जम्मू भाग-५

जम्मू भाग-५

‘मन्दिरों का शहर’ इस नाम से जाने जानेवाले जम्मू शहर से हमारा परिचय तो हो ही चुका है। तो चलिए, फिर आज भी क्या इस शहर की यह पहचान क़ायम है या नहीं यह देखते हैं। पहले मुख्य जम्मू शहर की सैर पर निकलते हैं और उसके बाद आसपास के इला़के को भी देखते हैं। […]

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परमहंस-१३८

परमहंस-१३८

काशीपुरस्थित घर में स्थलांतरित होने के बाद भी रामकृष्णजी की बीमारी बढ़ती ही चली गयी। अब उनका शरीर यानी महज़ अस्थिपंजर शेष बचा था। लेकिन उनकी मानसिक स्थिति तो अधिक से अधिक आनंदित होती चली जा रही थी, मानो जैसे बुझने से पहले दीये की ज्योति बड़ी हो जाती है, वैसा ही कुछ हुआ था। […]

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जम्मू भाग-४

जम्मू भाग-४

अब थोड़ासा विश्राम करने के बाद तरोताज़ा होकर चलिए जम्मू की सैर करने निकलते हैं। जम्मू के सबसे पुराने क़िले को तो हम देख ही चुके हैं। आइए अब देखते हैं एक राजमहल को, जो तावी नदी के तट पर बसा है। चलिए, तो बढते हैं तावी नदी के तट की ओर। ‘अमर महल पॅलेस’ […]

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परमहंस-१३७

परमहंस-१३७

इस नये काशीपूरस्थित विशाल फार्महाऊस में अब रामकृष्णजी और उनके शिष्यगण धीरे धीरे नये माहौल से परिचित हो रहे थे। यहाँ पहली मंज़िल पर होनेवाले बड़े हॉल में रामकृष्णजी के निवास का प्रबंध किया गया था और वे वहीं पर, आये हुए भक्तों से मिलते थे। उससे सटे एक छोटे कमरे में, उस उस दिन […]

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जम्मू भाग-३

जम्मू भाग-३

तावी नदी का साथ जिसे मिला है ऐसे इस जम्मू शहर ने आज तक के अपने सफ़र में कई घटनाएँ देखी हैं। जिनके नाम से इस शहर को ‘जम्मू’ यह नाम मिला, उन राजा ‘जम्बुलोचन’ के ‘बाहुलोचन’ नाम के भाई ने जब इस ज़मीन पर ‘बाहु’ नामक क़िले का निर्माण करने नींव का पत्थर रखा […]

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जम्मू भाग-२

जम्मू भाग-२

सिंह और बकरी जहाँ एकसाथ पानी पी रहे थे, उस जगह ‘जम्मू’ नाम की नगरी की स्थापना की गयी। स्थापना के बाद धीरे धीरे यह नगरी विकसित होने लगी। इस शहर के विकास में उस समय के निवासी और शासक दोनों का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। महाभारत काल में भी इस नगरी का उल्लेख मिलता […]

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जम्मू भाग-१

जम्मू भाग-१

श्रावण महिने में संपूर्ण सृष्टि में एक नवचेतना ही आ जाती है। समूची सृष्टि हरे रंग का लिबास पहनकर सज जाती है। श्रावण मास में भारतभर में विभिन्न प्रकार के व्रत किये जाते हैं, कन्याकुमारी से लेकर हिमालय तक। भारतीयों की दृष्टि से हिमालय हमेशा ही पवित्र एवं पूजनीय रहा है। पवित्रता का स्रोत रहनेवाले […]

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मंगळूर भाग-७

मंगळूर भाग-७

‘यक्षगान’ के दर्शक की भूमिका में बैठे हुए हम ‘यक्षगान’ के अब तक के सफ़र में बिलकुल मग्न से हो गये। है ना! चलिए, तो फिर दर्शक की भूमिका में ही रहकर ‘यक्षगान’ का अगला सफ़र करते हैं। समय के विभिन्न पड़ावों पर इस मानवीय सृष्टि में तरह तरह के परिवर्तन होते रहते हैं और […]

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मंगळूर भाग-६

मंगळूर भाग-६

मंगळूर शहर की संस्कृति के एक अनोखे पहलू को आज हम देखने जा रहे हैं। लेकिन, दूर से कुछ आवाज़ें सुनायी दे रही हैं। चलिए, तो पहले उनके बारे में जानने के लिए उस ओर रुख करते हैं। अरे यहाँ पर तो किसी नाटक के प्रस्तुतीकरण की तैयारियाँ चल रही हैं। हम भी यहाँ के […]

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मंगळूर भाग-५

मंगळूर भाग-५

क्षितिज तक फैला हुआ गहरा नीला जल, दिनभर धूप में चमचमानेवाला, वहीं रात को चाँद-सितारों के साथ बड़े आराम से गपशप करनेवाला जल। मंगळूर के समुद्री तट पर खड़े रहने पर आप यक़ीनन ही यह नज़ारा देख सकते हैं। दूर दूर तक फैली हुई मुलायम रेत का किनारा मंगळूर और उसके आसपास के इला़के में […]

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