२७. महिला जज्ज – डेबोरा

ज्यूधर्मियों के इतिहास से यह स्पष्ट रूप में ज्ञात होता है कि जब तक ज्यूधर्मीय अपने ईश्‍वर का सम्मान कर रहे थे, ईश्‍वर द्वारा बताये गये तत्त्वों का अचूकतापूर्वक पालन कर रहे थे, तब तक वे अजेय थे। उनके शत्रु के खिलाफ़ लड़ते समय जहाँ जहाँ उनकी ताकत कम पड़ गयी, वहाँ वहाँ ईश्‍वर ने अपनी ताकत की आपूर्ति कर उन्हें शत्रु के खिलाफ़ विजयी किया था। जोशुआ का कार्यकाल यह इसका स्पष्ट उदाहरण है। लेकिन जब जब ज्यूधर्मियों ने, ईश्‍वर ने उनके लिए निर्धारित की हुई उनके धर्म की चौख़ट तोड़ दी, धर्मतत्त्वों से मुँह मोड़ दिया, तब तब उन्हें भयानक संकटों का सामना करना पड़ा।

ज्यूधर्मियों के तीसरे जज्ज शामगर ने अकेले ही, बैलों को हाँकने अँकुश से ६०० फिलिस्तिनी आक्रमकों कोे मार डाला और फिलिस्तिनियों को परास्त कर उनके चंगुल से ज्यूधर्मियों को मुक्त किया।

ऐसी ही, ज्यूधर्मियों के दूसरे जज्ज एहुद के कार्यकाल के अन्त में पुनः उनकी गाड़ी मार्ग से भटकने की शुरुआत हुई। इस समय दक्षिण की ओर से फिलिस्तिनी लोगों ने कॅनान प्रान्त पर आक्रमण कर वहाँ के ज्यूधर्मियों को अपना ग़ुलाम बनाया। एहुद अब बूढ़ा हो चुका था। तब शामगर नामक एक पराक्रमी ज्यूधर्मीय उनकी रक्षा के लिए आगे आया। यह था तीसरा ‘जज्ज’!

शामगर ने अकेले ही, बैलों को हाँकने अँकुश से ६०० फिलिस्तिनी आक्रमकों को मार डाला और फिलिस्तिनियों को परास्त कर उनके चंगुल से ज्यूधर्मियों को मुक्त किया, इतना ही उसका उल्लेख पाया जाता है। शामगर का कार्यकाल एहुद के कार्यकाल के दौरान ही हुआ।

एहुद की मृत्यु के बाद पुनः ज्यूधर्मीय पुरानी ही ग़लतियाँ करने लगे। अंजाम वही हुआ, जो होना था। इस समय कॅनान प्रांत के ही हॅझर प्रदेश के ज़ुल्मी राजा जाबिन ने उनपर धावा बोल दिया। जाबिन की सारी दारोमदार उसके ‘सिसेरा’ नामक सेनापति पर थी। यह सिसेरा बहुत ही पराक्रमी एवं साहसी होकर उसने अपनी सेना मज़बूत लोहे के रथों से और शस्त्रास्त्रों से लैस की थी। उसके सामने टिक सकें ऐसा योद्धा ही उस समय उस प्रदेश में नहीं था। लेकिन यह सिसेरा उतना ही क्रूरकर्मा एवं हिंसक वृत्ति का था।

जाबिन ने सिसेरा की सहायता से अगले २० साल ज्यूधर्मियों पर अपना ख़ौंफ़ जमाकर उनपर अनन्वित अत्याचार किये। इतने कि कई ज्यूधर्मीय उस ख़ौफ़ के कारण अपने घरों एवं गाँवों का त्याग कर जंगलों में, पर्वत की गुफाओं में बसने गये थे। ज्यूधर्मियों ने तिलमिलाकर लगायीं गुहारें ईश्‍वर तक पहुँच ही रहीं थीं।

