अमरिका भारत पर प्रतिबंध नहीं जारी करेगा – विश्लेषकों का दावा

वॉशिंगटन: काउंटरिंग अमरिका एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शंस एक्ट (सीएएटीएसएस) ऐसे विधेयक मंजूर करके अमरिका ने रशिया से रक्षा साहित्य की खरीदारी करने वाले देशों पर प्रतिबंध जारी किए जाएंगे, ऐसा कहा था। पर रशिया से एस-४०० हवाई सुरक्षा यंत्रणा की खरीदारी करनेवाले भारत पर सीएएटीएसए के प्रतिबंध जारी करने की गलती अमरिका नहीं करेगा ऐसा विश्लेषकों का कहना है। वैसे संकेत देकर अमरिका ने सीएएटीएसए का उपयोग अपने मित्र देशों की रक्षा क्षमता कम करने के लिए नहीं करेंगे, ऐसी सूचक प्रतिक्रिया देकर अमरिका ने भारत पर प्रतिबंध जारी करने की आशंका पूर्ण विराम देने के संकेत मिल रहे है।

अमरिका, भारत, प्रतिबंध, नहीं, जारी करेगा, विश्लेषकों, दावाएक ही समय पर ३६ लक्ष्य भेदने की एवं ७२ मिसाइल दागने की क्षमता होने वाले एस-४०० हवाई सुरक्षा यंत्रणा कि भारत को अत्यंत आवश्यकता है। चीन एवं पाकिस्तान जैसे देशों का पड़ोस प्राप्त भारत के रक्षा विषयक आवश्यकता अमरिका यकीनन ध्यान मिलेगा, ऐसा दावा विश्लेषक कर रहे हैं। तथा इस हवाई सुरक्षा यंत्रणा की खरीदारी पर भारत में रशिया के साथ बहुत पहले से यह चर्चा शुरू की थी, इसकी तरफ विश्लेषक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इसीलिए रशिया के साथ इस लगभग ५.४ अरब डॉलर के रक्षा विषयक करार पर अमरिका आक्षेप लेकर भारत पर प्रतिबंध नहीं जारी करेगा, ऐसा विश्वास अमरिका में स्थित विश्लेषकों ने व्यक्त किया है।

व्हाइट हाउस के नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रवक्ता ने विश्लेषकों के इन दावों को समर्थन देनेवाली प्रतिक्रिया दी है। सीएएटीएसए का उद्देश्य अमरिका के सहयोगी देशों की लष्करी क्षमता कम करना यह नहीं है, ऐसा उस प्रवक्ता ने कहा है। जिसकी वजह से भारत पर अमरिका के प्रतिबंधों की आशंका कम होती दिखाई दे रही है। फिर भी अमरिका ने भारत पर प्रतिबंध जारी करने का निर्णय लिया, तो उसका अर्थ भारत की रक्षा विषयक बाजार रशिया के हाथ सौंपना, ऐसा होगा। अमरिका यह गलती नहीं करेगा ऐसा युएस इंडिया बिजनेस काउंसिल के बेंजामिन श्वार्ट्झ ने कहा है।

रशिया यह भारत का पारंपारिक मित्र देश होकर आज तक भारत को रशिया से शस्त्रास्त्र एवं रक्षा साहित्य प्रदान होता है। आज भी भारत ६० प्रतिशत इतने बड़े तादाद में रक्षा साहित्य के छूटे भागों के लिए रशिया पर निर्भर है। पर पिछले कई वर्षों में भारत ने रशियन शस्त्रास्त्र एवं रक्षा साहित्य पर आलंबन बड़ी तादाद में कम किया है। भारत के इस धारणा का लाभ अमरिका को मिल रहा है और शून्य पर होने वाले भारत और अमरिका के रक्षा विशेष सहयोग अब १८ अरब डॉलर्स तक पहुंचे हैं। जिसकी वजह से भारत को दुखाकर फिर रशियन शाश्त्रस्त्र एवं रक्षा विषयक साहित्य की खरीदारी करने पर अमरिका भारत को विवश नहीं करेगा, ऐसा दावा सामरिक विश्लेषकों से किया जा रहा है।

दौरान रशिया से भारत खरीदारी कर रहे शस्त्रास्त्र से अधिक अमरिका को भारत ईरान से खरीदारी कर रहे ईंधन के बारे में अधिक चिंता लगती दिखाई दे रही है। नवंबर महीने तक सभी देशों ने ईरान के साथ किए जाने वाले ईंधन की खरीदारी शून्य पर लानी होगी, ऐसी चेतावनी अमरिका ने दी है। तथा ऐसा नहीं होने पर अमरिका के प्रतिबंधों का झटका ईरान के ग्राहकों को लगेगा, ऐसा अमरिका ने सूचित किया है।