६०. इस्रायल की भूमि में बिजलीनिर्माण की शुरुआत

इसवीसन १९२० के दशक के प्रारंभ में ही हालाँकि पॅलेस्टाईन में ज्यू-अरब संघर्ष भड़के थे, ज्यूधर्मियों के लिए सकारात्मक गतिविधियाँ भी घटित होने लगीं थीं। उदा. भविष्यकाल में इस्रायल के उद्योग आदि क्षेत्रों में जिन्होंने मूलभूत महत्त्व का कार्य किया, ऐसीं कई संस्थाओं का निर्माण होकर वे निश्‍चित आकार धारण करने लगीं थीं।

इनमें से सबसे पहली घटना थी – रशियन ज्युइश व्यवसायिक पिनहॅस रुटेनबर्ग को पॅलेस्टाईन प्रदेश में बिजलीनिर्माण और बिजली वितरण के लिए ब्रिटिशों द्वारा रियायती भावों में हक़ प्रदान किये जाना। रुटेनबर्ग भी झायॉनिझम की संकल्पनाओं का जुनून सिर पर सवार हुआ ज्यूधर्मीय था।

इसवीसन १८७९ में तत्कालीन रशियन साम्राज्य के युक्रेन प्रांत में जन्मे और शिक्षा से हायड्रॉलिक इंजिनियर होनेवाले रुटेनबर्ग ने सन १९०५ की पहली रशियन राज्यक्रांति में सक्रिय सहभाग लिया था। लेकिन सोव्हिएत के तत्कालीन सत्तासंघर्ष से ऊबकर और कुल मिलाकर रशिया में ज्यूधर्मियों के खिलाफ़ माहौल ग़र्म हो जाने के कारण उन्हें बढ़ती पीड़ा दी जा रही है यह देखकर, वह अन्तर्मुख होकर झायॉनिझम की ओर आकर्षित हुआ।

इसी दौरान उसकी ‘सोशालिस्ट रिव्हॉल्युशनरी पार्टी’ के एक सहकर्मी नेता की मौत के लिए उसे ज़िम्मेदार ठहराया गया। रुटेनबर्ग इस नेता से मिलने के कुछ ही देर में यह नेता उस कमरे में, छत को टँगी अवस्था में मृत पाया गया था। दरअसल यह नेता दोगली निष्ठा रखता होने की ख़बर पार्टीनेतृत्व को मिली थी और इसकी सज़ा के तौर पर इस नेता को ख़त्म करने ़फैसला भी पार्टीस्तर पर ही किया गया होने की चर्चा थी। लेकिन पार्टी ने उल्टे उसके क़त्ल का इल्ज़ाम रुटेनबर्ग पर ही रखकर उसे पार्टी से निकाल दिया। अब रशिया छोड़ने के अलावा और कोई चारा ही न होनेवाले रुटेनबर्ग ने इटली में पनाह ली। यहाँ कुछ समय राजनीति से दूर रहकर उसने अपनी पसन्द के हायड्रॉलिक इंजिनियरिंग क्षेत्र में संशोधन करने की शुरुआत की।

हॅगाना फोर्स

इसवीसन १९१४ में पहले विश्‍वयुद्ध का आरंभ होने के बाद उसने स्वतंत्र इस्रायल के निर्माण के लिए सशस्त्र सेना का गठन करने की दृष्टि से प्रयास शुरू किये। उसके लिए कई युरोपीय शहरों का दौरा करते हुए उसने, ऐसीं ही कोशिशों में होनेवाले झीईव्ह जॅबोटिन्स्की तथा झायॉनिझम के अन्य नेताओं के साथ संपर्क स्थापित किया। इसी काम के लिए उसने आगे चलकर अमरीका का भी दौरा किया। यहाँ से कार्यरत होनेवाले डेव्हिड बेन-गुरियन एवं इत्झ्वाक बेन-झ्वी के साथ उसने सहयोग किया। अमरीका के वास्तव्य के दौरान उसने, इस्रायल की भूमि में उपलब्ध जलसंसाधन का, खेती के लिए और बिजलीनिर्माण के लिए अधिक से अधिक असरदार उपयोग कैसे किया जा सकता है, इस बारे में उसने अपना रिसर्च पूरा किया।

