१२. मोझेस का इजिप्त वापस लौटना; ‘टेन प्लेग्ज ऑफ़ इजिप्त’

मोझेस के सारे बहाने ख़त्म हो चुके थे और ‘ज्यूधर्मियों के इजिप्त की ग़ुलामी से आज़ाद करके, ईश्‍वर द्वारा अभिवचन देकर बहाल की गयी भूमि में (‘प्रॉमिस्ड लँड’ में) उन्हें ले जाने का काम मोझेस को ही करना है’ ऐसा ईश्‍वर ने उसे स्पष्ट रूप से बताया था। साथ ही, ‘मैं सारा समय तुम्हारे साथ रहने ही वाला हूँ’ ऐसा भी अभिवचन ईश्‍वर ने मोझेस को दिया था। उसीके साथ, उसके ज्यू बांधव उसपर यक़ीन करें इसलिए उसे कुछ चमत्कार कर दिखाने के लिए ईश्‍वर ने कहा और वे सारे चमत्कार वहीं पर उससे करवा भी लिए। उदा. ईश्‍वर ने बतायेनुसार मोझेस द्वारा उसकी लाठी ज़मीन पर फेंकी जाने के बाद उसका साँप में रूपान्तरण हो गया और उस साँप को मोझेस ने हाथ में पकड़ते ही उस साँप का पुनः लाठी में रूपान्तरण हो गया, वगैरा।

(मोझेस की यह लाठी भी (‘स्टाफ़ ऑफ़ मोझेस’) ख़ास होकर, वह अब्राहम से वंशपरंपरा से चलती आयी थी ऐसा यह कथा बताती है। जोसेफ़ की मृत्यु के बाद वह मोझेस के ससुर के – जेथरो के पास आयी थी और उसने उसे अपने घर के आँगन में घुसेड़कर खड़ा किया था। उस लाठी को ज़मीन से खींचकर बाहर निकालने के कइयों ने प्रयास किये, लेकिन वे असफल साबित हुए। मोझेस वहाँ जाने पर उसने उस लाठी को आसानी से खींच बाहर निकाला, जिससे कि जेथरो ने उसे मोझेस के पास सुपूर्त किया था, ऐसा वर्णन इस कथा में आता है।)

ईश्‍वर द्वारा बिदा किये जाने पर मोझेस ने अपने भेड़बक़रियों के झुँड़ पुनः घर लाकर छोड़ दिये और अपने ससुर से बात करके वह पत्नी और बच्चों के साथ इजिप्त के लिए रवाना हो गया। उसके जाने की वजह सुनकर जेथरो भी खुश हुआ और उसने मोझेस को कई आशीर्वाद दिये। अहम बात यानी ईश्‍वर ने मोझेस को यह भी बताया था कि उसे मौत की सज़ा फ़रमानेवाले फ़ारोह की इसी बीच मृत्यु हुई है और नये फारोह ने सत्ता की बागड़ोर सँभाली है। इस कारण मोझेस को थोड़ी राहत मिली थी।

मोझेस की अपने भाई आरॉन से मुलाक़ात हुई। उस समय मोझेस की उम्र अस्सी, तो आरॉनकी उम्र तिरासी थी। फिर उन दोनों ने गोशेन प्रदेश में जाकर वहाँ की विभिन्न बस्तियों के प्रमुखों से भेंट की। इस मुलाक़ात में मोझेस ने अपने आने का प्रयोजन बताया। लेकिन उनमें से कई जन मोझेस पर यक़ीन करने के लिए तैयार नहीं थे। फिर ईश्‍वर के बतायेनुसार मोझेस ने अपनी लाठी से चमत्कार कर दिखाये और तब जाकर कहीं उन बस्तीप्रमुखों ने मोझेस पर यक़ीन किया। उसके बाद उन्होंने स्वयं होकर अपनी अपनी बस्तियों में, अ‍ॅमराम के इन बेटों के बारे में यानी मोझेस एवं आरॉन के बारे में तथा उनकी योजना के बारे में लोगों को समझाकर बताया। इजिप्त की ग़ुलामी के कष्ट के कारण दबे हुए ज्यूधर्मियों को अब आशा की किरन दिखायी देने लगी और चारों तरफ़ खुशी की लहर दौड़ने लगी।

