रशियन राष्ट्राध्यक्ष भारत में दाखिल

नई दिल्ली – गुरुवार शाम रशिया के राष्ट्राध्यक्ष व्लादिमीर पुतिन इनका भारत के विदेशमंत्री सुषमा स्वराज ने नई दिल्ली के हवाई अड्डे पर स्वागत किया है। राष्ट्राध्यक्ष पुतिन के इस दौरे में भारत एवं रशिया में एस-४०० हवाई सुरक्षा यंत्रणा की खरीदारी के करार के साथ अन्य कई महत्वपूर्ण करार अपेक्षित है। अमरिका एवं चीन जैसे देश भारत एवं रशिया की इस सहयोग की तरफ अत्यंत बारीकी से देखने का दावा माध्यम कर रहे हैं।

भारत और रशिया में प्रतिवर्ष होनेवाले द्विपक्षीय चर्चा के लिए राष्ट्राध्यक्ष पुतिन नई दिल्ली में दाखिल हुए हैं। उसके बाद राष्ट्राध्यक्ष पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भेंट की है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शुरू गतिमान घटनाचक्र के पृष्ठभूमि पर रशियन राष्ट्राध्यक्ष के इस भारत दौरे की तरफ दुनिया भर के विश्लेषकों का ध्यान लगा हुआ है। भारत के साथ रशिया के संबंधों का अमरिका एवं भारत के संबंधों पर परिणाम होगा ऐसे संकेत मिल रहे हैं।

अमरिका एवं रशिया में तनाव निर्माण हुआ है और अमरिका रशिया पर कड़े प्रतिबंध जारी कर रहा है। सीरिया जैसे देश में भी अमरिका और रशिया के हितसंबंधों की टक्कर हो रही है। जहां दोनों देशों के लष्कर में सीधा संघर्ष भड़क सकता है, ऐसी चिंता व्यक्त की जा रही है। उस समय यूरोप में रशिया की गतिविधियों अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा खतरे में लाने का आरोप अमरिका कर रहा है।

तथा अमरिका अपने प्रभाव क्षेत्र में घुसपैठ कर रहा है, ऐसा रशिया का कहना है। ईरान का विवादास्पद परमाणु कार्यक्रम एवं ईरान पर अमरिका ने जारी किए प्रतिबंध पर भी रशिया और अमरिका में तीव्र मतभेद बढ़ रहे हैं।

ऐसी परिस्थिति में अमरिका अपने सहयोगी देशों से रशिया के विरोध में भूमिका स्वीकारने की अपेक्षा कर रहा है। रशिया पर अमरिका ने जारी किए प्रतिबंधों को अमरिका के सहयोगी देशों से सहायता करें, ऐसा बुधवार को अमरिका के विदेश मंत्रालय ने सूचित किया था। वैसा नहीं हुआ तो सहयोगी देशों को भी अमरीका के प्रतिबंधों का झटका लग सकता है, ऐसा दावा इस देश के विदेश मंत्रालय ने किया था। यह चेतावनी भारत के लिए होने की बात स्पष्ट हो रही है। अमरिका ने विरोध करने पर भी भारत ने रशिया से एस-४०० इस अत्याधुनिक हवाई सुरक्षा यंत्रणा की खरीदारी का व्यवहार आगे किया है।

रशियन राष्ट्राध्यक्ष के इस भारत यात्रा में ३९००० करोड रुपयों के इस रक्षा विषय करार पर हस्ताक्षर संपन्न होने वाले हैं। इसकी वजह से अमरिका अस्वस्थ बना है और इस बारे में भारत को लगातार इशारे दिए जा रहे हैं। तथा अमरिका के साथ व्यापार युद्ध में उतरे चीन भी भारत एवं रशिया के इस सहयोग की वजह से चिंता में दिखाई दे रहा हैं।

इसकी वजह से रशिया ने चीन को भी एस-४०० प्रदान करने का निर्णय लिया था। भारत को भी यह यंत्रणा प्रदान करके रशिया ने चीन के चिंता में बढ़ोतरी करने का दावा माध्यमों से किया जा रहा है।

वर्तमान स्थिति में अमरिका के विरोध में रशिया एवं चीन जैसे संगठन होने पर भी दोनों देश अमरिका को सभी स्तर पर चुनौती देने के लिए तैयार है।

ऐसा होते हुए अमरिका का सामरिक साझेदार देश भारत के साथ रशिया के रक्षा विषयक सहयोग अपने हित में नहीं होंगे, ऐसी चीन की भूमिका है। इसलिए कई दिनों से चीन के सरकारी मुखपत्र ने भारत एक ही समय पर अमरिका रशिया और चीन को भी रिझा रहा है, ऐसा आरोप किया था।