१९१७ के फ़रवरी महीने में रशिया में हुई राज्यक्रान्ति का उसने स्वागत किया और वह जुलाई १९१७ में रशिया लौटा। उसके बाद अक्तूबार महीन में शुरू हुई, सन १९१७ की दूसरी रशियन राज्यक्रान्ति में उसने हिस्सा लिया। इस राज्यक्रान्ति के बाद उसे सोव्हिएत में महत्त्वपूर्ण पद मिला। लेकिन नये बोल्शेविक उन पुराने नेताओं को ‘पूँजीवादियों के एजन्ट्स’ मानते थे और उनपर ग़ुस्सा करते थे। इस ग़ुस्से के कारण पुनः उसे लक्ष्य करने की कोशिश की गयी। उससे वह बच गया और उसने रशिया से हमेशा के लिए विदा ली।

विश्‍वयुद्ध ख़त्म होने पर पॅरिस में हुईं समझौते की चर्चाओं में ज्यू-राष्ट्र का मुद्दा उपस्थित करने के लिए कई झायॉनिस्ट नेता प्रयास कर रहे थे, उनमें सहभागी होने का मौक़ा रुटेनबर्ग को प्राप्त हुआ। इस मौ़के का फ़ायदा उठाकर रुटेनबर्ग ने, इस्रायल के लिए उसने तैयार की हुई जलसंधारण की रूपरेखा को कइयों के सामने प्रस्तुत किया। उसे अमीर ज्यूधर्मियों से सकारात्मक प्रतिसाद (रिस्पाँज़) प्राप्त हुआ और भारीभरक़म आर्थिक सहायता भी मिली। सन १९२०-२१ के दौरान रुटेनबर्ग ने पॅलेस्टाईन में कदम रखा। लेकिन इसी बीच पॅलेस्टाईन में ज्यू-अरब दंगे शुरू होने के कारण, अपनीं जलसंधारण की योजनाओं को फिलहाल बाजू में रखते हुए रुटेनबर्ग ने जॅबोटिन्स्की की सहायता से, ज्यूधर्मियों की अर्धसैनिकी स्व-रक्षा टुकड़ियाँ (‘सेल्फ-डिफेन्स युनिट्स’) बनाना शुरू किया, जिन्हें ‘हॅगाना’ कहा जाता था।

रुटेनबर्ग द्वारा जॉर्डन नदी पर निर्मित नहारयिम पॉवरस्टेशन

सन १९२१ में इन ज्यू-अरब दंगों के चलते ही ब्रिटिशों ने रुटेनबर्ग को जाफ्फा, तेल अवीव और आसपास के इला़के के लिए बिजलीनिर्माण तथे वितरण के हक़ बहाल किये। इस बिजली निर्माण एवं आपूर्ति के काम के लिए उसने ‘जाफ्फा इलेक्ट्रिक कंपनी’ शुरू की। लेकिन बेथलेहेम आदि आसपास के इला़के के साथ साथ जेरुसलेम के बिजलीनिर्माण, वितरण, पानी की आपूर्ति आदि के हक़ ऑटोमन्स ने सन १९१४ में ही ‘युरिपीडस माव्रोमॅटिस’ नामक एक ग्रीक उद्योगपति को दिये थे। लेकिन अभी भी वहाँ पर कुछ ख़ास काम न हो सका था। मग़र ब्रिटिशों ने रुटेनबर्ग को ये हक़ प्रदान करनें के बाद माव्रोमॅटिस ने इस ़फैसले को हेगस्थित आंतर्राष्ट्रीय कोर्ट में चुनौती दी। जेरुसलेम के लिए उसके अपील को कोर्ट ने स्वीकृत किया। अतः पहले कुछ वर्षों तक रुटेनबर्ग की कंपनी जेरुसलेम में बिजली का निर्माण तथा आपूर्ति नहीं कर सकी।

