अमरिका को ‘सोव्हिएत रशिया’ के जैसे ही पराभव स्वीकारना होगा – तालिबान का इशारा

काबुल/वॉशिंगटन – अफगाणिस्तान में रशिया की हुई हार से अमरिका सही सबक प्राप्त करे| अफगान जनता का निर्धार और क्षमता की जांच करने का कोई विचार शेष है तो उसे छोडना ही अमरिका के हित में होगा, इन शब्दों में तालिबान ने अमरिका को अफगानिस्तान से बाहर होने का इशारा दिया है| पिछले हफ्तें में ही अमरिका के विशेष दूत झल्मे खलिलजाद इन्होंने तालिबान के प्रतिनिधियों से चर्चा की थी| उसके बाद अफगानिस्तान में तैनात अमरिकी सेना कुछ तादाद में वापस लेने का विचार डोनाल्ड ट्रम्प कर रहे है, यह वृत्त सामने आया था|

अफगानी हुकूमत का समर्थन करने के लिए १९७० की दशक में रशियन संघराज्य ने बडी तादाद में अपनी सेना अफगानिस्तान में उतारी थी| लेकिन, अमरिका और पाकिस्तान की सहायता से गठित अफगान बागियों की गुटों ने १९७९ में रशियन सेना को वापसी करने पर मजबूर किया था| इसे अब ३९ वर्ष हो रहे है और इस पृष्ठभुमि पर तालिबान ने अमरिका को चेतावनी दी है| तालिबान का प्रवक्ता झबिउल्लाह मुजाहिद ने प्रसिद्ध किए निवेदन में अमरिका को चेतावनी देने के साथ ही, इसके आगे अमरिका के साथ राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों के आधार पर ही संबंध रहेंगे, यह दर्ज किया है|

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ट्रम्प ने सत्ता स्वीकारने के बाद अफगानिस्तान में तालिबान के विरोध में शुरू कार्रवाई और भी तीव्र की गई थी| इसे अच्छी सफलता मिली है फिर भी दुसरी ओर अफगानी यंत्रणा पर हो रहे तालिबान के हमलों की तादाद में भी बढोतरी हुई है| तालिबान ने कब्जा किए क्षेत्र में भी बढोतरी होने के दावे सामने आ रहे है| इस पृष्ठभुमि पर अमरिकी सेना के एक गुट अफगानिस्तान में हुई तैनाती कुछ मात्रा में कम हो, यह भूमिका रख रहा है|

उसी समय अफगानिस्तान में तैनात नाटो से सेना में कटौती ना हो, इस लिए अमरिका ने दबाव बनाया था| नाटो की बैठक में भी अफगानिस्तान की सेना तैनाती के संबंधी सही निर्णय नही हुआ तो सैनिकों पर हो रहे तालिबान के हमलों की तीव्रता बढ सकती है, यह चेतावनी अमरिका के वरिष्ठ लष्करी अधिकारी ने दी थी| इस इशारे की पृष्ठभुमि पर नाटो ने अफगान मुहिम जारी रहेगी, यह स्पष्ट किया था|

अफगानिस्तान में लंबे समय तक सुरक्षा और स्थिरता की गारंटी नही होती, तब तक अफगानिस्तान से नाटो वापसी नही करेगा यह नाटो के प्रमुख जेन्स स्टोल्टनबर्ग इन्होंने घोषित किया था| वही, अफगानिस्तान से अमरिकी सेना की वापसी हुई तो आतंकी संगठन फिर से प्रबल होगी और इस से फिर से ‘९/११’ होने का खतरा है, यह गंभीर इशारा रक्षा दल प्रमुख जनरल जोसेफ डनफोर्ड इन्होंने दिया था|