रशिया की सीमा के पास युद्धाभ्यास के लिए नाटो के ४५ हजार सैनिकों की तैनाती

भव्य युद्धाभ्यास में ‘इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेअर’ का भी समावेश

तृतीय महायुद्ध, परमाणु सज्ज, रशिया, ब्रिटन, प्रत्युत्तर

ब्रुसेल्स/मॉस्को – ‘सेव्हिएत संघराज्य’ के विघटन के बाद का सबसे बड़े युद्धाभ्यास के तौर पर पहचाने जाने वाले ‘ऑपरेशन ट्रायटंड जंक्चर १८’ के लिए नाटो लगभग ४५ हजार सैनिक रशियन सीमा के पास उतरने वाले हैं, यह सामने आया है।रशियन सीमा से जुड़कर स्थित नोर्वे, स्वीडन, फ़िनलैंड, आर्क्टिक और बाल्टिक समुद्री क्षेत्र में अभ्यास का आयोजन किया गया है।सदस्य देशों पर दुश्मन का हमला हुआ तो ‘नाटो’ की प्रतिक्रिया और ‘इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेअर’ इस पर अभ्यास में जोर दिया जाएगा, ऐसी जानकारी नाटो के वरिष्ठ अधिकारी एडमिरल जेम्स फॉगो ने दी है।

पिछले महीने में ही रशिया ने तीन लाख से अधिक सैनिकों के समावेश वाले ‘वोस्तोक-२०१८’ इस युद्धाभ्यास का आयोजन करके यूरोप और अमरिका को चेतावनी दी थी।इस अभ्यास के माध्यम से रशिया ने अपने रक्षा बल का सामर्थ्य दिखा दिया है, ऐसा दावा रशियन राष्ट्राध्यक्ष व्लादिमीर पुतिन और लष्करी अधिकारियों ने किया था। इस पृष्ठभूमि पर नाटो ने ‘ऑपरेशन ट्रायटंड जंक्चर १८’ के बारे में घोषित की हुई जानकारी महत्वपूर्ण है।

शुक्रवार को नाटो के वरिष्ठ अधिकारी ने दी जानकारी के अनुसार, २५ अक्टूबर से शुरू होने वाले ‘ऑपरेशन ट्रायटंड जंक्चर १८’में ४५ हजार से अधिक सैनिकों के साथ १० हजार से अधिक टैंक, तोप और हथियारबंद वाहनों का समावेश है।इसके अलावा १३० से अधिक लड़ाकू विमान और ७० युद्धपोतों का भी समावेश है।३० से अधिक सदस्य और सहयोगी देश अभ्यास में हिस्सा लेने वाले हैं।

‘नाटो ने आर्टिकल ५ के अनुसार, अपने सदस्य देशों की सुरक्षा का आश्वासन दिया है।इस सन्दर्भ से नाटो सदस्य देशों की क्षमता का परिक्षण करने के लिए संयुक्त बल नोर्वे में उतरने वाला है। नाटो की फ़ौज एक जगह से दूसरी जगह तक कितनी तेजी से तैनात हो सकती है, इसका अध्ययन अभ्यास के दौरान किया जाएगा। उसी समय ‘इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेअर’इस युद्धाभ्यास का मुख्य हिस्सा होगा’, ऐसी जानकारी एडमिरल जेम्स फॉगो ने दी है।फॉगो नाटो के नेपल्स स्थित ‘जॉइंट फोर्सेस कमांड’ के प्रमुक हैं और युद्धाभ्यास की पूरी जिम्मेदारी उनपर होगी।

नाटो के सदस्य  देशों की सीमा लांघकर घुसपैठ करने की इच्छा रखने वाले शत्रु देशों के लिए यह अभ्यास चुनौती साबित होगी, ऐसा भरोसा भी एडमिरल फॉगो ने इस समय व्यक्त किया है।जुलाई महीने में अमरिका के रक्षामंत्री ने नाटो की बैठक में ‘फॉर थर्टीज’ की संकल्पना रखी थी। उसमें, ३० दिनों  की अवधि में नाटो की ३० लष्करी टुकडियां, ३० युद्धपोत  और लड़ाकू विमानों के ३० स्क्वाड्रन सज्ज रखने का उद्देश्य रखा गया था। अमरीकी रक्षा मंत्री की इस योजना की “ऑपरेशन ट्रायडंट जंक्चर १८” में अमल किया जायेगा , ऐसा नाटो के अधिकारियो ने साफ़ किया है।

सन १९९१ में शीतयुद्ध ख़त्म होने के बाद नाटो की तरफ से लिया जाने वाला यह सबसे बड़ा युद्धाभ्यास साबित होने वाला है।पिछले चार सालों में नाटो ने अपने युद्धाभ्यास की व्याप्ति लगातार बढाई है और ‘ऑपरेशन ट्रायटंड जंक्चर १८’ यह इसका एक निर्णायक पड़ाव साबित होगा, ऐसे संकेत विश्लेषक दे रहे हैं।