डेबोरा हररोज़ एक पाम के पेड़ के तले बैठकर ज्यूधर्मियों के झगड़े, ईश्‍वर उसे जैसे संकेत देते थे उसके अनुसार सुलझाती थी।

इस समय ज्यूधर्मियों की सहायता के लिए ईश्‍वर ने जिस ‘जज्ज’ का प्रबन्ध किया, वह पुरुष न होकर एक स्त्री थी। उसका नाम ‘डेबोरा’ था! रॅमाह और बेथेल के दरमियान एफ्रैम पर्वत पर वास्तव्य होनेवाली डेबोरा नॅफ्ताली ज्ञाति की होकर, ईश्‍वर के साथ संपूर्ण रूप से एकनिष्ठ थी और जहाँ अधिक से अधिक ज्यूधर्मीय कॅनानप्रांतीय विभिन्नदैवतपूजनों में मशगूल हो रहे थे, वहाँ डेबोरा टोराह और अन्य धर्मतत्त्वों का मनःपूर्वक पालन करती थी। वह उस ज़माने में ही बतौर ‘प्रेषिता’ मान्यताप्राप्त थी।

हररोज़ एक पाम के पेड़ के तले बैठकर वह ज्यूधर्मियों के झगड़े, ईश्‍वर उसे जैसे संकेत देते थे उसके अनुसार सुलझाती थी और उसके प्रति मन में सम्मान की भावना होने के कारण ज्यूधर्मीय भी उसका निर्णय सिरआँखों पर करते थे।

जाबिन राजा की ज़ुलमी सत्ता में ज्यूधर्मियों को होनेवाली पीड़ा डेबोरा देख ही रही थी। लेकिन इसमें ग़लती – अपना धर्म तथा धर्मतत्त्वों का पालन न करनेवाले, अपने ईश्‍वर को छोड़कर अन्यत्र भागदौड़ करनेवाले ज्यूधर्मियों की ही है, यह बात वह जानती थी।

डेबोरा ने बराक को ज्यूधर्मियों में से नॅफ्थाली एवं झेबुलुन ज्ञातियों के दस हज़ार ज्यूधर्मीय सैनिकों की सेना बनाने की आज्ञा की।

जब उसे ईश्‍वर से आज्ञा हुई, तब उसने अपने कार्य की शुरुआत की। ईश्‍वर के कहने पर उसने उसकी नॅफ्थाली ज्ञाति में से ही एक ‘बराक’ नामक पराक्रमी ज्यूधर्मीय को बुलावा भेजा (‘अ‍ॅबिनोआम का पुत्र बराक’ इतना ही इसका उल्लेख पाया जाता है) और इस्रायली लोगों को जाबिन के ज़ुल्म से मुक्त करने के लिए ईश्‍वर ने उसका चयन किया है, ऐसा उसे बताया। उसी के साथ, उसे ज्यूधर्मियों में से नॅफ्थाली एवं झेबुलुन ज्ञातियों के दस हज़ार ज्यूधर्मीय सैनिकों की सेना बनाकर टाबोर पर्वत की ओर कूच करने की आज्ञा की। ईश्‍वर इस लड़ाई में ज्यूधर्मियों का खयाल रखनेवाला है, ऐसा उसने बराक से कहा। लेकिन डेबोरा की उच्च आध्यात्मिक योग्यता जाननेवाले बराक ने शर्त रखी कि ‘यदि डेबोरा उसके साथ आयी, तो ही वह इस कार्य को करेगा’। डेबोरा इस बात के लिए राज़ी हो गयी।

लेकिन इसी दौरान, सिसेरा को इसकी भनक लगते ही, अपने मज़बूत लोहे के रथ सुसज्जित कर वह ज्यूधर्मियों पर आक्रमण करने की तैयारी करने लगा। यह टाबोर पर्वत रणनीति की दृष्टि से बहुत ही अहम था और वह जिसके कब्ज़े में होगा, उसका पलड़ा उस प्रदेश के युद्ध में भारी साबित होनेवाला था। इसी कारण डेबोरा ने बराक को टाबोर पर्वत पर सर्वप्रथम कब्ज़ा करने के लिए कहा था। इसी वजह से, ज्यूधर्मियों को टाबोर पर्वत पर कब्ज़ा करने से रोकने के लिए सिसेरा ने उनपर आक्रमण किया।