उसके बाद ईश्‍वर के बतायेनुसार मोझेस ने आरॉन के साथ फ़ारोह के राजमहल में जाकर उससे भेंट की। हैरानी की बात यह थी कि जहाँ कड़े बंदोबस्त में रहनेवाले फ़ारोह से भेंट करना तो दूर की बात, उसे महज़ देख पाना भी आम जनता की पहुँच के बाहर था; वहाँ बिना किसी दिक्कत के, मोझेस एवं आरॉन ठेंठ फ़ारोह के ख़ास अंतर्गत महल में जाकर उसके सामने खड़े हो गये। उन्हें अकल्पित रूप में वहाँ देखकर चौंके हुए फ़ारोह ने उनका परिचय तथा उनके आने का प्रयोजन पूछा। तब मोझेस ने अपना परिचय देकर, साथ ही, उसे हुए ईश्‍वर के दृष्टान्त के बारे में बताकर ईश्‍वर का संदेश बताया और ज्यूधर्मियों को इजिप्त की ग़ुलामी से आज़ाद करने की विनति की। इजिप्त में रहनेवाले ज्यूधर्मियों को लेकर मैं अपने ईश्‍वर ने अभिवचन देकर बहाल की हुई भूमि में वास्तव्य करने जानेवाला हूँ, ऐसा मोझेस ने फ़ारोह को बताया।

फ़ारोह को मोझेस की बात पर यक़ीन नहीं हो रहा था। मोझेस ने कर दिखाये चमत्कार भी उसके दिल पर कुछ ख़ास असर न कर सके। ‘ये ऐसे मामूली जादू के खेल तो मेरे दरबार के जादूगर भी करते हैं’ ऐसा फ़ारोह ने कुत्सिततापूर्वक उसे बताया। ‘साथ ही, मैंने इस ईश्‍वर का नाम तक पहले कभी नहीं सुना है, ज़ाहिर है मोझेस झूठ बोल रहा है’ ऐसा कहकर फ़ारोह ने उन्हें फ़ौरन वहाँ से निकल जाने के लिए कहा। इतना ही नहीं, बल्कि अब ज्यूधर्मियों पर का कामों का बोझ एवं अत्याचार अधिक ही बढ़ाने का हु़क्म उसने दिया।

मोझेस मायूस होकर लौट आया, तब ईश्‍वर ने उसे – ‘तुम प्रयास मत छोड़ देना। अंतिम विजय तुम्हारी ही होगी। लेकिन उससे पहले, इजिप्त के राजाओं ने ज्यूधमिर्ंयों पर जो अत्याचार किये हैं, उसकी सज़ा उन्हें भुगतनी ही पड़ेगी। दरअसल, ज्यूधर्मियों को ग़ुलामी की खाई में धकेलकर उनपर अत्याचार करनेवाले फ़ारोह के तथा इजिप्तवासियों के पापों का घड़ा पूरी तरह भरकर मैं उन्हें सज़ा दे सकूँ, इसलिए मैंने ही फ़ारोह का मन कठोर किया है। इस कारण वह तुम्हारी बात से इन्कार करता रहेगा और उसके परिणामस्वरूप इस दौरान एक के बाद एक आपत्तियों का इजिप्तवासियों को मुक़ाबला करना पड़ेगा। इसलिए तुम अब पुनः फ़ारोह के पास जाओ’ ऐसा कहा।

ईश्‍वर ने बतायेनुसार मोझेस और आरॉन पुनः फ़ारोह के पास गये और उसे पुनः पिछली बार की तरह ही, ज्यूधर्मियों को ग़ुलामी से आज़ाद करने के लिए कहा। जब फारोह उनकी एक नहीं सुन रहा था, तब उन्होंने उसे ईश्‍वर ने दी हुई चेतावनी भी बतायी, जिसे मज़ाक समझकर फारोह हँस पड़ा।

