जापान के लडाकू विमानों पर लंबी दूरी की मिसाइल तैनात होंगे

तृतीय महायुद्ध, परमाणु सज्ज, रशिया, ब्रिटन, प्रत्युत्तरटोकिओ – अपनी सुरक्षा सज्जता में तेजी से बदलाव करनेवाले जापान ने हवाई सुरक्षा धारणा अधिक आक्रमक करने की तैयारी की हैं| जापान के लड़ाकू विमानों पर तैनात मध्यम दूरी की विध्वंसक भेदी मिसाइलों की घातक क्षमता बढ़ाकर लंबी दूरी के मिसाइल तैनात करने की तैयारी शुरू की हैं| इस कारण ४०० किलोमीटर दूरी पर होनेवाले और अपनी सुरक्षा के लिए खतरा साबित होनेवाले लड़ाकू जहाजों पर कार्रवाई करना आसान हो जाएगा, ऐसा दावा जापान के सरकारी सूत्रों ने किया हैं|

जापान के प्रधानमंत्री शिंजो ऍबे ने अपने सुरक्षा दलों के आधुनिकीकरण के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं| दो वर्षों पहले ही जापान के सुरक्षा मंत्रालय ने ऐसे मिसाइलों की खरीद करने की मांग की थीं| परंतु यह मिसाइल खरीदने के बजाय ऍबे सरकार ने स्वदेशी बनावट की लंबी दूरी के मिसाइलों के निर्माण के लिए अतिरिक्त धन उपलब्ध किया है|

दो महीनों पहले एक कार्यक्रम में बातचीत करते हुए प्रधानमंत्री ऍबे ने लंबी दूरी की मिसाइल का निर्माण करने का निर्णय घोषित किया था| साथ ही लंबी दूरी के मिसाइलों का निर्माण करना अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन नहीं होगा, यह भी प्रधानमंत्री ऍबे भी कहा था| इसके पश्चात जापान का सुरक्षा मंत्रालय लंबी दूरी की मिसाइल का निर्माण करने की जानकारी भी सामने आई है|

जापान ने वायुसेना के बेड़े में होने वाले लड़ाकू विमानों में अभी तक हवा से जमीन पर हमला करने वाले मध्यम दूरी के ‘एसएसएम३’ सुपरसोनिक मिसाइल्स तैनात किए थे| इन मिसाइलों की घातक क्षमता २०० किलोमीटर थी| जापान के सुरक्षा मंत्रालय से संबंधित सूत्रों ने दी जानकारी के अनुसार जापान जल्द ही हवा से लड़ाकू जहाजों पर हमला करनेवाले लंबी दूरी के क्रूज मिसाइल विकसित कर रहा हैं|

लंबी दूरी की यह मिसाइल ध्वनी से तीन गुना अधिक गति से यात्रा कर ४०० किलोमीटर की दूरी पर शत्रु के विध्वंसक, लड़ाकू जहाज तथा गश्ती जहाजों को सहजता से लक्ष्य कर सकते हैं| ध्वनि से तीन गुना तेजी से यात्रा करने के कारण शत्रु के लड़ाकू जहाज़ों को इन मिसाइलों का पता लगना मुश्किल हो सकता हैं| इस कारण जापान की हवाई सुरक्षा योजना के कक्षा के बाहर होने वाले शत्रु के विध्वंसक, लड़ाकू जहाजों को लक्ष्य करने के लिए यह लंबी दूरी के मिसाइलों का उपयोग किया जाएगा, ऐसा सुरक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने कहा हैं|

पिछले कुछ वर्षों में चीन ने अपनी नौसेना की सज्जता में की वृद्धि जापान की सुरक्षा के लिए चुनौती साबित होने लगी हैं| इस पृष्ठभूमि पर जापान ने भी अपनी सुरक्षा धारणा अधिक आक्रमक की हैं| इसलिए जापन ने हेलिकॉप्टर वाहक लड़ाकू जहाज पर लड़ाकू विमान उतारने की तैयारी की हैं| साथ ही अपनी समुद्री सीमा के सेंकाकू और अन्य द्वीप समूहों के और खनिज सम्पदा की सुरक्षा के लिए जापान ने ऍम्फिबियस लड़ाकू जहाज, ड्रोन्स की खरीदारी तथा अमेरिका से प्रगत ‘एजिस’ सुरक्षा यंत्रणा की तैनाती करने का निर्णय लिया था| अभी लड़ाकू विमानों पर लंबी दूरी के मिसाइल तैनात करने का निर्णय भी चीन को चुनौती देने वाला होने का दावा अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ और माध्यम कर रहे हैं|

‘ईस्ट तथा साउथ चायना सी’ के संपूर्ण समुद्री क्षेत्र पर हक जताने वाले चीन ने अपनी लड़ाकू जहाजों पर होने वाले रडार तथा हवाई सुरक्षा यंत्रणा में सुधार किया हैं| चीन ने अपने लड़ाकू जहाजों पर प्रगत हवाई सुरक्षा यंत्रणा तैनात करते हुए इनमें १५० किलोमीटर दूरी का लक्ष्य ध्वस्त करने की क्षमता होने का दावा किया था| इस हवाई सुरक्षा यंत्रणा के सामने जापान के विमानों पर तैनात मध्यम दूरी के मिसाइल्स असफल साबित होते| इस कारण चीन के लड़ाकू जहाजों को चुनौती देने के लिए जापान अपने लड़ाकू विमानों पर लंबी दूरी की मिसाइल तैनात करता दिखाई दे रहा हैं|