सउदी और युएई की अन्न सुरक्षा के लिए भारत का सहयोग

मुंबई – खाडी देशों में बन रही अस्थिरता की पृष्ठभुमि पर सउदी अरेबिया और संयुक्त अरब अमिराती (यूएई) जैसे देश अपनी अन्न सुरक्षा के लिए खास सावधानता बरत रहे है| इसके लिए इन देशों ने भारत के साथ समझौता करने की तैयारी की है| इसके नुसार सउदी और ‘यूएई’ भारत में अनाज की खेती करने के साथ उससे जुडी प्रक्रिया करने के लिए बुनियादी सुविधाओं की परियोजना में निवेश करने का विचार कर रहे है| केंद्रीय व्यापार मंत्री सुरेश प्रभू इन्होंने इस संबंधी जानकारी उजागर की है|

‘कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज’ (सीआईआई) की परीषद में व्यापार मंत्री सुरेश प्रभू बोल रहे थे| सउदी अरेबिया और ‘यूएई’ यह देश अपनी अन्न सुरक्षा के लिए भारत की सहायता पाने की तैयारी में है| इन देशों को आवश्यक अनाज की खेती भारत में की जाएगी और उसके लिए खास कृषी प्रकल्प हाथ में लिए जाएंगे| यहां के अनाज की सउदी और ‘यूएई’ को निर्यात की जाएगी| इस वजह से निकट के समय में सउदी और ‘यूएई’ की अन्न सुरक्षा के लिए भारत प्रमुख केंद्र बनेगा, यह विश्‍वास व्यापार मंत्री ने व्यक्त किया|

इस वजह से भारतीय कृषी क्षेत्र की निर्यात का पहली बार इतनी बडी तादात में विचार हो रहा है और देश की कृषी क्षेत्र की क्षमता बडी मात्रा में बढेगी, यह दावा प्रभू इन्होंने किया| भारत का कृषी क्षेत्र निर्यात के लिए तैयार हो रहा है| इससे बडी संख्या में आय प्राप्त होगी, यह कहकर केंद्रीय व्यापार मंत्री ने आनेवाले समय में इस क्षेत्र को बडा अवसर प्राप्त होगा, यह भी स्पष्ट किया| इस प्रकल्प के बारे में ‘यूएई’ के साथ भारत की चर्चा अंतिम पायदान पर है?और इस संबंधी निर्णय जल्द ही होने की उम्मीद है, यह प्रभू इन्होंने कहा है|

भारत और ‘यूएई’ की सरकार ने इस योजना का प्लान पहले ही मंजूर किया था, यह जानकारी सुरेश प्रभू इन्होंने इस अवसर पर दी| ‘यूएई’ भारत के सेंद्रीय शेती और अन्न प्रक्रिया उद्योग में निवेश करने के लिए उत्सुक है| भारत ने भी ‘यूएई’ को ‘फूड प्रोसेसिंग पार्क’ के साथ ही कृषी उत्पाद से जुडे बुनियादी सुविधाओं की विकास योजनाओं में निवेश करने करने के लिए प्रस्ताव रखा था| इसमें कृषी उत्पाद के लिए शीतगृह और इसके अलावा कृषी उत्पाद रखने के लिए आधुनिक तकनीक की प्रकल्पों का समावेश है|

खाडी क्षेत्र में काफी बडी राजनीतिक और सामरिक उथल पुथल शुरू है और इस वजह से यह क्षेत्र अस्थिर बना दिखाई दे रहा है| सउदी अरेबिया और मित्र देशों ने येमेन के साथ युद्ध शुरू किया है और यह युद्ध अधिक से अधिक तीव्र होता दिखाई दे रहा है| साथ ही खाडी के देशों में शुरू लष्करी संघर्ष और सामाजिक अस्थिरता भी आगे अधिक से अधिक तीव्र होगी, यह विश्‍लेषकों का कहना है| इसी में ईरान पर किसी भी क्षण हमला करने की चेतावनी इस्रायल ने दी है और ईरान भी इस्रायल को नष्ट करने की धमकी दे रहा है|

ऐसी अस्थिरत परिस्थिति में सउदी और ‘यूएई’ जैसे देश अपनी अन्न सुरक्षा के लिए सबसे अधिक अहमियत दे रहे है और इसके लिए?भारत के साथ सहयोग कर रहे है, यह बात भारत के लिए स्वागतार्ह साबित होती है|