उसके बाद जब फ़ारोह हररोज़ की तरह नदी पर जलविहार करने गया, तब ईश्‍वर ने बतायेनुसार मोझेस ने अपनी लाठी नदी की दिशा में उठायी। उसी पल नदी का पानी लाल खून में रूपान्तरित हुआ। नदीस्थित मछलियाँ आदि जलचर तो मर ही रहे थे, साथ ही पूरे राज्य का हर जलाशय अब खून से भर गया था। इतना ही नहीं, बल्कि नये जलस्रोतों की खोज की, तो भी वहाँ से भी ज़मीन से खून ही उछल रहा था – अपवाद (एक्सेप्शन) केवल ज्यूधर्मियों के गोशेन प्रान्त के जलस्रोतों का था।

कुछ ही दिनों में जब पीने के लिए भी पानी नहीं बचा, तब मजबूरन् फ़ारोह ने मोझेस से माफ़ी माँगते हुए, इस संकट से राज्य को बचाने की उसे विनति की और ज्यूधर्मियों को ग़ुलामी से आज़ाद करने का अभिवचन मोझेस को दिया। मोझेस ने पुनः ईश्‍वर की प्रार्थना करने पर सबकुछ पूर्ववत हुआ। लेकिन सबकुछ आलबेल होने के बाद फ़ारोह ने वचनभंग करते हुए, ज्यूधर्मियों को ग़ुलामी से आज़ाद करने से पूरी तरह इन्कार कर दिया।

इसी क्रमानुसार आगे चलकर ऐसा नौ बार घटित हुआ और इजिप्तवासियों को कुल मिलाकर दस महाभयानक आपत्तियों का सामना करना पड़ा (‘टेन प्लेग्ज ऑफ़ इजिप्त’)। हर बार, आपत्ति की चपेट से राज्य को बचाने फ़ारोह द्वारा मोझेस की मिन्नतें की जाना तथा ज्यूधर्मियों को ग़ुलामी से आज़ाद करने का वचन दिया जाना और आपत्ति के दूर होने पर वचनभंग किया जाना, ऐसा ही घटित होता गया।

जिनमें, एक आपत्ति में मोझेस द्वारा इशारा किया जाते ही राज्य में सब जगह मेंढ़क ही मेंढ़क, जहाँ देखो वहाँ – जलाशयों में, सड़कों पर, घरों में, खाने में, यहाँ तक कि बिस्तरों में भी मेंढ़क दिखायी देने लगे….फ़ारोह का राजमहल भी इसमें से नहीं छूटा।

इसी प्रकार की – सब जगह भयानक ज़हरीले जंगली की कीड़े; बड़े बड़े ख़ूँख्वार जानवर; पालतू जानवरों को जानलेवा बीमारियों की बाधा; पूरे बदन पर फोड़े उठना; आकाश में से उपलवृष्टि तथा अग्निवर्षाव; भयानक राज्यव्यापी टिड्डीदल का हमला; आँखें फ़ाड़कर देखा तो भी कुछ दिखायी न दें और दीये के प्रकाश को भी निगल लें ऐसा भयानक गाढ़ा अँधेरा – ऐसी भीषण आपत्तियों का थोड़े थोड़े दिनों की दूरी से इजिप्तवासियों को सामना करना पड़ा। लेकिन इन आपत्तियों का उसी राज्य में रहनेवाले ज्यूधर्मियों पर कुछ भी असर नहीं हो रहा था।

नौं आपत्तियाँ आकर गयीं थीं, मग़र फिर भी फ़ारोह ईश्‍वर की आज्ञा को मानने से इन्कार कर रहा था।

अब ईश्‍वर ने – ‘अब मैं आख़िरी आपत्ति फ़ारोह के राज्य पर छोड़नेवाला हूँ, जिसके बाद शरण आकर फारोह ज्यूधर्मियों को ग़ुलामी में से आज़ाद करेगा’ ऐसा मोझेस से कहा। (क्रमश:)

– शुलमिथ पेणकर-निगरेकर