दोनों सेनाएँ एक-दूसरी से भिड़ गयीं और दोनों में घमासान युद्ध शुरू हुआ। शुरू शुरू में कॅनानप्रांतियों का पलड़ा भारी हो रहा था। लेकिन ईश्‍वर ने मूसलाधार बरसात गिराकर उस समतल प्रदेश की किशॉन नदी में बाढ़ लायी। उस कारण निर्माण हुए कीचड़ में सिसेरा के रथ धस गये और वे आगे जा ही नहीं पा रहे थे, ऐसा वर्णन इस कथा में आता है। सिसेरा की सारी की सारी सेना मारी गयी और उनके सारे रथ भी ध्वस्त हो गये। सिसेरा अकेला जान बचाकर पैदल ही भाग निकला।

जाएल ने सीधे जाकर, तंबू को ज़मीन पर खड़ा करने के लिए ज़मीन में ठोका जानेवाला एक बड़ा क़ीला लिया और उसे एक हाथोड़ी की सहायता से, पूरी ताकत लगाकर सिसेरा के सिर में भोक दिया।

सिसेरा की सारी सेना मारी तो गयी, लेकिन सिसेरा अकेला यद्यपि जीवित रहा, तो भी आगे चलकर वह उतना ही ख़तरनाक साबित होनेवाला है, यह डेबोरा और बराक जानते थे। इसलिए उन्होंने अपने चुनीन्दा सैनिकों को सिसेरा के सुराग पर भेज दिया। सिसेरा जान बचाकर जो भागा, वह ठेंठ उसके ‘हेबर’ नामक एक परिचित के घर पहुँचा और उसने छिपने के लिए जगह माँगी। उस परिचित की पत्नी ‘जाएल’ यह ज्यूधर्मियों को अनुकूल थी। उसे सिसेरा से ज्यूधर्मियों को होनेवाला ख़तरा भी मालूम था और क्रूरकर्मा सिसेरा के बारे में उसके मन में अत्यधिक नफ़रत भी थी। लेकिन वैसा कुछ भी न दर्शाते हुए उल्टा उसने सिसेरा की अच्छीख़ासी मेहमाननवाज़ी की और घर के ही एक कमरे में छिपने के लिए उसे जगह दी। थोड़ी ही देर में बहुत थका हुआ सिसेरा निद्राधीन हो गया। तब जाएल ने सीधे जाकर, तंबू को ज़मीन पर खड़ा करने के लिए ज़मीन में ठोका जानेवाला एक बड़ा क़ीला लिया और उसे एक हाथोड़ी की सहायता से, पूरी ताकत लगाकर सिसेरा के सिर में भोक दिया। सिसेरा वहीं पर गतप्राण हुआ। फिर जाएल ने न्योता भेजकर बराक को बुला लिया और सिसेरा का मृतदेह उसके हवाले कर दिया।

इस प्रकार ईश्‍वर ने ‘डेबोरा’ इस चौथी जज्ज के माध्यम से, बराक की सहायता से ज्यूधर्मियों को पुनः एक बार एक बड़ी आपत्ति से बाहर निकाला था। इसी डेबोरा ने इस विजय के उपलक्ष्य में ईश्‍वर की प्रशंसा करनेवाला एक गीत रचा, जो कि बायबल में ‘साँग ऑफ डेबोरा’ के नाम से मशहूर है।

डेबोरा ने अगले ४० साल ज्यूधर्मियों का नेतृत्व किया। उसके कार्यकाल में ज्यूधर्मिय वास्तविक शान्ति का अनुभव कर रहे थे।(क्रमश:)

– शुलमिथ पेणकर-निगरेकर