आतंकवाद खत्म करो, तभी चर्चा मुमकिन – भारत के विदेश मंत्री द्वारा तमाचा

हैदराबाद – कर्तारपुर कॉरिडोर शुरू करते समय उसका राजनीतिक लाभ उठाने की तैयारी पाकिस्तान ने की है। उसके अनुसार पाकिस्तान ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सार्क परिषद के लिए निमंत्रण भेजा है। पर जबतक पाकिस्तान आतंकवाद नहीं रोकता, तबतक इस देश से किसी भी प्रकार की चर्चा संभव ना होने की बात कहकर भारत ने पाकिस्तान को जोरदार तमाचा लगाया है। तथा कर्तारपुर कॉरिडोर के पास स्वतंत्र घटना के तौर पर देखा जाए, उसका द्विपक्षीय चर्चा से संबंध ना जोड़ा जाए, ऐसा विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सूचित किया है।

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सन २०१६ में पाकिस्तान के इस्लामाबाद में आयोजित किए सार्क परिषद पर भारत ने बहिष्कार किया था। उरी के आतंकवादी हमले के बाद भारत ने यह निर्णय लिया था। भारत के बाद बांग्लादेश, अफ़गानिस्तान, श्रीलंका, मालदीव एवं भूटान इन देशों ने भी सार्क को बहिष्कृत किया था एवं यह परिषद रद्द हुई थी। उसके बाद अभीतक सार्क परिषद का आयोजन नहीं हुआ है। इस पृष्ठभूमि पर पाकिस्तान ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सार्क परिषद के लिए निमंत्रण दिया है। इस निमित्त से भारत के साथ द्विपक्षीय चर्चा शुरू करने का पाकिस्तान का षड्यंत्र है पर भारत ने पाकिस्तान का यह दाव उधेड़ा है।

भारत के विदेश मंत्रालय ने इस निमंत्रण को ठुकराया है, ऐसी जानकारी दी है। तथा हैदराबाद में बोलते हुए भारत के विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने जबतक पाकिस्तान आतंकवाद का मार्ग एवं भारत से रक्तपात फैलाना नहीं रोकता. तबतक इस देश से चर्चा असंभव होने के बाद विदेश मंत्री स्वराज ने जोर देकर कहीं है। तथा यह मांग मंजूर होने तक पाकिस्तान की अध्यक्षता में सार्क परिषद में भारत शामिल नहीं होगा ऐसा सुषमा स्वराज ने स्पष्ट किया है। तथा भारत ने समय-समय पर पाकिस्तान के सामने दोस्ती एवं सहयोग के लिए हाथ आगे किया था, इसकी याद विदेश मंत्री स्वराज ने दिलाई है।

उन्होंने स्वयं पाकिस्तान का दौरा करके द्विपक्षीय चर्चा के लिए पहल की थी। पर पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के उरी में आतंकवादी हमला करके उसकी वापसी की थी। तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान को दिए सदिच्छा भेट के बाद भी पठानकोट में हवाई अड्डे पर आतंकवादी हमला हुआ था। इसकी वजह से पाकिस्तान भारत में रक्तपात फैलाना नहीं छोड़ रहा तबतक इस देश से चर्चा संभव ना होने की ठोस भूमिका भारत सरकार ने ली है, ऐसा विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने स्पष्ट किया है।

कर्तारपुर कॉरिडोर शुरू करके पाकिस्तान ने भारत में सिख धर्मीयों को गुरुद्वारा नानकाना साहिब का दर्शन लेने का अवसर उपलब्ध कराया है। भारत में १९९४ वर्ष से इसकी मांग हो रही थी, इसकी तरफ ध्यान केंद्रित करके पाकिस्तान ने अब जाकर यह मांग मंजूर की है, इसका दाखिला भी विदेश मंत्री स्वराज ने दिलाया है। तथा कर्तारपुर कॉरिडोर का भारत-पाकिस्तान द्विपक्षीय चर्चा से संबंध नहीं जोड़ा जा सकता, यह स्वतंत्र घटना है, ऐसा स्वराज ने कहा है। उस समय कर्तारपुर कॉरिडोर किसी एक व्यक्ति की वजह से शुरू नहीं हुआ है, बल्कि यह दो देशों के सरकार में निर्णय था, ऐसा सूचक विधान भी विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने किया है।

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