इस प्रकार कई मुश्किलों का सामना कर रुटेनबर्ग ने बिजलीनिर्माण का कारखाना शुरू किया। लेकिन उसकी शुरुआती योजना के अनुसार यार्कोन नदी पर जलविद्युत का निर्माण न करते हुए उसने डिज़ेल इंजनों की सहायता से बिजली का निर्माण शुरू किया। उसके पश्‍चात् सन १९२६ में उसे ट्रान्सजॉर्डन को बिजली की आपूर्ति करने के लिए जॉर्डन नदी पर जलविद्युतनिर्माण कारखाना बनाने के हक़ प्राप्त हुए। सन १९३० तक उसने जॉर्डन नदी पर ‘नहरयिम’ में (हाल के जॉर्डन में) पॉवरस्टेशन का निर्माण किया। उसके अलावा तेल अवीव, हैफा, तैबेरियस में भी उसने पॉवर स्टेशन्स का निर्माण किया। इसके लिए उसने ‘पॅलेस्टाईन इलेक्ट्रिक कंपनी’ का निर्माण किया, जिसमें अपनी पहले की ‘जाफ्फा इलेक्ट्रिक कंपनी’ को उसने विलीन कर दिया। इस ‘पॅलेस्टाईन इलेक्ट्रिक कंपनी’ का ही रूपांतरण आगे चलकर ‘इस्रायल इलेक्ट्रिक कॉर्पोरेशन’ इस हाल के स्वतंत्र इस्रायल की सबसे बड़ी बिजलीनिर्माण कंपनी में हुआ।

पॅलेस्टाईन इलेक्ट्रिक कंपनी

इस प्रकार मर्यादित संसाधनों की मदद से और काफ़ी सारीं मुश्किलों को मात देते हुए रुटेनबर्ग ने इस्रायल की भूमि में (जेरुसलेम को छोड़कर) बिजली की आपूर्ति शुरू की। अपने देश के लिए उसने की हुई अथक सेवा को ब्रिटिशों ने भी मान्यता दी। आगे चलकर सन १९२५ में जब बाक़ायदा ‘पॅलेस्टाईन नॅशनॅलिटी लॉ’ बना, तब इस नये क़ानून के तहत, पॅलेस्टाईन का पहला पंजीकृत नागरिक बनने का सम्मान रुटेनबर्ग को प्राप्त हुआ। लेकिन उस समय हाथ से छूट गया – जेरुसलेम को बिजली की आपूर्ति करने का सपना उसके जीवनकाल में पूरा नहीं हो सका। आगे चलकर उसके निधन के बाद सन १९४२ में, तत्कालीन जेरुसलेम की बढ़ती हुई बिजली की माँग को पूरा करने में जब माव्रोमॅटिस की कंपनी नाक़ाम साबित होने लगी, तब जाकर ब्रिटिशों ने उसके हाथ से हक़ छीनकर वे रुटेनबर्ग की ‘पॅलेस्टाईन इलेक्ट्रिक कंपनी’ को दे दिये और मरणोपरान्त ही सही, लेकिन रुटेनबर्ग का सपना पूरा हुआ।

इस्रायल के आधुनिक इतिहास में गौरवपूर्ण स्थान होनेवालों में रुटेनबर्ग एक है।

इसी बीच, पोलंड और हंगेरी में ज्यूविरोधी माहौल भड़कने के कारण और वहाँ उस समय आये आर्थिक संकट के कारण; साथ ही, अमरीका ने सन १९२४ में अपने इमिग्रेशन अ‍ॅक्ट में बदलाव कर ज्यूधर्मियों पर अमरीकाप्रवेश के लिए पाबंदी लगाने के कारण, पुनः इसवीसन १९२४ से १९२७ के बीच लगभग ८२ हज़ार ज्यूधर्मीय पोलंड-हंगेरी से पॅलेस्टाईन लौटे (चौथी ‘आलिया’)। इनमें से अधिकांश लोग मध्यमवर्ग से होकर, विभिन्न हुनर होनेवाले थे और उनके पास थोड़ाबहुत पैसा भी था। अतः इस आलिया के लोगों ने पॅलेस्टाईन आने के बाद छोटेबड़े उद्योगधंधे शुरू किये, जिससे कि तेल अवीव, जाफ्फा आदि शहरों की आर्थिक नींव मज़बूत हो गयी। गाँवों में भी अब धीरे धीरे अरबी मज़दूरों की संख्या कम होती जाकर, उनके स्थान पर ज्युइश मज़दूर काम करते हुए दिखायी देने लगे थे।

लेकिन उसीके साथ पॅलेस्टाईन में होनेवाले ज्यूविरोधी वातावरण से ऊबकर इनमें से लगभग २३ हज़ार ज्यूधर्मीय पॅलेस्टाईन में से अन्यत्र स्थलांतरित भी हो गये।

इसी बीच, मध्यपूर्व की भविष्यकालीन राजनीति को दिशा देनेवाले कुछ अतिमहत्त्वपूर्ण घटनाक्रम घटित हो रहे थे….(क्रमश:)

– शुलमिथ पेणकर-निगरेकर