शरणार्थी मतलब हमारे लिए परधर्मियों का आक्रमण – हंगेरी के प्रधानमंत्री विक्टर और्बन

तृतीय महायुद्ध, परमाणु सज्ज, रशिया, ब्रिटन, प्रत्युत्तर

बरलिन – हंगेरी और जर्मनी इनका दुनिया की तरफ देखने का दृष्टिकोण अलग है। जर्मनी जिनकी तरफ शरणार्थी के तौर पर देख रहे हैं, वह हमारे लिए परधर्मियों का आक्रमण है, ऐसा हंगेरी के प्रधानमंत्री विक्टर और्बनने कहकर कड़े बोल सुनाएं है। जर्मनी के दौरे पर होने वाले पर प्रधानमंत्री और्बनने एक दैनिक को दिए मुलाकात में चांसलर मर्केल के धारणाओं पर तोंफ दागी है। ख्रिस्ती धर्मीय और इस्लाम धर्मीय समाज एकजुट नहीं हो सकते एवं इसकी वजह से समांतर समाज व्यवस्था निर्माण होगी, ऐसी चेतावनी प्रधानमंत्री और्बनने मुलाकात में दी है।

बिल्ड इस जर्मन दैनिक को दिए मुलाकात में और्बन परधर्मीय एवं घुसपैठ शरणार्थियों को लक्ष्य किया है। हंगरी, यूरोप में घुसपैठ करने वालों की तरफ शरणार्थी के तौर पर नहीं देख रहे हैं। हंगेरी के लिए वह परधर्मियों का आक्रमण है। यूरोप में बड़ी तादाद में पर्धर्मीय दाखिल होने पर उससे समांतर समाज व्यवस्था निर्माण होगी। क्योंकि ख्रिस्त धर्मीय और इस्लाम धर्मीय समाज कभी भी एकजुट नहीं हो सकते। इसकी वजह से बहूसंस्कृतविवाद यह सिर्फ एक आभास है, ऐसे कड़े शब्दों में और्बनने अपनी भूमिका स्पष्ट की है।

शरणार्थी

जर्मन चांसलर मर्केल इनके साथ हुए पत्रकार परिषद में और्बनने आक्रामक शब्दों में अपनी भूमिका न बदलने की बात स्पष्ट की है। अफ्रीका एवं आशिया से आनेवाले शरणार्थियों को लगातार सहायता प्रदान हो रही है, तो उन्हें यूरोप में आने के लिए प्रोत्साहन मिल रहा है। पर यह सहायता बंद करनी चाहिए। यूरोप के सीमा बंद करके शरणार्थी जिस देश से आ रहे हैं, उन्हें वहीँ सहायता देनी चाहिए। किसी भी स्थिति में बाधा एवं तकलीफ साथ लानेवालों को रोकना चाहिए, ऐसी चेतावनी और्बन दी है।

साथ ही शरणार्थियों को रोकने के लिए हंगेरी ने ८००० जवान अपनी सीमा पर तैनात किए हैं, ऐसा कहकर इसकी वजह से जर्मनी में शरणार्थीयों को भीरोका जा सकता हैं, इसकी याद और्बनने दिलाई है। शरणार्थी के प्रश्न पर जर्मन नेतृत्व लगातार हंगरी पर आलोचना कर रहे हैं पर उसके बदले उन्होंने हंगरी के आभार मानने चाहिए, ऐसी टिप्पणी प्रधानमंत्री और्बनने लगायी है।

हंगेरी के प्रधानमंत्री ने शरणार्थियों के प्रश्न पर वास्तववादी भूमिका का स्वीकार करते दिखाई दे रहे हैं। जर्मनी के चांसलर मर्केल आज भी अपनी भूमिका पर कायम होते दिखाई दे रहे हैं। आखिर में शरणार्थियों के प्रश्न मानवीय भूमिका से देखना चाहिए, ऐसा कहकर चांसलर मर्केल ने शरणार्थियों का समर्थन किया है और मर्केल ने अपना पद टिकाने के लिए इस मुद्दे पर समझौता करने की बात सामने आई है। तथा शरणार्थियों के बारे में उदार भूमिका स्वीकारने के राजनीतिक परिणाम मर्केल को सहने पढ़ रहे हैं, इसके स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं।

हालही में संपन्न हुए एक परीक्षण में लगभग ८० प्रतिशत जर्मन जनता चांसलर मर्केल इनपर नाराज होने की बात सामने आई है। साथ ही शरणार्थियों के विरोध में कड़ी भूमिका का स्वीकार करनेवाली एवं जर्मनी की मूल पहचान कायम रखने के लिए आक्रामक भूमिका लेने वाले राजनीतिक पक्ष एवं गटो को जर्मन जनता से मिलनेवाला समर्थन बढ़ता जा रहा है।

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