आतंकवाद यानी युद्ध की ही आघाडी – भारतीय सेना प्रमुख जनरल रावत

नई दिल्ली – जो देश खुद कमजोर है, वह आतंकवाद का इस्तेमाल करके अन्य देशों को अस्थिर करना चाह रहे है| इस वजह से आतंकवाद यह युद्ध की ही आघाडी बनी है| जबतक आतंकवाद के पीछे कोई देश खडा है, तबतक आतंकवाद खतम होना मुमकिन नही, ऐसे कडे शब्दों में भारतीय सेना प्रमुख ने सीधे नाम लिए बिना पाकिस्तान को लक्ष्य किया| उसी समय उन्होंने तालिबान जैसी आतंकी संगठन के साथ बातचीत करने के लिए अमरिका और रशिया पहल कर रहे है, ऐसे में यह बातचीत बिनशर्त हो, यह उम्मीद भारतीय सेना प्रमुख ने जताई|

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नई दिल्ली में शुरू ‘रायसेना डायलॉग’ के बीच सेना प्रमुख जनरल बिपीन रावत बोल रहे थे| आतंकवाद का मुद्दा उपस्थित करके सेना प्रमुख ने इस दौरान आतंकवाद के पीछे खडे पाकिस्तान को लक्ष्य किया| सीधे नाम लेने से बचकर जनरल रावत इन्होंने कमोजर देश आतंकवाद का इस्तेमाल हथियारों के जैसा कर रहे है, ऐसी फटकार लगाई| साथ ही आतंकवाद यानी युद्ध की आघाडी ही है, यह कहकर उसकी तीव्रता की ओर जनरल रावत इन्होंने इस परीषद में सबका ध्यान आकर्षित किया| जम्मू-कश्मीर के साथ भारत में चरमपंथीयों को उकसाया जा रहा है और इसके पीछे दुष्ट हेतू से किया जा रहा प्रचार है, यह दावा जनरल रावत इन्होंने किया|

आतंकवाद के पीछे चरमपंथी है और इस चरमपंथीयों के पीछे अपप्रचार है, यह ध्यान में लेकर इसके विरोध में कार्रवाई करने की जरूरत जनरल रावत ने स्पष्ट की| इसके लिए अधिक से अधिक मात्रा में शिक्षा का प्रसार करना, खास तौर पर युवा वर्ग को शिक्षित करना अधिक अहम होगा, यह जनरल रावत इन्होंने कहा है|

लेकिन, इतना करके भी आतंकवाद से छुटकारा पाना मुमकिन नही होगा| इसका प्रमुख कारण यानी, कोई भी देश जबतक आतंकवाद के पीछे खडा है तबतक आतंकवाद खतम होना मुमकिन नही, यह जनरल रावत इन्होंने डटकर कहा| पाकिस्तान आतंकवाद का पुरस्कार कर रहा है और इस देश ने अबतक अपनी आतंकी गतिविधियों रोकी नही है, यह भारत का आरोप है| जबतक पाकिस्तान आतंक का मार्ग छोडता नही, तबतक इस देश के साथ बातचीत संभव नही है, यह भारत सरकार की भूमिका है| भारत के सेना प्रमुख ने भी समय समय पर पाकिस्तान की आतंकी गतिविधियों की पोल खोल की थी| रायसेना डायलॉ में सीधे पाकिस्तान का जिक्र ना करने की शिष्टता का पालन करके सेना प्रमुख ने आतंकवाद की समस्या का मूल पाकिस्तान के भारत विरोधी विद्वेश में है, इस बात की ओर ध्यान आकर्षित किया|

इस दौरान, अफगानिस्तान में तालिबान की आतंकी गतिविधियों में बडी मात्रा में बढोतरी हो रही है, तभी अमरिका और रशिया तालिबान के साथ बातचीत करके अफगान समस्या का हल निकालने की कोशिश कर रही है| तालिबान के साथ बातचीत करने में कोई दिक्कत नही| अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता स्थापित हुई तो उसका लाभ अफगानिस्तान के साथ भारत और पाकिस्तान के साथ पूरे क्षेत्र को भी होगा| लेकिन, तालिबान बातचीत करने के लिए रख रही शर्ते स्वीकारना मुमकिन नही है, यह जनरल रावत इन्होंने कहा है| तालिबान के साथ यह बातचीत बिनशर्त होनी चाहिए, यह उम्मीद जनरल रावत इन्होंने व्यक्त की|

साथ ही तालिबान के पीछे भी पाकिस्तान ही खडा है और आजतक पाकिस्तान ने तालिबान का पूरी तरह इस्तेमाल किया है, यह भी जनरल रावत इन्होंने याद दिलाया|