘पानी’ यह एक चुनौतीपूर्ण विषय दिखाई देता है। जलसंवर्धन, वनीकरण आदि कार्यों का बोलबाला रहता है। […]

Read More »

बद्रीनारायण बारवले

बद्रीनारायण बारवले

उचित परिवर्तन किसी भी क्षेत्र में गति एवं स्वाभाविक तौर पर स्थिरता अर्थात स्थिति प्राप्त करवाते रहता है। लकीर के फकीर बनकर कृषि-व्यवसाय के संबंध में यदि चलते रहे तो कृषि संबंधी उसका अनुमान गलत साबित होता है और कृषक वर्ग बेहाल हो जाता है। इसके लिए कृषि की ओर व्यावसायिक दृष्टिकोण अपनाने की हिम्मत […]

Read More »

चंद्रकांत पाठक

चंद्रकांत पाठक

भारत को कृषिप्रधान देश कहा जाता है। ‘उत्तम कृषि’! कृषिक्षेत्र के संदर्भ में उत्तम यह दर्जा हमारे देश के इस व्यवसाय को प्राचीनकाल से ही प्राप्त है। अत एव कृषि से संबंधित समस्या यह स्वाभाविक है कि सामाजिक प्रश्न बन जाता है। कृषि के लिए ऊर्जा अर्थात विद्युत् की समस्या सुलझाने के लिए प्रदूषण को […]

Read More »

डॉ. हिम्मतराव बावस्कर भाग – २

डॉ. हिम्मतराव बावस्कर भाग – २

‘काय मी करू, विंचू चावला …………’ (मुझे बिच्छू ने काट लिया, मैं क्या करूं) यह भारूड (महाराष्ट्र का एक लोकगीत-प्रकार) तो विख्यात है।, परन्तु यदि सच्चे बिच्छू ने दंश कर लिया तो? वह बिच्छू भी यदि बिषैला, प्राणघातक हो तो इसका उपाय क्या? वह तो होना ही चाहिए। एम.डी. (मेडिसिन) की उपाधि प्राप्त होने के […]

Read More »
1 2 3 19