पेंटॅगॉन इराक, सीरिया में सेना तैनाती की जानकारी गुप्त रखेगा

वॉशिंग्टन, दि. २: इराक और सीरिया में सेना तैनात करने की जानकारी मीडिया के सामने जारी न करते हुए गुप्त रखने की नई नीति अमरीका के ट्रम्प प्रशासन ने अपनायी है| इस सेना तैनाती की जानकारी गोपनीय रखने से ‘आयएस’ के आतंकियों को झटका दिया जा सकता है, ऐसी घोषणा अमरीका के रक्षा मुख्यालय ‘पेंटॅगॉन’ ने की| इससे पहले ओबामा प्रशासन ने सेना तैनाती की पूरी जानकारी मीडिया के सामने जारी करने की नीति अपनायी थी| ट्रम्प प्रशासन के नये फ़ैसले से ऐसा दिखाई देता है कि फिर एक बार ट्रम्प प्रशासन ने, इससे पहली सरकार द्वारा अपनायी गई नीति से अलगाव किया|

आतंकवाद के खिलाफ जारी संघर्ष में ‘सरप्राईज् एलिमेंट’ अपनाया जायेगा, मुहिम पर गए जवानों की सुरक्षा और मुहिम की गोपनीयता बरकरार रखने के लिए, इसके आगे किसी भी प्रकार की सेना तैनाती घोषित नहीं की जायेगी| इससे इराक, सीरिया में कितने सैनिक तैनात हैं, कौनसे इलाके में तैनात हैं और कब वापस लौटनेवाले हैं, इन सबकी जानकारी गुप्त रखी जायेगी, ऐसी जानकारी पेंटॅगॉन के प्रवक्ता ‘एरीक पॅहोन’ ने दी| इराक और सीरिया में ‘ऑपरेशन इनहेरन्ट रिझॉल्व्ह’ इस सैनिकी मुहिम से जुड़े अधिकारियों ने भी ट्रम्प प्रशासन के इस फैसले का स्वागत किया|

लेकिन, ओबामा के कार्यकाल में अधिकारी रह चुके कुछ लोगों ने इस फैसले की आलोचना की है| पूर्व राष्ट्राध्यक्ष ओबामा ने यह जानकारी प्रकाशित करने का किया फैसला, यह अमरिकी जनता के लिए किया था| अमरिकी जनता को अपने जवानों की तैनाती की जानकारी होनी ज़रूरी है, ऐसा भी इन अधिकारियों ने कहा है|

कुछ दिनों पहले अमरिकी मीडिया में इराक, सीरिया की सेनातैनाती की जानकारी उजागर हुई थी| करीब ४०० मरीन्स सीरिया में तैनात किए गए हैं ऐसा अमरिकी मीडिया ने कहा था| वहीं, ३०० पॅराट्रूपर्स इराक के मोसूल में तैनात होनेवाले हैं, ऐसी जानकारी भी इसी अमरिकी मीडिया ने दी थी| इसके अलावा लगभग हज़ारों जवान इराक, सीरिया के लिए रवाना होने की खबर भी प्रकाशित हुई थी| फिलहाल इराक में अमरीका के ५२६२ और सीरिया में ५०० से अधिक जवान तैनात होने का दावा किया जाता है|

इसी दौरान, अमरिकी राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प ने, इराक, सीरिया में ‘आयएस’विरोधी संघर्ष में विजय संपादित करेंगे, ऐसी घोषणा की है, जिसके लिए रशिया की सहायता लेने के संकेत भी दिए हैं| राष्ट्राध्यक्ष ट्रम्प के इस फैसले की कुछ अमरिकी सिनेटर्स ने आलोचना की है|