भारत की ईंधन संबंधी जरूरत एवं मांग नजरअंदाज ना करे – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया ईंधन निर्यातदारों के सामने निवेदन

नई दिल्ली – ‘देश की आर्थिक प्रगति के लिए कम किमतों में और लगातार होने वाली ईंधन की आपुर्ति काफी अहम बात साबित होती है| ईंधन की कम किमतों की वजह से नीचले स्तर की जनता तक विकास का लाभ पहुंचाना मुमकिन होता है’, यह कहकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन्होंने ईंधन उत्पादक देश एवं कंपनीयों को ईंधन का दर सीमित रखने का निवेदन किया| ईंधन की कम दरों से होने वाली आपुर्ति सीर्फ ग्राहकों के लिए ही नही, बल्कि निर्यातदारों के भी हित में रहती है, इस ओर प्रधानमंत्री मोदी इन्होंने ध्यान आकर्षित किया| नई दिल्ली में आयोजित ‘पेट्रोटेक’ परिषद में बोलते समय प्रधानमंत्री ने वर्ष २०३९ तक भारत विश्‍व में दुसरे पायदान की अर्थव्यवस्था बनेगी, इसका एहसास ईंधन उत्पादक देश एवं कंपनीयों को कराया|

नई दिल्ली के निकट नोएडा में आयोजित ‘पेट्रोटेक’ इस ईंधनविषय की परिषद में विश्‍व के प्रमुख ईंधन उत्पादक देशों की ईंधन कंपनीयां शामिल हुई है| इस परिषद को संबोधित करते समय प्रधानमंत्री मोदी इन्होंने ईंधन के किमतो से जुडी भारत भी भूमिका प्रभावी तरीके से रखी| भारत अपनी कुल मांग की तुलना में ८० प्रतिशत ईंधन की आयात कर रहा है| इस वजह से ईंधन के दामों में हो रहे उतार चढाव एवं अनिश्‍चितता का भारतीय अर्थव्यवस्था पर बडा परीणाम होता है, इस ओर प्रधानमंत्री मोदी इन्होंने सभीयों का ध्यान आकर्षित किया| ऐसी परिस्थिति में देश का विकास और आर्थिक प्रगति के लिए कम और स्थिर दामों में होनेवाली ईंधन की लगातार आपुर्ति अत्यंत जरूरी है, इस बात पर प्रधानमंत्री ने ध्यान दिलाया|

आम लोगों के खाना बनाने से हवाई जहाजों के उडान के लिए ईंधन की जरूरत होती है| इसी लिए कम दामों में ईंधन की बिना रुके आपुर्ति होना देश की आर्थिक प्रगति पर बडा परीणाम करनेवाला घटक बनता है, ऐसा प्रधानमंत्री ने कहा| साथ ही ईंधन के दामों में होने वाले बडे बदलाव एवं उसके प्रतिकूल परीणाम पूरे विश्‍व ने आज तक बर्दाश्त किए है| लेकिन, अगले समय में ईंधन के दामों की स्थिरता काफी अहम साबित होगी| भारत जैसे देशों के लिए ईंधन के दाम स्थिर रहना बडा असरदार होता है| फिलहाल भारत विश्‍व में छठी स्तर की अर्थव्यवस्था है एवं ईंधन खरीद कर रहे देशों में भारत तिसरें पायदान पर है| हर साल भारत की ईंधन की मांग पांच प्रतिशत से बढ रही है| इस वजह से भारत ईंधन निर्यातदारों के लिए सबसे अधिक आकर्षित करनेवाला स्थान बनता है, इस ओर भी प्रधानमंत्री ने ध्यान आकर्षित किया|

वर्ष २०३९ तक भारत विश्‍व में दुसरे पायदान की अर्थव्यवस्था बनेगी, ऐसा कहकर भारत की मांगो की ओर अनदेखी करना किसी भी ईंधन उत्पादक कंपनी एवं ईंधन निर्यात दार देश के हित में नही रहेगा, इसका एहसास प्रधानमंत्री मोदी इन्होंने इस परिषद में दिलाया है|