अफगानिस्तान से अमरिकी सेना की वापसी के बाद भी तालिबान को जम्मू-कश्मीर में अवसर नही देंगे – नॉर्दन कमांड प्रमुख का वादा

जम्मू: अफगानिस्तान से अमरिकी सेना की वापसी हुई तो कश्मीर पहुंचने के लिए तालिबान का मार्ग खुला होगा, यह कहकर हफीज सईद ने खुशी मनाई थी| पाकिस्तान में अपनी रैली में सईद ने की इस ऐलान पर भारतीय लष्कर ने प्रतिक्रिया दर्ज की है| अफगानिस्तान से अमरिकी सेना की वापसी हुई तो भी भारतीय लष्कर किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है| जम्मू-कश्मीर में तालिबान को स्थान नही मिलेगा, ऐसा भारतीय सेना की नॉर्दन कमांड के प्रमुख लेफ्टनंट जनरल रणबीर सिंग इन्होंने कहा है|

अफगानिस्तान, अमरिकी सेना, वापसी, तालिबान, जम्मू-कश्मीर, अवसर नही, देंगे, नॉर्दन, कमांड प्रमुख, वादाअफगानिस्तान से अमरिकी सेना की वापसी पर कई लोग बहुत कुछ बोल रहे है| लेकिन, अभी तक अमरिकी सेना की वापसी का टाइम टेबल घोषित नही हुआ है| अफगानिस्तान में शुरू गतिविधियों पर भारतीय सेना एवं सुरक्षा यंत्रणा बारिकी से नजर बनाकर है| इसके बाद बनती संभावना का सामना करने के लिए जरूरी तैयारी भारतीय सेना ने पूरी की है, यह गवाही मैं देशवासियों को दे रहा हूं’, इन शब्दों में लेफ्टनंट जनरल रणबीर सिंग इन्होंने देशवासियों को आश्‍वस्त किया| अमरिका ने अफगानिस्तान से वापसी करने पर तालिबानी आतंकी जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ करेंगे और भारत को सबक सिखाएंगे, ऐसी बकवास हफीज सईद ने की थी| उसके बाद लेफ्टनंट जनरल रणबीर सिंग इनकी प्राप्त हुई प्रतिक्रिया हफीज सईद के साथ पाकिस्तान को भी कडी चेतावनी दे रही है|

सोव्हिएत रशिया ने १९८९ में अफगानिस्तान से सेना पीछे हटाई थी| उसके बाद अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा हुआ था| तालिबान पर बनाए अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों के साथ खून-खराबे का सत्र शुरू किया था| मुंबई पर हुए २६/११ के हमले का मास्टर माईंड हफीज सईद, अफगानिस्तान से अमरिकी सेना की वापसी के बाद जम्मू-कश्मीर में दुबारा वही होने के संकेत दे रहा है| लेकिन, ९० के दशकों का भारत और वर्तमान के भारत में काफी बडा बदलाव हुआ है| खास तौर पर तालिबान को भी अफगानिस्तान से बाहर जाकर आतंकी गतिविधियां करने में रुचि नही रही है| अमरिका के साथ तालिबान की शुरू चर्चा से यह बात स्पष्ट हो रही है, ऐसा कहा जा रहा है|

अफगानिस्तान का इस्तेमाल करके हम अन्य देशों पर आतंकी हमला नही करेंगे, ऐसा तालिबान ने इस चर्चा के दौरान स्वीकार किया है, ऐसे भी समाचार प्राप्त हो रहे है| इसी दौरान अफगानिस्तान में तैनात पूरी सेना की अमरिका वापसी नही कर रही है और अपनी आधे से अधिक सेना और लष्करी अड्डे अफगानिस्तान में कायम रखेगी, ऐसा अमरिका ने पहले ही स्पष्ट किया है| ऐसी स्थिति में तालिबान का इस्तेमाल करके कश्मीर समस्या पर भारत को चुनौती देने का हफीज सईद जैसे आतंकी नेता और पाकिस्तानी लष्कर का सपना वास्तव में उतरने की संभावना नही है|