तेजस ‘लेजर डेजिग्नेटर पॉड’ से सज्जित होगा

मॉस्को: भार में कम, किसी भी माहौल एवं परिस्थिति में लडने की क्षमता और सबसे प्रगत मिसाइल से सज्जित स्वदेशी निर्माण के सुपरसोनिक ‘तेजस’ लडाकू विमान जल्द ही अति प्रगत लडाकू विमानों की सुचि में स्थान प्राप्त करेगा| शत्रू के ठिकानों पर सटिक हमला करने के लिए जल्द ही ‘तेजस’ विमान ‘लेजर डेझिग्नेटर पॉड’ से सज्जित होंगे| इस वजह से रात के अंधेरे में भी शत्रू के ठिकानों को सटिक लक्ष्य करने की तेजस की क्षमता बढेगी, यह दावा रशिया की शीर्ष वेबसाईट ने किया है|

तेजस, लेजर डेजिग्नेटर पॉड, सज्जित, होगा, मॉस्को, डीआरडीओदेश की सुरक्षा के सामने खडी चुनौतीयों की पृष्ठभुमि पर भारत ने अपने रक्षा बलों का आधुनिकीकरण शुरू किया है| साथ ही भारत ने रक्षा साहित्य का निर्माण करने के लिए भी कदम उठाए है और इसके लिए ‘मेक इन इंडिया’ का उपक्रम हाथ लिया गया है| भारतीय निर्माण का ‘तेजस’ विमान वायु सेना में शामिल किया गया है और इस विमान की क्षमता अधिक से अधिक बढाने के लिए विशेष कोशिश की जा रही है| इसके लिए ‘डीआरडीओ’ विशेष कोशिश कर रही है| ‘डीआरडीओ’ ने अबतक की सबसे प्रगत तकनीक का निर्माण किया है, यह दावा एक अधिकारी ने किया है, यह जानकारी रशियन वेबसाईट ने दी| यह अधिकारी इस उपक्रम का हिस्सा होने की जानकारी रशियन वेबसाईट ने दी है|

जल्द ही तेजस लडाकू विमान ‘लेजर डेझिग्नेटर पॉडस्’ (एलडीपी) ने सज्जित होंगे| ‘एलडीपी’ तकनीक की वजह से किसी भी लक्ष्य को सटिकता से नष्ट करना सहजता से मुमकिन हो सकता है| खराब वातावरण या रात के अंधेरे में भी सटिकता से लक्ष्य को नष्ट करने की क्षमता ‘तेजस’ को प्राप्त होगी| इस तकनीक का परीक्षण भी किया गया है, ऐसी जानकारी इस वेबसाईट ने दी है| भारतीय वायु सेना के लिए फ्रान्स से खरीदे जा रहे ‘रफाएल’ लडाकू विमानों में भी इसी तकनीका का इस्तेमाल किया गया है| लेकिन, वह तकनीक फ्रान्स की कंपनी ने विकसित की है| अमरिकी ‘लॉकहीड मार्टिन’ इस लडाकू विमानों का निर्माण कर रही कंपनी के पास भी यह तकनीक है| इस तकनीक का प्रदर्शन करने के बाद वर्ष २०२१ में इस तकनीक का इस्तेमाल अमरिकी लडाकू विमानों पर किया जाएगा| लेकिन भारत ने इस तकनीक के निर्माण में बढत प्राप्त की है और ‘डीआरडीओ’ ने यह तकनकी कम लागत में विकसित की है, यह दावा भी हो रहा है|