नेताजी-१९४

नेताजी-१९४

जापानी प्रधानमन्त्री हिडेकी टोजो की अपॉइन्टमेन्ट मिलने तक हाथ पर हाथ धरे न बैठे रहते हुए सुभाषबाबू ने जापान सरकार के विदेशमन्त्री मामोरू शिगेमित्सु, सेनाप्रमुख जनरल सुगियामा जैसे अतिमहत्त्वपूर्ण अ़फ़सरों के साथ प्राथमिक स्तर की बातचीत शुरू कर दी। इस बातचीत में राशबाबू से मिल हुए परामर्श उनके लिए का़फ़ी फ़ायदेमन्द साबित हुए। सुभाषबाबू कितने […]

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नेताजी-१९३

नेताजी-१९३

८ फ़रवरी १९४३ को कील बन्दरगाह से जर्मन पनडुबी द्वारा शुरू हुआ सुभाषबाबू का जलप्रवास, २३ अप्रैल को मादागास्कर के नजिक जर्मन पनडुबी में से जापानी पनडुबी में स्थानांतरित होने के बाद कुछ ही दिनों में, यानी ६ मई १९४३ को साबांग बन्दरगाह पर समाप्त हो गया। साबांग बन्दरगाह पर, बर्लिन स्थित जापानी सेना के […]

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नेताजी-१९२

नेताजी-१९२

जर्मन पनडुबी से स्थानान्तरित हुए सुभाषबाबू को लेकर जापानी पनडुबी की वापसी यात्रा शुरू हो गयी। वह दिन था, २८ अप्रैल १९४३। जर्मन पनडुबी की अपेक्षा यह पनडुबी थोड़ीबहुत ठीक थी, इसमें एकदम हाथ-पैर सिकुड़कर बैठने की नौबत नहीं थी। पनडुबी में पहुँचते ही कप्तान जुईची इझु और जापानी नौसेना के सबमरिन फ्लोटिला कमांडर मेसाओ […]

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नेताजी- १९१

नेताजी- १९१

सुभाषबाबू को जर्मन पनडुबी में से जापानी पनडुबी में स्थानान्तरित करने में, ख़राब हवा के चलते ख़ौल उठा समुद्र यह मार्ग का रोड़ा बन रहा था। बड़ी बड़ी लहरों के कारण पनडुबियाँ भी लगातार डोल रही थीं और इस कारण कहीं वे एक-दूसरे से टकरा न जायें इस डर से उन्हें एक-दूसरे के और क़रीब […]

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नेताजी-१९०

नेताजी-१९०

२३ अप्रैल को मादागास्कर के पास पहुँच चुकी सुभाषबाबू की पनडुबी ख़राब मौसम के कारण ख़ौलते हुए सागर का सामना करते करते २६ अप्रैल की शाम को, मादागास्कर की नैऋत्य दिशा में लगभग ४०० मील की दूरी पर नियोजित जगह पहुँच गयी। थोड़ी ही देर में, उनकी प्रतीक्षा कर रही जापानी पनडुबी भी पेरिस्कोप में […]

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नेताजी-१८८

नेताजी-१८८

आदिमाता चण्डिका का स्मरण करते हुए सुभाषबाबू ने अबिद के साथ कील बंदर पर स्थित पनडुबी में कदम रखा। वेर्नर म्युसेनबर्ग इस, पनडुबी के ज़िन्दादिल कॅप्टन ने उनका स्वागत किया। बाहर से चमकीली लम्बी सी मछली की तरह दिखायी दे रही पनडुबी में प्रवेश करते ही जो नज़ारा दिखायी दिया, उससे अबिद के उत्साह पर […]

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नेताजी-१८७

नेताजी-१८७

एमिली से भावपूर्ण विदा लेकर दिल पर पत्थर रखते हुए सुभाषबाबू ने घर के बाहर कदम रखा। बर्लिन से सुभाषबाबू को लेकर कील बंदरगाह की ओर जानेवाली रेलगाड़ी एक रात पहले ही कील पहुँच चुकी थी। उनके साथ केपलर, वेर्थ ये जर्मन दोस्त तथा नंबियारजी भी थे। अबिद को अलग से ही ठेंठ कील बंदरगाह […]

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नेताजी-१८६

नेताजी-१८६

८ फरवरी १९४३ यह सुभाषबाबू का पूर्व की ओर प्रस्थान करने का दिन जैसे जैसे क़रीब आने लगा, वैसे वैसे उनकी तैयारियाँ भी ज़ोर-शोर से शुरू हो गयीं। इसी दौरान २३ जनवरी को उनका जन्मदिन उनके दोस्तों ने उन्हीं के बंगले में सादगी से मनाया। पिछला जन्मदिन उन्होंने अ़ङ्गगानिस्तान में खच्चर और ट्रक की सवारी […]

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नेताजी-१८५

नेताजी-१८५

एमिली और अनिता के साथ सन १९४२ का ख्रिसमस व्यतीत करके सुभाषबाबू व्हिएन्ना से बर्लिन लौट आये। नन्हीं सी अनिता के साथ गुज़ारे हुए वे दिन तो सुभाषबाबू के छोटे से गृहस्थाश्रमी जीवन के सर्वोच्च आनन्द का एक हिस्सा थे। उसकी बाललीलाओं को निहारने में उनका वक़्त कैसे बीत जाता था, इसका उन्हें पता ही […]

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नेताजी- १८४

नेताजी- १८४

जापान ले जानेवाली पनडुबी का इन्तज़ार करते समय सुभाषबाबू हाथ पर हाथ धरे बैठे नहीं थे। अन्य मार्गों के बारे में जानकारी प्राप्त करने की उनकी कोशिशें जारी ही थीं। साथ ही, अनिश्चितता के ढलते हुए उस समय के साथ उनके मन में एमिली के बारे में फ़िक्र भी बढ़ ही रही थी। उसके प्रसूत […]

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